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लगातार घर में रहने से लोग हो रहे हैं ओसीडी का शिकार, इस विकार का जरूरी है उपचार
Wed, 30 Dec 2020 04:37 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अभिषेक पांचाल, नई दिल्ली
अभिषेक पांचाल, नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Wed, 30 Dec 2020 04:37 AM IST
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- फोटो : mental illness
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कोरोना काल में करीब 10 महीने से लोग घर पर रहकर ही काम कर रहे हैं। इससे लोगों को कई प्रकार की बीमारियां हो रही हैं। राजधानी के मनोचिकित्सक डॉक्टरों के पास ऐसे कई मरीज आ रहे हैं, जो मनोग्रसित बाध्यता विकार (ओसीडी) की बीमारी से पीड़ित है। डॉक्टरों का कहना है कि यह एक प्रकार की मानसिक बीमारी है, जिसका समय पर इलाज जरूरी है।
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एम्स के मनोरोग विशेषज्ञ डॉक्टर राजकुमार श्रीनिवास बताते हैं कि मनोग्रसित बाध्यता विकार (ओसीडी) में व्यक्ति को अनुचित विचार आने लगते हैं और डर की आशंकाएं होने लगती हैं। इसके साथ ही वह एक ही काम को बार बार करने या जांचने पर विवश होते हैं। इस बीमारी को डॉक्टरी भाषा में ऑब्सेसिव कंपल्सिव डिसऑर्डर कहा जाता है। हालांकि, यह कोई नई बीमारी है नहीं है, लेकिन इसका समय रहते इलाज जरूरी है। ऑब्सेशन एक प्रकार से जुनून होता है। इसमें व्यक्ति एक ही काम को कई बार करता है। कई लोग सालों से ऐसा कर रहे होते हैं, लेकिन उन्हें पता ही नहीं होता कि वह इस प्रकार की मानसिक बीमारी से पीड़ित है।
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डॉक्टर राजकुमार बताते हैं कि इस समय जो मरीज उनके पास आ रहे हैं। उनमीं से अधिकतर को एक काम को बार-बार करने की आदत हो गई है। मसलन कई लोग सैनिटाइजर से दिन में 30 से 40 बार हाथ साफ करते हैं। कई मरीज बाहर जाते समय कई बार घर के ताले को हाथ लगा कर जांचते हैं कि वह लगा है या नहीं। यह एक तरीके की मानसिक समस्या है।उन्होंने कहा कि दिमागी बीमारियों के प्रति लोगों में जागरूकता की काफी कमी है।
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यदि कोई व्यक्ति एक दो या तीन बार चीजों को दोबारा चेक करता है तो ये सामान्य बात है, लेकिन अगर वह दिन भर में 10 बार यह है कर रहा है तो यह गंभीर मानसिक समस्या है। इसके लिए तुरंत मनोचिकित्सक को दिखाने की आवश्यकता है। स्वामी दयानंद अस्पताल के डॉक्टर विवेक वशिष्ठ बताते है कि कई बार हर समय खाली रहने और नकारात्मक विचारों के कारण भी यह बीमारी हो जाती है। यही कारण है कि ऐसे मरीजों की संख्या बढ़ रही रही है।
बीमारी के लक्षण
1.बार-बार हाथ धोना, नहाना या दांतों को साफ़ करना और शरीर की दुर्गन्ध को छिपाने के लिए वस्तुओं का अधिक उपयोग करना।
2.कपड़ों पर बार-बार जिप और बटन की जांच करना।
3.लाइटों, उपकरणों या दरवाजों की बार-बार जांच करना, यह सुनिश्चित करने के लिए कि वे बंद हैं या नहीं।
4.बार-बारत एक ही सवाल पूछना या एक ही बात कहना।
5.लगातार कुछ ध्वनियों, शब्दों या संख्याओं को सोचना या गिनती के साथ मानसनिक व्यस्तता।
6. ताला लगाकर 8 से 10 बार उसे खींचकर देखना
7. हर समय मन में कुछ गलत करने का ख्याल आना
जीवन शैली को प्रभावित करती है यह बीमारी
डॉक्टरों के मुताबिक, यह बीमारी व्यक्ति की जीवन शैली को खराब कर देती है। कई लोगों को ऑफिस या घर का काम करते समय चीजों को बार-बार चेक करते हैं। उनके मन में यही विचार हर समय आया रहता आता है। इससे उनका काम भी प्रभावित होता है। इस बीमारी से व्यक्ति का निजी और सामाजिक जीवन दोनों बुरी तरह प्रभावित होते हैं। यदि इस समस्या के साथ मरीज को तनाव भी है तो यह गंभीर समस्या हो सकती हैं। ऐसे में आत्महत्या की ख्याल भी आते हैं।इसलिए जरूरी है कि इस समस्या की जानकारी अपने परिवार से साझा करें और तुरंत डॉक्टर की सलाह लें।
ऐसे करें बचाव
डॉक्टरों के मुताबिक, इस समस्या से बचने के लिए सबसे जरूरी है कि व्यक्ति अपने आप को व्यस्त रखें। हमेशा सकारात्मक सोचें और कार्य में अपना दिमाग लगाएं। के अलावा पर्याप्त नींद सही भोजन और व्यायाम और ध्यान से ही इस समस्या से बचाव किया जा सकता है।