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दिल्ली में नहीं चलेंगे 15 साल पुराने वाहन

Thu, 27 Nov 2014 03:01 PM IST
Updated Thu, 27 Nov 2014 03:01 PM IST
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petrol pump owner and the government face to face

दिल्ली में प्रदूषण का सबसे बड़ा कारण वाहनों से निकलने वाला धुआं है। दिल्ली में वर्तमान में 82 लाख से ज्यादा वाहन सड़कों पर दौड़ रहे हैं। मगर 15 साल से पुराने 35 लाख से ज्यादा वाहन बिना फिटनेस के सड़क पर दौड़ रहे हैं जो प्रदूषण का सबसे बड़ा कारण बन रहे हैं। अब एनजीटी के आदेश में 15 साल पुराने वाहनों को चलाने से रोकने का सख्त निर्देश दिया गया है।

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बताते चलें कि दिल्ली में 15 साल से पुराने वाहनों का री-फिटनेस कराना अनिवार्य है। अगर 15 साल के बाद वाहन का फिटनेस नहीं कराया गया तो वह सड़कों पर नहीं उतर सकते है। फिर भी अगर सड़क पर उतरते है तो ऐसे वाहनों को जब्त किया जा सकता है। मगर परिवहन विभाग के ढुलमुल रवैये के कारण साल दर साल ऐसे वाहनों की संख्या बढ़ रही है।
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परिवहन विभाग के मुताबिक 2010 तक ही ऐसे 25 लाख वाहन सड़कों पर दौड़ रहे थे। अब यह संख्या 35 लाख से ऊपर पहुंच चुकी है। जबकि 15 साल पुराने कुल कितने वाहन है इसका आंकड़ा नहीं मिल पा रहा। दिल्ली में तेजी से बढ़ती वाहनों की संख्या बिना फिटनेस के दौड़ रहे वाहनों के कारण यहां का प्रदूषण स्तर बढ़ता जा रहा है।
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दिल्ली परिवहन विभाग के स्पेशल कमिश्नर के. एस. गांगर के मुताबिक फिलहाल दिल्ली में 15 साल पुराने वाहनों का फिटनेस नहीं करने वालों के खिलाफ कार्रवाई होती है। उन्होंने कहा कि एनजीटी के नए आदेश की जानकारी अभी तक उनके पास नहीं है। अगर कोई आदेश हुआ है तो उसके अध्ययन के बाद आगे का फैसला लिया जाएगा।

जांच प्रमाणपत्र देखकर पेट्रोल देने की योजना को झटका

petrol pump owner and the government face to face

दिल्ली सरकार की प्रदूषण नियंत्रण जांच प्रमाणपत्र देखने के बाद पेट्रोल देने की योजना को झटका लगा है। पेट्रोल पंप मालिकों ने इसका विरोध करते हुए धमकी दी है कि अगर सरकार फैसले में बदलाव नहीं करती तो पंप मालिक हड़ताल पर चले जाएंगे। उपराज्यपाल को भी यह जानकारी दे दी गई है।

ऑल इंडिया पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अजय बंसल ने बताया कि सरकार ने फैसला करने से पहले पंप संचालकों से बात नहीं की। हमें तुगलकी फैसला सुना दिया गया।

पंप पर पेट्रोल बिक सकता है, 84,00,000 लाख से ज्यादा वाहनों की जांच संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि कानून लागू करने की जिम्मेदारी हम पर नहीं है। सरकार और पुलिस अपना काम पेट्रोल मालिकों को सौंप रही है। इससे बड़ी अड़चन आएगी। एसोसिएशन ने इस बारे में एलजी को पत्र लिखा है, लेकिन अभी तक जवाब नहीं मिला है।

इसकी जगह 1 दिसंबर से प्रावधान लागू करने की जानकारी दी गई है। बंसल की मानें तो एसोसिएशन के सदस्य दो दिनों में बैठक कर आगे की रणनीति तय करेंगे। हालांकि एसोसिएशन किसी भी कीमत पर इस फैसले के साथ नहीं जाएगी। इसके लिए कानूनी मदद ली जाएगी। फिर भी, अगर सरकार नहीं मानती तो पंप मालिक हड़ताल पर चले जाएंगे।

पुलिस ने प्रदूषण जांच केंद्र बढ़ाने के लिए पत्र लिखा

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दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने दिल्ली में प्रदूषण जांच केंद्र बढ़ाने की मांग की है। ट्रैफिक पुलिस ने परिवहन विभाग को पत्र लिखा है कि पेट्रोल पंप के अलावा अन्य जगहों पर प्रदूषण जांच केंद्र खोले जाएं।

दूसरी तरफ ट्रैफिक पुलिस एक दिसंबर से पीयूसी नहीं रखने वाले वाहन चालकों के खिलाफ पेट्रोल पंपों के आस-पास विशेष अभियान चलाएगी।

