नए डंपिंग ग्राउंड को लेकर नहीं बंद हो रहा विरोध, लोगों का प्रदर्शन जारी
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सेक्टर-123 में प्रस्तावित डंपिंग ग्राउंड को पूर्णरूप से हटाने के समर्थन में बृहस्पतिवार को किन्नर भी पहुंचे। उन्होंने कहा कि आबादी के बीच किसी भी कीमत पर निकट भविष्य में डंपिंग ग्राउंड नहीं बनने दिया जाएगा। संघर्ष समिति के नेता सुखवीर खलीफा ने बताया कि सीएम के निर्देश पर कूड़ा डालना बंद हो चुका है। आंदोलनकारी चाहते हैं कि प्राधिकरण आश्वस्त करे कि निकट भविष्य में यहां पर कूड़ा नहीं डाला जाएगा। ग्राउंड पर स्कूल या पार्क बना दिया जाए। इस मौके पर ओमवीर यादव, रवि पहलवान समेत काफी संख्या में लोग शामिल हुए।
हवन करके आंदोलन खत्म करने पर चल रहा विचार
नोएडा। संघर्ष समिति केनेता सूबे यादव ने बताया कि करीब एक माह से डंपिंग ग्राउंड के विरोध में धरना प्रदर्शन चल रहा है। दो बार आंदोलनकारियों को गिरफ्तार भी किया जा चुका है। इसी दबाव के कारण सीएम ने आबादी के 2 किलोमीटर दूर डंपिंग ग्राउंड बनाने के निर्देश दिए थे। उसी के तहत प्राधिकरण ने कूड़ा डालना बंद कर दिया था। आंदोलनकारी जिसकी मांग कर रहे थे, पहली मांग तो पूरी हो गई।
चूंकि सेक्टर-123 में मास्टर प्लान में डंपिंग ग्राउंड है, इसे बदलने के लिए प्राधिकरण को बोर्ड बैठक में निर्णय लेना है। लिहाजा बैठक में यह तय किया गया है कि शुक्रवार को बैठक होगी। जिसमें धरना प्रदर्शन समाप्त करने पर विचार होगा। सभी लोग सीएम को धन्यवाद देंगे और हवन करने के बाद धरना समाप्त किया जा सकता है।
लगता है कि प्राधिकरण व प्रशासन फिर चूका
प्राधिकरण गलती पर गलती करता जा रहा है। पहले सेक्टर-137 में कूड़ा डाला तो एनजीटी ने रोक लगा दी। इसी तरह जब सेक्टर-54 में कूड़ा डाला तो वहां भी एनजीटी ने रोक दिया। फिर प्राधिकरण अड़ गया कि मास्टर प्लान में सेक्टर-123 में डंपिंग ग्राउंड की जगह है और एनजीटी ने कहा दिया कि वहां पर कूड़ा डालो। वहां भी प्राधिकरण को जोरजबरदस्ती महंगी पड़ी। लोगों पर लाठियां चलाई और जेल भी भेजा, लेकिन लोग नहीं माने।
अतत: प्रदेश के मुखिया सीएम ने ही कह दिया कि आबादी के 2 किलोमीटर के दायरे में डंपिंग ग्राउंड नहीं होना चाहिए। सीएम की फटकार के बाद प्राधिकरण और प्रशासन ने खोदना खुर्द में जगह तलाशी। प्राधिकरण जब वहां कूड़ा लेकर पहुंचा तो लोगों ने रोक दिया। विरोध के कारण प्राधिकरण और पुलिस को कदम पीछे खींचने पड़े।
गोपनीय तैयारी भी फेल होती दिख रही
प्राधिकरण और पुलिस ने बड़ी मेहनत करके सेक्टर-145 की मुबारिकपुर जगह ढूंढ निकाली। प्रशासन की कोशिश रही कि किसी को पता न चले। बृहस्पतिवार को जैसे ही लोगों को जानकारी मिली तो विरोध शुरू हो गया। जानकर योगेंद्र शर्मा का कहना है कि प्राधिकरण और प्रशासन ने वहीं गलती की जो पहले करते आए थे। वहां पर कू़ड़ा डालने से पहले लोगों से बात करनी चाहिए।
अगर लोगों को विश्वास में लेकर काम किया जाता तो हो सकता है कि लोग मान जाते और प्राधिकरण को राहत मिल जाती। भले ही यहां तैनात रहे पूर्व प्राधिकरण के अधिकारियों की लापरवाही के कारण ही यह स्थिति पैदा हुई है। उस समय की गलती का खामियाजा अब अधिकारी उठा रहे हैं। डंपिंग ग्राउंड के चक्कर में ही अधिकारी उधेड़बुन में फंसे हुए हैं, नई योजनाओं के लिए वक्त ही नहीं है।