मौत के बाद भड़की 'पिंकी' की लगाई आग
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हरियाणा की महर्षि दयानंद यूनिवर्सिटी की लापरवाही की भेंट चढ़ी गुड़गांव की पिंकी की जिंदगी से रविवार को शहर के युवा भी बौखला गए। सूचना मिलने पर विद्यार्थियों ने एकजुट होकर विश्वविद्यालय की कार्यप्रणाली के विरोध में उग्र विरोध की चेतावनी दी है।
सोमवार को विभिन्न कॉलेज के विद्यार्थियों के साथ पिंकी को श्रद्धांजलि देने के साथ ही छात्र दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग लेकर सड़क पर उतरेंगे। छात्रों ने रैली निकालने और पुतला दहन की भी चेतावनी दी है।
एमडीयू की लापरवाही से हर वर्ष विभिन्न संकायों में सैकड़ों विद्यार्थियों का कंपार्टमेंट आने से पूरे वर्ष ही छात्र परेशान रहते हैं। हंगामा और विरोध के बाद भी हालात नहीं सुधरे।
युवा शक्ति फरीदाबाद के संयोजक जसवंत सैनी ने बताया कि लगातार मांग पर एमडीयू ने नयासा कंपनी से कॉपी जांचने का ठेका रद्द करने की बात कही थी। मगर गुड़गांव में हंगामे के बाद फिर से नयासा का नाम सामने आया। एमडीयू की कार्यप्रणाली के कारण छात्रा की मौत जाया नहीं जाने देंगे।
छात्र शहर में रैली निकालने के साथ ही वीसी का पुतला दहन करेंगे। एक अन्य छात्रनेता अजय डागर ने कहा कि पिंकी की मौत पर भी प्रशासन ने कार्रवाई नहीं कि तो इन्हें युवा शक्ति का विरोध झेलना होगा। वीसी को हटाने के साथ ही एमडीयू की कार्यप्रणाली में सुधार के लिए कदम उठाया जाए। जिससे हर वर्ष परेशान होने वाले विद्यार्थियों को राहत मिल सके और पिंकी को न्याय।
पिंकी के समर्थन में चुनावों का बहिष्कार
पिंकी मामले में अबतक हुई प्रशासन की कार्रवाई से नाराज कासन गांव के ग्रामीणों ने रविवार को पिंकी की मौत के बाद चुनावों का बहिष्कार कर दिया। पिंकी के दाह संस्कार के बाद गांव में हुई बैठक में फैसला लेते हुए ग्रामीणों ने फैसला किया पिंकी के इंसाफ के लिए गांव से कोई भी वोट नहीं देगा।
चुनावों से ठीक चार दिन पहले ग्रामीणों के इस फैसले ने प्रशासन को भी सकते में डाल दिया है। पिंकी के आत्मदाह के प्रयास के मामले में कॉलेज के कई प्रोफेसरों के उकसाने की बात सामने आई थी। छात्रा के मामले में पुलिस की कार्रवाई को लेकर परिजन असंतुष्ट थे।
दो दिन पहले भोंडसी गांव में हुई महापंचायत में दस से ज्यादा गांवों के लोगों ने पिंकी इंसाफ मंच और कासन छात्रा आंदोलन के बैनर तले रविवार को जंतर मंतर पर प्रदर्शन करने का ऐलान किया था। लेकिन पिंकी की मौत के बाद इस आंदोलन को धक्का लग गया।
रविवार को कासन गांव में पिंकी के शव के दाह संस्कार के बाद परिजनों के साथ ग्रामीणों ने बैठक की। पूर्व सरपंच महेश चौहान समेत गांव के कई नामचीन लोगों की मौजूदगी में प्रशासन की कार्रवाई के खिलाफ विधानसभा चुनाव का बहिष्कार करने का ऐलान किया।
चुनावों से चार दिन पहले हुई घोषणा ने प्रशासन के लिए भी सकते में ला दिया है। पटौदी विधानसभा क्षेत्र में आने वाले कासन गांव में फैसले के बाद राजनैतिक गलियारे में भी गहमागहमी मच गई है। ग्रामीणों के ऐलान के बाद सीआईडी और आईबी भी इस मामले पर नजर रख रही है।
साथ ही, कई राजनैतिक दल भी ग्रामीणों से संपर्क साध रहे है। पूर्व सरंपच महेश चौहान ने बताया कि पिंकी के इंसाफ के लिए गांव से किसी भी राजनैतिक पार्टी को वोट नहीं दिया जाएगा। पिंकी के ताऊ सत्यपाल सिंह ने कहा कि पिंकी के इंसाफ के लिए आंदोलन भी कर सकते है।
