फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   Politic on air pollution in delhi hots up

दिल्ली में प्रदूषण बढ़ने पर शुरू हुई सियासी खींचतान, केजरी पर दोतरफा वार, इधर से पलटवार

Fri, 16 Oct 2020 04:52 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Fri, 16 Oct 2020 04:52 AM IST
विज्ञापन
Politic on air pollution in delhi hots up
pollution in delhi ncr - फोटो : एएनआई

दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण के बढ़ते स्तर के साथ ही सियासी खींचतान भी शुरू हो गई है। केंद्रीय पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावडे़कर ने बृहस्पतिवार को कहा कि दिल्ली-एनसीआर में इस साल अब तक पराली से महज चार फीसदी ही वायु प्रदूषण हुआ है, बाकी 96 फीसदी के लिए स्थानीय कारक जिम्मेदार हैं। वहीं, केंद्रीय मंत्री के इस बयान पर पलटवार करते हुए दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल ने कहा, सिर्फ पल्ला झाड़ने से समस्या का हल नहीं निकलेगा। साथ ही सवाल भी किया कि जब स्थानीय स्तर के प्रदूषण में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है तो किस तरह से दिल्ली का प्रदूषण बढ़ गया है।

विज्ञापन


96 फीसदी प्रदूषण स्थानीय वजहों से : प्रकाश
केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने इस दौरान केंद्रीय पर्यावरण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) की 50 निरीक्षण टीमों को हरी झंडी दिखाकर फील्ड पर रवाना किया। ग्रैप के तहत ये टीमें दिल्ली-एनसीआर के विभिन्न हॉटस्पाट्स पर वायु प्रदूषण की निगरानी करेंगी और रिपोर्ट तैयार करेंगी। इस मौके पर जावड़ेकर ने कहा, कोरोना वॉरियर्स की ही तरह प्रदूषण की लड़ाई लड़ने वाले इन योद्धाओं का भी हमें सम्मान करना चाहिए। 
विज्ञापन


केंद्रीय मंत्री के मुताबिक, सर्दियों में प्रदूषण की स्थिति गंभीर रहती है। इस दौरान हवा की गति कम हो जाती है, इससे प्रदूषण जम जाता है। उन्होंने कहा कि पराली का जलना भी अभी 20 दिन चलेगा, इसलिए सरकार इस दिशा में काम करे। उन्होंने कहा कि मौसमी बदलाव होने से प्रदूषक दूर-दूर तक नहीं फैल पाते, वह दिल्ली के वातावरण में टिककर प्रदूषण की वजह बनते हैं। हिमालय से आने वाली ठंडी हवा, गंगा-यमुना से उठने वाली भाप और स्थानीय स्तर पर उड़ रही धूल के मिलने से दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण की स्थिति गंभीर होती जाती है। जावड़ेकर ने बताया पराली से निपटने के लिए केंद्र ने पंजाब में अधिक मशीनें दी हैं। जावड़ेकर ने पंजाब सरकार से पराली जलाए जाने की घटना पर रोक लगाने के लिए ठोस कदम उठाने की गुजारिश की है।
विज्ञापन
विज्ञापन


केजरीवाल ने पूछा-15 दिन में कैसे बढ़ा प्रदूषण
मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने जावड़ेकर के दावे पर पलटवार करते हुए ट्वीट किया, सिर्फ पल्ला झाड़ लेने से मुसीबत का हल नहीं निकलेगा। अगर पराली से सिर्फ 4 फीसदी वायु प्रदूषण हुआ तो दिल्ली-एनसीआर में पिछले 15 दिनों में अचानक प्रदूषण कैसे बढ़ा? उन्होंने अगले ट्वीट में कहा, 15 दिन पहले तक हवा साफ थी। यह हर साल की कहानी है। केजरीवाल ने कहा कि हर साल एक ही कहानी दोहराई जा रही है। 

मुख्यमंत्री ने कहा कि हम यह स्वीकार करते हैं कि इस दौरान उत्तर भारत में हर बार पराली जलने से भारी प्रदूषण होता है। हम सबको मिलकर इस समस्या से ईमानदारी से निपटना होगा। लोग पीड़ित हैं। यह बेहद चिंता की बात है कि कोरोना के साथ प्रदूषण भी कहर भी बड़ी आबादी को झेलना पड़ेगा। आप विधायक राघव चड्ढा ने कहा, सीपीसीबी का खुद का अनुमान था कि 2019 में पराली से 44 फीसदी वायु प्रदूषण हुआ। पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय ने भी माना कि पंजाब-हरियाणा में ज्यादा पराली जलाने से ही 44 फीसदी प्रदूषण हुआ। फिर केंद्रीय मंत्री किस आधार पर ऐसा दावा कर रहे हैं?

