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आपके जेब में पड़ा हुआ सिक्का हो सकता है नकली!

Mon, 01 Sep 2014 11:20 AM IST
Updated Mon, 01 Sep 2014 11:20 AM IST
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Police got fake coin.

नकली नोट चलाने वाले एक गिरोह के सदस्य से पुलिस ने पांच रुपये के 11 हजार नकली सिक्के बरामद किए हैं। गिरोह के एक सदस्य को थाना नोएडा सेक्टर-58 पुलिस ने गिरफ्तार किया गया है। वहीं, गिरोह का एक अन्य आरोपी फरार है।

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पिछले कई दिनों से यह गिरोह शहर में नकली सिक्के चला रहा है। पूरा रैकेट की तलाश में पुलिस जगह-जगह छापेमारी कर रही है।

पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार कई दिनों से नकली सिक्कों की सप्लाई होने की शिकायतें पुलिस को मिल रही थीं। मुखबिर से सूचना मिली कि शनिवार शाम सेक्टर-62 स्थित चौराहे के पास एक स्थान पर नकली सिक्के सप्लाई किए जा रहे हैं।
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पुलिस ने छापा मारकर सीवान (बिहार) के ओम प्रकाश को गिरफ्तार किया है। वह खोड़ा के दीपक विहार में रहता है। उसने बताया कि वह सिर्फ सिक्कों की थैली बनाकर सेक्टर-62 की सब्जी मंडी में देता था। उसने बताया कि ऐसे कई लोगों को सिक्कों की सप्लाई खोड़ा के कविता पैलेस निवासी श्रीराम लाल करता है।

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सिक्के लेते समय ध्यान रखें

Police got fake coin.

वह मूलरूप से सहरसा (बिहार) का रहने वाला है। वह मौके से फरार हो गया। आरोपी ने बताया कि उसे सिक्कों के बदले कमीशन मिलता था। पुलिस ने निशानदेही पर 11,137 नकली पांच रुपये के सिक्के बरामद किए हैं। पुलिस के मुताबिक शहर में लाखों के नकली सिक्के  चलाए जा चुके हैं।

तृतीय क्षेत्र के सीओ विश्वजीत श्रीवास्तव ने कहा कि एक थैली में करीब 95 सिक्के होते थे और पांच सौ रुपये में थैली दी जाती थी। यहां से भी करीब 25 रुपये कमीशन के मिल जाते थे। सिक्के सब्जी मंडी और छोटे बाजारों सप्लाई किए गए हैं। नोएडा में पहली बार नकली सिक्के पकड़े गए हैं। फिलहाल कुछ चीजों का ध्यान रखकर आप इस गिरोह से बच सकते हैं।

1. असली सिक्के के किनारों पर फूल-पत्ती बनी होती है, जबकि बाजार में आने वाले इन सिक्कों में यह नदारद है।
2. असली सिक्कों की तुलना में नकली सिक्कों की गुणवत्ता और छपाई की फिनिशिंग अच्छी नहीं है। ध्यान से देखने में फर्क पता चल जाता है।
3. रिजर्व बैंक द्वारा उतारे गए नए सिक्के गोल्ड कलर के हैं। वहीं, नकली सिक्के लोहे के और भारी भी हैं।

कहीं मुहर तो नहीं लग गई जालसाज के हाथ

Police got fake coin.

नकली सिक्कों की खेप मिलने के बाद पुलिस इस एंगल से भी जांच कर रही है कि कहीं सिक्के छापने वाली मुहर या मशीन तो किसी जालसाज के हाथ नहीं लग गई है। या जालसाज मिलती-जुलती मुहर बनाकर इस काम को अंजाम दे रहे हैं। नोएडा के सेक्टर-1 में ही रिजर्व बैंक की टकसाल है।

वहीं, पुलिस को दिल्ली में इस बहुत बड़े रैकेट के तार जुड़ते दिखाई दे रहे हैं। अभी तक नोटों की नकली नोटों को चलाने का मामला ही अर्थव्यवस्था के लिए नुकसान का कारण बनता था। अब धड़ल्ले से निकल रहे पांच के नकली सिक्के भी अर्थव्यवस्था को बड़ी चोट पहुंचा रहे हैं।

पुलिस के अनुसार ओमप्रकाश तो इस कड़ी का सबसे आखिरी मोहरा है। गिरोह के बड़े सरगना कोई और हैं। यदि मौके से सिक्कों का सप्लायर श्रीरामलाल हाथ लगता तो उसके आगे की कड़ी सामने आ सकती थी। नकली नोटों के बजाए सिक्कों को चलाने में काफी कम खतरा रहता है। हो सकता है नकली नोटों को चलाने वाले कम खतरे के चलते इसी काम में जुट गए हों।

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