रियलिटी चेकः दफ्तरों से छुट्टी लेकर पीयूसी सर्टिफिकेट बनवा रहे हैं लोग
- बृहस्पतिवार को अमर उजाला ने इन पीयूसी सेंटर पर जाकर हकीकत जानी।
- पड़ताल में पता चला कि नए सॉफ्टवेयर का कोई भी असर जांच केंद्रों पर नही पड़ा है।
- कभी सर्वर डाउन होने की समस्या आ रही है तो कभी ओटीपी आने में देरी हो रही है।
विस्तार
कालीबाड़ी मार्ग निवासी किरण विजय कुमार गुरुग्राम के एक कॉलेज में सहायक प्रोफेसर हैं। नौ सितंबर को उनकी कार के पीयूसी (पॉल्यूशन अंडर कंट्रोल) सर्टिफिकेट की अवधि खत्म हो गई।
बीते मंगलवार और बुधवार को तीन से चार घंटे लाइन में खड़े होने के बाद भी जब वे जांच प्रमाण पत्र नही बनवा पाए तो बृहस्पतिवार को उन्होंने कॉलेज से छुट्टी ले ली। सुबह छह बजे से लाइन में लगे तब जाकर दोपहर 1 बजे नंबर आया।
पीयूसी के लिए ऐसा दर्द सिर्फ किरण विजय कुमार का ही नहीं बल्कि उनके जैसे हजारों लोगों का है। प्रदूषण जांच प्रमाण पत्र बनवाने के लिए लोग सुबह कामधंधा छोड़कर लाइन में लग रहे हैं। बृहस्पतिवार को अमर उजाला ने इन पीयूसी सेंटर पर जाकर हकीकत जानी।
पड़ताल में पता चला कि नए सॉफ्टवेयर का कोई भी असर जांच केंद्रों पर नही पड़ा है। कभी सर्वर डाउन होने की समस्या आ रही है तो कभी ओटीपी आने में देरी हो रही है। ऐसे में प्रदूषण सर्टिफिकेट लेने आए वाहन चालकों का पूरा दिन जांच केंद्रों ही गुजर रहा है।
प्रमाण पत्र के लिए कटानी पड़ेगी एक दिन की सैलरी...
पहाड़गंज निवासी अजीत सिंह ने बताया कि वह पेशे से फोटोग्राफर हैं। पिछले चार दिन से वह बाइक का प्रदूषण सर्टिफिकेट बनवाने का प्रयास कर रहा है। कई जांच केंद्रों के चक्कर लगाने के बाद भी बात नहीं बनी। अजीत ने बताया कि प्रदूषण कराने के लिए बृहस्पतिवार को उसे बिना सैलरी के दफ्तर से छुट्टी लेनी पड़ी। सुबह 9.00 बजे से भाई वीर सिंह मार्ग स्थित पेट्रोल पंप पर पीयूसी के लिए खड़े हैं।
बार-बार डाउन हो रहा है सर्वर.
भाई वीर सिंह मार्ग पर पीयूसी सेंटर चलाने वाले राजकुमार ने बताया कि वह सुबह सात बजे से रात करीब 11 बजे तक वाहनों का पॉल्यूशन सर्टिफिकेट बना रहे हैं। लोड होने की वजह से बार-बार सर्वर डाउन हो रहा है। राजकुमार के मुताबिक दिल्ली सरकार की ओर से उनके सिस्टम पर कोई सॉफ्टवेयर अपडेट नही किया गया, बल्कि सिस्टम पहले से भी स्लो हो गया है। ओटीपी देर से आने और सर्वर लगातार डाउन होने की समस्या बनी हुई है।
पीयूसी सेंटर, जनपथ, नई दिल्ली
बाइक का भी बने एक साल का सर्टिफिकेट
रक्षा मंत्रालय में नौकरी करने वाले मनीष कुमार जैन ने बताया कि वह पिछले कई दिनों से पीयूसी के लिए दिल्ली के अलग-अलग सेंटर के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन भीड़ देखकर हिम्मत टूट जाती है। मनीष कुमार ने कहा कि इतनी मारामारी के बाद बृहस्पतिवार को उन्होंने प्रदूषण सर्टिफिकेट तो ले लिया, लेकिन इसकी अवधि तीन माह है। मनीष ने कहा कि यदि इसका समय एक साल तक का कर दिया जाए तो लोगों को राहत मिलेगी।
3-4 घंटे लाइन में लगने के बाद नही बना प्रमाण पत्र
जनकपुरी में रहने वाले मनीष यादव ने बताया कि वह एक कारोबारी की कार चलाता है। मालिक के कहने पर वह पिछले चार दिनों से जनपथ पर पीयूसी सर्टिफिकेट बनवाने आ रहा था, लेकिन किसी ने किसी कारण प्रमाण पत्र नही बन पा रहा था। बृहस्पतिवार को नंबर आते ही प्रिंटर खराब हो गया। मनीष को पीयूसी सेंटर चलाने वाले धर्मेंद्र ने शाम का समय दे दिया।