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Arvind Kejriwal Latest News: दिल्ली हाईकोर्ट से केजरीवाल को राहत, जनहित याचिका खारिज; बने रहेंगे मुख्यमंत्री

Thu, 28 Mar 2024 01:38 PM IST
अनुज कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अनुज कुमार Updated Thu, 28 Mar 2024 01:38 PM IST
सार

मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी के बाद उन्हें मुख्यमंत्री पद से हटाने की मांग वाली याचिका को हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है।

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petition to remove Arvind Kejriwal from post of CM was rejected in Delhi High Court
अरविंद केजरीवाल - फोटो : एएनआई

विस्तार

मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी के बाद उन्हें मुख्यमंत्री पद से हटाने की मांग वाली याचिका खारिज हो गई है। दिल्ली हाईकोर्ट में याचिकाकर्ता सुरजीत सिंह यादव ने याचिका दायर की थी। जिसमें उन्होंने अरविंद केजरीवाल को सीएम पद से हटाने की मांग की थी।

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याचिकाकर्ता ने अनुरोध किया था कि केंद्र सरकार, दिल्ली सरकार एवं उपराज्यपाल के प्रधान सचिव से यह बताने को कहा जाए कि किस अधिकार के तहत केजरीवाल मुख्यमंत्री पद पर बने हुए हैं। एक वित्तीय घोटाले के आरोपी मुख्यमंत्री को सार्वजनिक पद पर बने रहने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।

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इस वजह से कोर्ट में डाली याचिका
अरविंद केजरीवाल को सीएम पद से हटाने के लिए याचिकाकर्ता सुरजीत सिंह यादव ने बताया कि हाईकोर्ट में जो जनहित याचिका दायर की। उसमें मैंने कई पहलूओं को बताया। उन्होंने कहा कि पहला पहलू गोपनीयता का है। दूसरा जब वह कैबिनेट मीटिंग नहीं ले पाएंगे, मसलन पिछली बार यमुना में बाढ़ के कारण कैबिनेट मीटिंग हुई थी और फैसले लिए गए थे, वो नहीं हो सकते। आगे तीसरा कारण बताते हुए कहा कि दिल्ली में सीएम हर विभाग के काम के बारे में दिल्ली एलजी को रिपोर्ट सौंपते हैं ऐसा भी नहीं हो सकता।

आगे कहा कि सीएम की जिम्मेदारी संभालना और एक सीएम के रूप में जेल से काम करना संभव नहीं है। इसलिए कोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई। याचिका में सीएम पद हटाने की मांग की है। एक सीएम के रूप में उन्हें जो मासिक वेतन मिलता है एक विधायक से भी ज्यादा होता है। इसलिए अगर वह सीएम के रूप में काम करने में सक्षम नहीं है तो उस पैसे को भी न दिया जाए।

कौन हैं सुरजीत सिंह, जिन्होंने डाली थी याचिका
याचिकाकर्ता सुरजीत सिंह यादव दिल्ली के रहने वाले हैं। वह अपने आप को किसान और सामाजिक कार्यकर्ता होने का दावा करते हैं। यादव ने तर्क रखा कि केजरीवाल के पद पर बने रहने से न केवल कानून की उचित प्रक्रिया में बाधा आएगी और न्याय की प्रक्रिया बाधित होगी, बल्कि राज्य में संवैधानिक तंत्र भी टूट जाएगा। 

केजरीवाल ने गिरफ्तार होने के कारण एक तरह से मुख्यमंत्री के रूप में अपना पद खो दिया है और चूंकि वह हिरासत में हैं, इसलिए उन्होंने एक लोक सेवक होने के कर्तव्यों और जिम्मेदारियों को निभाने से खुद को अक्षम कर लिया है और इस तरह उन्हें ऐसा नहीं करना चाहिए कि मुख्यमंत्री बने रहें। 

'गोपनीयता की शपथ का उल्लंघन होगा'
यादव ने कहा कि जेल में बंद सीएम किसी भी व्यवसाय को करने में असमर्थ होगा जिसका कानून उसे आदेश देता है और अगर उसे ऐसा करने की अनुमति दी जाती है तो किसी भी सामग्री को चाहे वह गुप्त प्रकृति की हो जेल में उन तक पहुंचने से पहले जेल अधिकारियों द्वारा पूरी तरह से उसे स्कैन करेगी। केजरीवाल के हाथ और ऐसा कृत्य सीधे तौर पर संविधान की तीसरी अनुसूची के तहत सीएम को दिलाई गई गोपनीयता की शपथ का उल्लंघन होगा।

इसके अलावा, याचिका में कहा गया कि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार के कामकाज के लेन-देन नियम, 1993 एक मुख्यमंत्री को कैबिनेट के किसी भी विभाग से टोर फाइलें मंगाने का अधिकार देता है और अगर केजरीवाल मुख्यमंत्री बने रहते हैं, तो वह अपने अधिकारों के दायरे में रहेंगे। उन फाइलों की जांच की मांग जिनमें उन्हें आरोपी बताया गया है। ऐसी स्थिति आपराधिक न्यायशास्त्र के लोकाचार के खिलाफ है।

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