खाली कराया गया गर्ल्स हॉस्टल
छात्रा पिंकी की मौत के बाद सभी कॉलेजों में छुट्टी कर दी गई है। उच्चतर शिक्षा विभाग ने सभी राजकीय कॉलेजों में 15 अक्तूबर तक छुट्टी की है। जबकि सेक्टर-14 गर्वमेंट गर्ल्स कॉलेज में 26 अक्तूबर तक छुट्टी की घोषित कर दी गई है।
सोमवार को हंगामें के आसार को देखते हुए रविवार सुबह अचानक छात्राओं की छुट्टी कर दी गई और उन्हें अपने घर जाने को कहा गया। पिंकी की मौत की खबर के बाद सेक्टर-14 गर्वमेंट गर्ल्स कॉलेज की ओर से इसकी सूचना उच्चतर शिक्षा विभाग को दी। जिसके बाद कॉलेज बंद करने का निर्णय लिया गया।
उच्चतर शिक्षा विभाग की ओर से गुड़गांव के सभी कॉलेजों को ई-मेल के जरिए छुट्टी करने का आदेश दिया गया। हालांकि आदेश में चुनाव के कारणों का हवाला दिया गया है। छात्राओं का कहना है कि शनिवार देर रात तक उन्हें छुट्टी की किसी तरह की सूचना नहीं दी गई।
रविवार सुबह छुट्टी लेकर अपने-अपने घर जाने को कहा गया और दीवाली तक मौखिक रूप से छुट्टी घोषित की गई है। छुट्टी घोषित होने के बाद हॉस्टल की आधी से अधिक छात्राएं दोपहर तक जा चुकी थी। बता दें कि हॉस्टल में करीब 650 छात्राएं रहती है। सवाल यह है कि पहले से चुनाव तय था, तो शनिवार या इससे पहले छुट्टी घोषित क्यों नहीं की?
पिंकी कांड के पीछे क्या थी असली वजह
महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय (एमडीयू) के कई कॉलेजों में इस बार के परीक्षा परिणाम में पूरी कक्षा की छात्राओं को फेल कर दिया गया था। गुड़गांव के साथ ही फरीदाबाद में भी छात्राएं इसे विश्वविद्यालय की गड़बड़ी बताकर आंदोलन कर रही थीं।
गुड़गांव के सेक्टर-14 स्थित राजकीय महिला महाविद्यालय में इस आंदोलन का नेतृत्व कर रही छात्रा पिंकी ने खुद को आग लगा ली थी। बाद में पुलिस को दिए बयान में उसने कॉलेज के प्रोफेसरों पर उकसाने का आरोप लगाया था।
आत्मदाह के प्रयास के 14 दिन बाद बीएससी की छात्रा पिंकी चौहान ने रविवार देर रात सफदरजंग अस्पताल में दम तोड़ दिया। पिंकी की मौत की खबर के बाद उसके पैतृक गांव कासन में मातम पसर गया।
रविवार को पिंकी के शव को गांव लाया गया, जहां प्रशासनिक अधिकारियों और ग्रामीणों की मौजूदगी में दाह संस्कार किया गया। 29 सितंबर को महिला कॉलेज में परीक्षा परिणाम को लेकर हुए बवाल के बाद पिंकी ने पेट्रोल छिड़ककर कॉलेज में आत्मदाह का प्रयास किया था।
वह 85 फीसदी से ज्यादा जल गई थी। गंभीर हालत में पिंकी को सफदरजंग अस्पताल में दाखिल कराया गया था। डॉक्टरों के मुताबिक शनिवार शाम से ही पिंकी की तबीयत बिगड़नी शुरू हो गई थी।
बुखार बढ़ने और उल्टी के साथ देर रात करीब 11 बजे पिंकी को वेंटिलेटर पर शिफ्ट किया गया। इस दौरान पिंकी कोमा में चली गई और देर रात 1.15 बजे डॉक्टरों ने पिंकी को मृत घोषित कर दिया।
किसी अनहोनी की आशंका के मद्देनजर पुलिस ने महिला कॉलेज के बाहर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम कर दिए थे। कॉलेज के चारों तरफ पीसीआर की तैनाती के अलावा एनएच-8 पर मानेसर चौक पर भारी संख्या में पुलिस बल को तैनात कर दिया।
पिंकी की मौत से जुड़े कुछ अनसुलझे सवाल
--आखिर पिंकी को इतना क्यों उकसाया गया था जिस वजह से उसने आत्मदाह करने जैसा कदम उठाया?