दूसरी तरफ दिल्ली के पर्यावरण मंत्री गोपाल राय ने कहा कि दिल्ली के अंदर एक तरफ इस नासा के चित्र को रख लीजिए और दूसरी तरफ 15 दिन में एक्यूआई के बढ़े स्तर के आंकड़े को रख लें। जैसे-जैसे यह लाल क्षेत्र नासा के मानचित्र में बढ़ता गया, 15 दिनों के अंदर दिल्ली में उसी अनुपात में वायु गुणवत्ता सूचकांक बढ़ता गया। उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार अपने प्रदूषण के स्रोतों को रोकने के लिए प्रतिबद्ध है। 

दिल्ली के प्रदूषण पर झूठ बोलना बंद करें केजरीवाल : कैप्टन

मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने वीरवार को दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से कहा कि वह राष्ट्रीय राजधानी के पर्यावरण को बचाने में अपनी नाकामी पर पर्दा डालने और इससे लोगों का ध्यान भटकाने के लिए झूठ बोलना बंद करें। दिल्ली के प्रदूषण और पराली जलाने के बीच संबंध को दर्शाते नए आंकड़ों का स्वागत करते हुए पंजाबके मुख्यमंत्री ने यह बात कही। 

उन्होंने कहा कि नए आंकड़ों से इस मुद्दे पर पंजाब सरकार के पक्ष की पुष्टि हुई है। केंद्रीय पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावडे़कर ने कहा था कि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) के 2.5 पार्टिकल मैटर में पराली जलाने से प्रदूषण का हिस्सा केवल 4 प्रतिशत है और बाकी स्थानीय कारणों का योगदान है। 

कैप्टन ने इस संबंध में आए विस्तृत अध्ययन के नतीजों को अस्वीकार करने पर दिल्ली के मुख्यमंत्री की आलोचना की। कैप्टन ने कहा कि वास्तव में यह केजरीवाल हैं, जिसने सच्चाई से मुंह मोड़ा हुआ है। यदि केजरीवाल दिल्ली के संकट से निपटने के प्रति गंभीर हैं तो उनको तुरंत सच्चाई न मानने का हठ छोड़कर उचित हल ढूंढने के लिए तह तक जाकर काम करना चाहिए। केजरीवाल की तरफ से असली स्थिति संबंधी दिल्ली निवासियों को अंधेरे में रखने के अपने एजंडे के अंतर्गत गलत जानकारी फैलाई जा रही है।

कई सालों से उनकी सरकार हालात से निपटने में बुरी तरह असफल रही है। पंजाब के मुख्यमंत्री ने कहा, यहां बहुत स्पष्ट संकेत हैं कि दिल्ली के प्रदूषण के मुख्य कारण निर्माण, मलबा और धूल आदि हैं, जो सभी हवा में प्रदूषण के कणों को भेजते हैं।

नगर निगमों ने महाअभियान की शुरुआत की

राजधानी में वायु प्रदूषण रोकने के लिए नगर निगमों ने महाअभियान की शुरुआत की है। इसके तहत सड़कों पर पानी के छिड़काव के साथ-साथ रात्रि गश्त को तवज्जो दी जा रही है ताकि रात में कूड़ा जलाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जा सके।

उत्तरी दिल्ली नगर निगम के महापौर जयप्रकाश ने करोल बाग से अभियान की शुरुआत करते हुए कहा कि निगम ने हवा में धूल कणों को रोकने व प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए सड़कों पर नियमित रूप से पानी का छिड़काव करने का निर्णय लिया है। इसके अलावा खुले में मलबा डालने और कूड़ा जलाने की जांच के लिए भी एक विशेष टीम गठित की गई है जो विभिन्न क्षेत्रों का निरीक्षण कर सभी गतिविधियों पर रोक लगाने का काम करेगी। महापौर ने बताया कि 18 मेकेनिकल स्वीपिंग मशीन की मदद से सड़कों की साफ-सफाई की जाएगी।

वहीं, पूर्वी दिल्ली नगर निगम के महापौर निर्मल जैन ने बताया कि पूर्वी निगम के अंतर्गत करीब 50 हजार वर्ग मीटर कच्चे क्षेत्र को चिह्नित कर उसे पक्का व हरा-भरा करने की योजना है। इसके तहत करीब 20 हजार वर्ग मीटर क्षेत्र का काम भी पूरा हो गया है वहीं, शेष रह गए 30 हजार वर्ग मीटर क्षेत्र का काम नवंबर तक पूरा कर लिया जाएगा। उन्होंने बताया कि प्रदूषण की रोकथाम के लिए 30 टीम का गठन किया गया है जो रात दिन गश्त करेंगी। ऐसे में यदि कोई व्यक्ति खुले में मलबा डालता है तो उसके ऊपर कार्रवाई भी की जाएगी। 

महापौर ने बताया कि प्रदूषण फैलाने के संबंध में निगम द्वारा गत 14 अक्टूबर तक 20 चालान किए गए हैं। इसके अलावा 600 से 700 मीट्रिक टन निर्माण और विध्वंस अपशिष्ट को शास्त्री पार्क के सी एंड डी प्लांट में भेजा जा रहा है। उन्होंने बताया कि निगम के अंतर्गत आने वाले आठ वार्ड में गीला और सूखा कूड़ा अलग उठाने के लिए भी काम शुरू कर दिया गया है वहीं, खुले में धूल के कणों को रोकने के लिए पांच एंटी स्मॉग गन लगाने के अलावा 40 वाटर स्प्रिंकलर टैंकर की भी मदद ली जा रही है।

दक्षिणी निगम महापौर अनामिका ने बताया कि निगम के अंतर्गत आने वाले क्षेत्रों में धूल उड़ने वाली सड़कों को चिह्नित कर वहां वाटर स्प्रिंकलर ट्रक से छिड़काव किया जा रहा है। इसके अलावा रात्रि गश्त के लिए विभिन्न टीम का भी गठन किया गया है जो चालान करने का काम करेंगी। 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed