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Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   People reluctant to regularize their houses despite having ownership rights.

Delhi NCR News: मालिकाना हक के बाद भी मकानों को नियमित कराने से कतरा रहे लोग

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 25 Sep 2026 06:42 PM IST
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पीएम-उदय के 40 हजार लाभार्थियों में से एमसीडी को मिले सिर्फ सात आवेदन, चार प्रमुख शुल्कों में 75 फीसदी छूट का प्रस्ताव
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विनोद डबास
नई दिल्ली। दिल्ली की 1,511 अनधिकृत कॉलोनियों में संपत्ति का मालिकाना हक मिलने के बावजूद लोग अपने मकानों के निर्मित क्षेत्र को नियमित कराने से कतरा रहे हैं। पीएम-उदय योजना के तहत करीब 40 हजार संपत्ति मालिकों को स्वामित्व संबंधी दस्तावेज मिल चुके हैं, लेकिन दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) के पोर्टल पर अब तक केवल सात आवेदन आए हैं। आवेदन की धीमी रफ्तार को देखते हुए एमसीडी ने चार प्रमुख शुल्कों में 75 फीसदी की अतिरिक्त छूट देने का प्रस्ताव तैयार किया है।
पीएम-उदय योजना के तहत दिल्ली की 1,511 अनधिकृत कॉलोनियां अधिसूचित हैं। इनमें करीब 44.75 लाख लोग रहते हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, अब तक दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) और दिल्ली सरकार की ओर से करीब 40 हजार संपत्ति मालिकों को स्वामित्व विलेख या प्राधिकरण पर्ची जारी की जा चुकी है। इन संपत्तियों के मालिक छह अप्रैल 2026 की स्थिति के अनुसार अपने मौजूदा निर्मित क्षेत्र को नियमित करा सकते हैं।
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हालांकि, नियमितीकरण के लिए आवेदन की रफ्तार बेहद धीमी है। एमसीडी के पोर्टल पर अब तक केवल सात आवेदन मिले हैं, जबकि सरल प्रक्रिया के तहत करीब 100 आवेदन स्वीकृति के लिए सूचीबद्ध वास्तुकारों के पास लंबित बताए गए हैं। ऐसे में करीब 40 हजार संभावित लाभार्थियों की तुलना में आवेदन की संख्या बेहद कम है।
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शुल्क अधिक होने से लोग पीछे हट रहे
एमसीडी का मानना है कि नियमितीकरण के लिए लगने वाला शुल्क अधिक होने के कारण लोग आवेदन नहीं कर रहे हैं। 18 सितंबर को मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हुई समीक्षा बैठक में भी शुल्क को अधिक माना गया था। इसके बाद क्षतिपूर्ति नियामक शुल्क, निर्माण एवं तोड़फोड़ संबंधी शुल्क, विकास शुल्क और प्रशासनिक एवं सूचना प्रौद्योगिकी शुल्क में 75 फीसदी की कटौती का निर्देश दिया गया। एमसीडी के प्रस्ताव के मुताबिक, 31 अक्तूबर तक आवेदन करने वालों को इस छूट का लाभ मिलेगा। यदि दिल्ली सरकार आवेदन की अंतिम तारीख बढ़ाती है तो बढ़ाई गई अवधि में भी छूट जारी रखने का प्रावधान रखा गया है।
पहले भी हटाए जा चुके हैं कई शुल्क
नियमितीकरण प्रक्रिया में कई बड़े शुल्क पहले ही हटाए जा चुके हैं। डीडीए ने 20 अगस्त को स्पष्ट किया था कि छह अप्रैल 2026 तक मौजूद निर्माण को नियमित कराने पर भवन उपनियम 2016 के तहत अनुमति शुल्क, बेहतरी शुल्क, अतिरिक्त शुल्क, आधार शुल्क और बिना मंजूरी निर्माण से जुड़े कई शुल्क नहीं लगाए जाएंगे। इसके बावजूद आवेदन नहीं बढ़े। इसके बाद एमसीडी ने 20 अगस्त से चार प्रमुख शुल्कों के आधार पर संशोधित दरें लागू कीं। अब इन पर भी 75 फीसदी छूट का प्रस्ताव है।


कई मामलों में 89 से 96 फीसदी तक हो सकती है कमी
एमसीडी के आकलन के अनुसार, छूट के बाद नियमितीकरण शुल्क में बड़ी कमी आएगी। उदाहरण के तौर पर, 26,256 रुपये शुल्क वाली संपत्ति के लिए करीब 6,564 रुपये, 50,693 रुपये वाली संपत्ति के लिए 12,674 रुपये और 75,036 रुपये वाली संपत्ति के लिए करीब 18,759 रुपये ही देने होंगे। तुलनात्मक आंकड़ों के अनुसार, मूल शुल्क के मुकाबले कुल कमी कई मामलों में 89 से 96 फीसदी तक हो सकती है। हालांकि, अतिरिक्त मंजिल क्षेत्र अनुपात (एफएआर) शुल्क पर 75 फीसदी की छूट लागू नहीं होगी।
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