दिल्ली पुलिस के विशेष पुलिस आयुक्त (ट्रैफिक) मुक्तेश चंदर ने बताया कि अभी सिर्फ पेट्रोल पंपों पर ही प्रदूषण जांच केंद्र हैं। दिल्ली सरकार के परिवहन मंत्रालय को पत्र लिखा है कि प्रदूषण जांच केंद्र बाजार, मार्केट और पार्किंग में खोले जाएं ताकि लोग अपने वाहनों की प्रदूषण जांच करा सकें। ट्रैफिक पुलिस पीयूसी नहीं रखने वाले वाहन चालकों के खिलाफ 1 दिसंबर से अभियान चलाएगी।

पेट्रोप पंपों के पास अभियान चलाकर जिस वाहन चालक के पास पीयूसी नहीं होगा उसे पंप से ही पकड़ लिया जाएगा और चालान किया जाएगा। ऐसे में पीयूसी नहीं रखने वाले वाहन चालकों पर दोहरी मार पड़ेगी। उन्हें एक तो पीयूसी नहीं होने पर पेट्रोल नहीं मिलेगा, दूसरा उनका चालान भी किया जाएगा। किन जगहों पर अभियान चलाया जाएगा ये अभी तय नहीं किया गया है।

पार्किंग चलाने से ठेकेदारों ने किया इंकार

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तीनों नगर निगम को पार्किंग दरें बढ़ाना काफी महंगा पड़ गया है। दरअसल, ठेकेदार बढ़ी दरों पर पार्किंग चलाने से पीछे हटने शुरू हो गए है। उन्होंने कई पार्किंग छोड़ दीं और पार्किंग की नई टेंडर प्रक्रिया में हिस्सा भी नहीं लिया। उन्होंने करीब-करीब वही रणनीति अपनाई जो गत वर्ष एनडीएमसी के समक्ष अपनाई थी। दो नगर निगम ने भी ने एनडीएमसी की भांति ठेकेदारों को झटका देने के लिए पार्किंग चलाने के मामले में डिम्टस की शरण लेने का फैसला किया है। डिम्टस ने उनकी पार्किंग लेने की तैयारी शुरू कर दी है।

उत्तरी दिल्ली नगर निगम की स्थायी समिति की बैठक में पार्किंग व्यवस्था पर विस्तार से चर्चा हुई। विपक्ष के नेता मुकेश गोयल ने दरें बढ़ाने के बाद भी मुफ्त चल रही पार्किंग का टेंडर नहीं होने का मुद्दा उठाया। इस बीच समिति अध्यक्ष मोहन भारद्वाज ने पूरे मामले पर आयुक्त पीके गुप्ता से रिपोर्ट मांगी।

आयुक्त ने बताया कि दरें बढ़ाए जाने के बाद करीब डेढ़ दर्जन ठेकेदारों ने पार्किंग चलाने से मना कर दिया। वहीं, दक्षिण दिल्ली नगर निगम के हाल ही में नई दरों के तहत पार्किंग का ठेका देने के लिए जारी किए टेंडरों में ठेकेदारों ने हिस्सा नहीं लिया। इसके बावजूद वह अगले माह के प्रथम सप्ताह पार्किंग टेंडर कर रहे हैं।

दूसरी ओर उत्तरी दिल्ली नगर निगम ने भी दक्षिण दिल्ली नगर निगम की भांति डिम्टस से पार्किंग चलाने का आग्रह किया है। वह एनडीएमसी इलाके की पार्किंग भी चला रही है। डिम्टस दोनों नगर निगम की बड़ी पार्किंग पर रिपोर्ट तैयार कर रही है। अगर वह पार्किंग चलाने के लिए तैयार होती है तो उसे शुरूआत में बड़ी पार्किंग ठेके पर दी जाएगी। इसके बाद अन्य पार्किंग देने की प्रक्रिया आरंभ की जाएगी।

डिम्टस पार्किंग फीस कंप्यूटराइज मशीन से फीस वसूलती है। इसके चलते वाहन चालकों के साथ कोई भी हेराफेरी होने की संभावना नहीं रहती। सभी पार्किंग का आधुनिकीकरण करने के साथ उनको कंप्यूटरीकृत किया जाता है। इसके चलते वाहन चालक पार्किंग में आने सेे पहले ऑन लाइन जगह बुक करा सकते है। इसके अलावा पार्किंग के बाहर डिस्पले बोर्ड लगाए जाते है, जिसमें बताया जाता है कि पार्किंग में कितने वाहन खड़ेे करने की जगह खाली है। इसी तरह मॉल व टोल प्लाजा की तर्ज पर इलेक्ट्रानिक बैरियर लगाए जाते हैं।

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