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शरीर के अंगों को खराब कर सकती है कबूतर की बीट, एक महिला की मौत, 300 से ज्यादा अस्पताल में

Fri, 06 Dec 2019 05:17 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Fri, 06 Dec 2019 05:17 AM IST
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Pigeon beat can damage body parts
Pigeon

कबूतर की बीट सूखने के बाद जानलेवा बैक्टीरिया छोड़ती है। इसकी वजह से इंसानी शरीर के कई अंग खराब हो सकते हैं। दिल्ली के अस्पतालों में कबूतर की बीट से होने वाली बीमारी एक्यूट हाइपर सेंसिटिविटी न्यूमोनाइटिस के 300 से ज्यादा मरीज भर्ती हो चुके हैं। 

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इनमें एम्स के अलावा कई सरकारी अस्पताल शामिल हैं। हालांकि पहली बार इस बीमारी से महिला की मौत सामने आई है। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के डॉक्टरों का कहना है कि ये बीमारी इतनी घातक होती है कि फेफड़ों के अलावा हार्ट अटैक तक मरीज को ला सकती है। लिवर और किडनी भी प्रभावित हो सकते हैं। अभी तक कई मेडिकल शोध में इसकी पुष्टि हो चुकी है।
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दिल्ली के शालीमार बाग स्थित स्कूल से सेवानिवृत्त प्राचार्य सुंदर स्वरूप सिंघल ने बताया कि उनकी पत्नी करीब एक वर्ष तक बीमारी से लड़ती रहीं। दिल्ली के अपोलो अस्पताल से लेकर मेट्रो इत्यादि अस्पतालों में उपचार कराया, लेकिन इसके बाद भी उनकी पत्नी को बचाया नहीं जा सका। 

वे वर्ष 2009 तक दिल्ली के तिमारपुर में रहते थे, जहां गलियों में कबूतर सैकड़ों की तादाद में हैं। उनकी दीवारों और गलियों में कबूतर की बीट ही बीट दिखाई देती है। फिलहाल वे अपने परिवार के साथ वसुंधरा में रहते हैं। मेडिकल जांच के दौरान डॉक्टरों ने उनसे घर या आसपास में कबूतर होने के बारे में पूछा भी था, जब उन्हें बीमारी के बारे में बताया कि तो वे भी आश्चर्य चकित रह गए।

मेट्रो अस्पताल के वरिष्ठ डॉ. दीपक तलवार ने बताया कि सुंदर स्वरूप सिंघल अपनी पत्नी के साथ उनके पास उपचार के लिए आए थे। मेडिकल जांच में कबूतर की बीट से होने वाली बीमारी की पुष्टि हुई। उनके पास ऐसे सैकड़ों मरीज रिकॉर्ड में हैं। कबूतर की बीट में संक्रमण होता है, जिससे फेफड़ों को खास नुकसान पहुंचता है। 

फेफड़ों में दिक्कत के बाद आ सकता है हार्ट अटैक
एम्स के एक वरिष्ठ डॉक्टर ने बताया कि कबूतर की बीट के सूखने से बैक्टीरिया तेजी से फैलता है, जोकि सांस के जरिये इंसानों के फेफड़ों को प्रभावित करता है। ज्यादा लंबे समय तक उपचार न मिलने से उक्त व्यक्ति को हार्ट अटैक भी आ सकता है। एक्यूट (गंभीर) मामलों में अक्सर मरीज को बचा पाना मुश्किल होता है। 

एक्यूट हाइपर सेंसिटिविटी न्यूमोनाइटिस रोग में कार्बनिक एंटीजन (जैसे विषाक्त पदार्थों या एंजाइमों) या कम आणविक भार रासायनिक यौगिकों के कारण होता है जो आबादी के एक हिस्से के फेफड़ों को प्रभावित करता है। ये रोग कई रूप में दिखाई देता है। एक्यूट यानी गंभीर स्थिति में इंसान के लिए जानलेवा हो सकता है। इसके लक्षण भी मरीजों में अलग-अलग दिखाई देते हैं। शरीर में कमजोरी, सूखी खांसी, हल्का बुखार, पेट दर्द और जोड़ों में दर्द इत्यादि इसके लक्षण हैं, जिनमें मेडिकल जांच जरूरी होती है। 


पुरानी दिल्ली में सबसे ज्यादा कबूतर
दिल्ली में अक्सर कबूतर गलियों और चौराहों पर दिखाई देते हैं। पुरानी दिल्ली में कबूतरों को पालने का शौक भी लोग रखते हैं, लेकिन कबूतर की बीट से फैलने वाला बैक्टीरिया इंसान की जान भी ले सकता है। पूर्वी दिल्ली और दरियागंज के अलावा कई इलाकों में कबूतरों की बीट गलियों में दिखाई देती है। 

अन्य सरकारी अस्पतालों में भी सामने आए मामले
एक्यूट हाइपर सेंसिटिविटी न्यूमोनाइटिस के मामले दिल्ली में कई अस्पतालों में देखने को मिलते हैं। एम्स के अलावा सफदरजंग, लोकनायक अस्पताल, आरएमएल और लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज में कई मरीज भर्ती हुए हैं। इनके अलावा दिल्ली के कुछ निजी अस्पतालों में भी मरीजों का उपचार चल रहा है। 

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