लोकसभा में विपक्ष के नेता का मामला पहुंचा हाईकोर्ट
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लोकसभा में विपक्ष के नेता की नियुक्ति का मामला एक बार फिर दिल्ली हाईकोर्ट पहुंच गया। अधिवक्ता इमरान अली ने जनहित याचिका दायर कर भारतीय नागरिकों के हित में विपक्ष के नेता की नियुक्ति का आदेश देने का आग्रह किया।
याचिका पर अगले सप्ताह सुनवाई हो सकती है। मुख्य न्यायाधीश जी रोहिणी और न्यायमूर्ति आरएस एंडलॉ की खंडपीठ के समक्ष बृहस्पतिवार को यह याचिका दायर की गई है।
उन्होंने याचिका में लोकसभा में विपक्ष का नेता न होने का मुद्दा उठाया है। उन्होंने कहा कि भारत के नागरिकों के हित में विपक्ष का नेता का होना अत्यंत जरूरी है।
भारतीय संविधान में सदन में विपक्ष के नेता का प्रावधान है, लेकिन वर्तमान में संख्या बल के आधार पर विपक्ष के नेता की नियुक्ति को रोका जा रहा है।
'संसद में गलतबयानी के जरिए तर्क रखा जा रहा है'
याचिका में कहा गया है कि संसद में गलतबयानी के जरिए तर्क रखा जा रहा है कि विपक्ष की सबसे बड़ी पार्टी के पास कुल सांसदों की संख्या का 10 फीसदी सांसद होने पर ही विपक्षी नेता का पद प्रदान किया जाता है।
याचिका में कहा गया है कि यह तर्क गलत है क्योंकि विपक्ष का नेता पूरे विपक्ष का प्रतिनिधित्व करता है और अब विपक्ष का नेता न होने से पूरे विपक्ष को नजरअंदाज किया जा रहा है। यह सरासर भारतीय संविधान की अनदेखी है।
उन्होंने विपक्ष के नेता के बिना संसद का कुशलता से चलना असंभव है और कई अहम मामलों में प्रधानमंत्री विपक्ष के नेता से बातचीत की नीतियां तय करते हैं।
यह प्रावधान गैरकानूनी है, ऐसे में संसदीय मामलों के मंत्रालयों को विपक्ष के नेता की नियुक्ति का निर्देश दिया जाए। इससे पहले हाल ही में अधिवक्ता एमएल शर्मा इसी मुद्दे को लेकर याचिका दायर की थी, लेकिन 13 अगस्त को याचिका वापस ले ली थी।