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दिल्ली में खुले में कूड़ा जलाया तो लगेगा 5000 जुर्माना

Wed, 29 Apr 2015 10:02 AM IST
Updated Wed, 29 Apr 2015 10:02 AM IST
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Penalty of rs 5000 on burning garbage in open

दिल्ली-एनसीआर की आबोहवा सुधारने के लिए एनजीटी कई कदम उठा चुका है। ट्रिब्यूनल ने तीन हफ्ते पहले ही क्षेत्र में 10 साल पुराने डीजल वाहनों के परिचालन पर रोक लगाने का आदेश दिया था।

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अब इसी कड़ी में खुले में कूड़ा जलाने पर सख्ती दिखाई गई है। एनजीटी ने ताजा फैसले के साथ दिसंबर 2014 में दिए गए आदेश का भी पालन कराने को कहा है। तब भी ट्रिब्यूनल ने पीएम2.5 के स्तर को कम करने के लिए खुले में कूड़ा जलाने पर रोक लगाने के निर्देश दिए थे।
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नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण पर रोक के लिए एक और कड़ा कदम उठाया है। ट्रिब्यूनल ने खुले में कूड़ा जलाने पर रोक लगा दी है। यहां तक कि पत्तियों और फसल के बचे हुए हिस्सों को भी खुले में नहीं जलाया जा सकेगा।

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5 हजार तक भरना पड़ सकता है जुर्माना

Penalty of rs 5000 on burning garbage in open

नियम का उल्लंघन करने वालों पर पांच हजार रुपये जुर्माना लगेगा। एनजीटी ने सभी नगर निगमों को दो दिन के भीतर नोटिफिकेशन जारी करने के निर्देश दिए हैं। इस बारे में 9717593474 पर शिकायत दर्ज कराई जा सकती है।

एनजीटी के अध्यक्ष जस्टिस स्वतंत्र कुमार की अध्यक्षता वाली बेंच ने मंगलवार को यह फैसला सुनाते हुए दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश की सरकारों को खुले में कूड़ा जलाने से होने वाले नुकसानों के बारे में जागरूकता फैलाने के निर्देश दिए।

कोर्ट ने कहा कि हमारे पास इस बात का रिकार्ड है कि 29.4 प्रतिशत पीएम10 (पार्टीकुलेट मैटर) का कारण खुले में कूड़ा जलाना है। प्रदूषण के साथ यह कई गंभीर श्वास रोगों का भी कारण है।

जुर्माना ना देने पर पेश होना पड़ेगा कोर्ट में

Penalty of rs 5000 on burning garbage in open
इसको देखते हुए दिल्ली-एनसीआर में खुले में किसी भी प्रकार का कूड़ा जलाने पर पूरी तरह प्रतिबंध होना चाहिए। यदि कोई आदेश का उल्लंघन करता है तो उसके खिलाफ संबंधित थाने, नगर निगम, दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) और इसकी स्थानीय इकाइयों तथा संबंधित विभाग के प्रमुख से शिकायत की जा सकती है। दोषी के खिलाफ एनजीटी की धारा 15 के तहत कार्रवाई की जाएगी।

जुर्माने से प्राप्त राशि का उपयोग पर्यावरण सुधार में किया जाएगा। एनजीटी ने कहा कि यदि कोई दोषी जुर्माना देने से मना करता है तो उसे ट्रिब्यूनल के सामने पेश होने के लिए कारण बताओ नोटिस दिया जाए।
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