पूर्व सैनिकों को पुलिस ने दी क्लीन चिट, मेडल जलाने का था आरोप
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वीरता मेडल व पुरस्कार जलाने की कोशिश के मामले में दिल्ली पुलिस ने पूर्व सैनिकों व अधिकारियों को क्लीन चिट दी है। पुलिस ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि वन रैंक वन पेंशन (ओआरओपी) की मांग कर रहे पूर्व सैनिकों व अधिकारी वीडियो फुटेज में मेडल जलाते नजर नहीं आ रहे हैं।
अदालत में शिकायत दायर कर अधिवक्ता गौरव गुलाटी ने पूर्व सैनिकों के खिलाफ देशद्रोह व अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज करने की मांग की थी। अधिवक्ता की दलील थी कि इन आरोपियों ने वीरता पुरस्कार व मेडल जलाने की कोशिश करके देश का अपमान किया है और देश द्रोह किया है।
पटियाला हाउस अदालत के महानगर दंडाधिकारी हरविंदर सिंह के समक्ष थाना संसद मार्ग पुलिस ने कार्रवाई रिपोर्ट (एटीआर) पेश की।
रिपोर्ट में आरोप खारिज
पुलिस ने इस रिपोर्ट में कहा कि ओआरओपी की मांग करने वाले पूर्व सैनिक व अधिकारी वीरता मेडल व पुरस्कार जलाते नजर नहीं आ रहे हैं। याचिका के मुताबिक वन रैंक वन पेंशन की मांग करने वाले पूर्व सैनिकों व अधिकारियों ने दीवाली के दिन ग्यारह नवंबर 2015 को जंतर मंतर पर वीरता पुरस्कार व मेडल जलाने की कोशिश की।
याचिका में कहा गया है कि मेडल जलाने की कोशिश करने का कृत्य प्रायोजित व राजनीति से प्रेरित था और इसे सोच विचार के बाद योजनाबद्घ तरीके से अंजाम दिया गया। इससे पहले इन अधिकारियों ने मीडिया में बयान भी दिया था।
वीरता पुरस्कार व मेडल जलाने की कोशिश से इन आरोपियों ने देश का अपमान किया है और नागरिकों व सैन्य कर्मियों की भावनाओं को आहत किया है। यह पुरस्कार देश के राष्ट्रपति द्वारा सेना के लिये वीरतापूर्ण कार्यों के लिये दिया जाता है। आरोपियों के इस कृत्य से देश की सेनाओं में विद्रोह हो सकता था।