--पुलिस ने कॉलेज प्रबंधन के खिलाफ मामला दर्ज किया? लेकिन दोषी पूर्व प्राचार्या के खिलाफ कोई कार्रवाई क्यों नहीं की? जबकि पिंकी ने उसे भी दोषी बताया था।
--पिंकी के दो बार बयान के बावजूद पुलिस ने किसी की गिरफ्तारी क्यों नहीं की?
--घटना के वक्त पिंकी के पास मौजूद छात्राएं डरी सहमी है तो क्या उन पर दबाव बनाया जा रहा है?
--14 दिन में आखिर पुलिस ने किसी को गिरफ्तार क्यों नहीं किया?
कब क्या हुआ, एक नजर में
29 सितंबर : खराब परीक्षा परिणाम को लेकर शुरू हुए विवाद के बाद सेक्टर-14 राजकीय महिला महाविद्यालय की बीएससी की छात्रा पिंकी चौहान ने कॉलेज में ही पेट्रोल छिड़ककर आत्मदाह करने का प्रयास किया। जिसमें वह बुरी तरह जल गई। घटना के बाद गुस्साई छात्राओं ने छह घंटे तक रोड जाम रखते हुए कॉलेज के अंदर जबरदस्त तोड़फोड़ कर दी थी। जिसमें कॉलेज प्रबंधन पर छात्रा को उकसाने का आरोप लगाया गया था।
30 सितंबर : सफदरजंग अस्पताल में आईसीयू में दाखिल पिंकी से मिलने को लेकर कॉलेज की दो महिला प्रोफेसरों पर अस्पताल स्टाफ को रिश्वत देने और हंगामा करने का आरोप लगा था।
1 अक्तूबर : पुलिस की तरफ से एसआईटी का गठन कर जांच शुरू कर दी गई थी। पिंकी के बयान को लेकर दबाव बनाए जाने के आरोप के बाद मजिस्ट्रेट के सामने दोबारा बयान दर्ज किए गए।
2 अक्तूबर : पिंकी ने मजिस्ट्रेट को दिए बयान में बताया कि एंबुलेंस में उसे एक महिला प्रोफेसर ने धमकाने का आरोप लगाया।
3 अक्तूबर : पिंकी की तबियत में सुधार होने के बाद उसे सामान्य वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया था। वहीं, पुलिस कॉलेज प्रबंधन और छात्राओं के बयान दर्ज कर रही थी।
4 अक्तूबर : इस मामले को लेकर कॉलेज प्रिंसिपल ने छात्राओं के साथ मीटिंग की। पुलिस मामले की जांच मे जुटी हुई थी।
5 अक्तूबर : पुलिस जांच से खफा ग्रामीणों ने पिंकी के समर्थन में कासन गांव में पंचायत कर प्रशासन को 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया गया।
6 अक्तूबर : जिला प्रशासन की तरफ से एडीसी को जांच के आदेश दिए गए।
7 अक्तूबर : घटना के बाद पहली बार कॉलेज खुला। कॉलेज प्रबंधन ने छात्राओं से सहयोग की अपील की। पिंकी के मामले को लेकर पुलिस जांच कर रही थी।
8 अक्तूबर : घटना को लेकर एडीसी पुष्पेंद्र चौहान ने कॉलेज में छात्राओं से बातचीत की। जिसमें कॉलेज प्रबंधन की तरफ से छात्राओं पर दबाव बनाने की बात पर भी एडीसी ने नाराजगी जाहिर की थी।
9 अक्तूबर : पुलिस प्रशासन की कार्रवाई से असंतुष्ट ग्रामीणों ने भोंडसी गांव में महापंचायत करते हुए 12 अक्तूबर को जंतर मंतर पर प्रदर्शन करने का ऐलान किया था।
10 अक्तूबर : पिंकी न्याय मंच और कासन छात्रा आंदोलन का गठन किया गया। ग्रामीणों ने आंदोलन को पुरजोर उठाने की रणनीति बनाई गई।
11 अक्तूबर : तबीयत बिगड़ने के बाद पिंकी को वेंटिलेटर पर शिफ्ट किया। जिसके बाद वह कौमा में चली गई। देररात 1.15 बजे डॉक्टरों ने पिंकी को मृत घोषित कर दिया।