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Delhi NCR News: पानी की किल्लत से जूझ रहा पटपड़गंज औद्योगिक क्षेत्र
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निजी टैंकरों के भरोसे व्यापारी
प्रथम चौहान
पूर्वी दिल्ली। प्रतिष्ठित औद्योगिक केंद्र पटपड़गंज गंभीर पेयजल संकट से जूझ रहा है। प्रिंटिंग, पैकेजिंग, गारमेंट मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपोर्ट से जुड़ी बड़ी इकाइयां पानी की भारी किल्लत का सामना कर रही हैं। सरकारी स्तर पर साफ पानी की व्यवस्था न होने के कारण व्यापारियों को रोजाना महंगे टैंकर और बोतलें मंगवानी पड़ रही हैं, जिसका सीधा असर मुनाफे पर पड़ रहा है।
फैक्ट्रियों में हजारों कर्मचारी काम करते हैं, लेकिन बुनियादी जरूरत के लिए सुचारू तंत्र मौजूद नहीं है। जल संकट से निपटने के लिए लगभग हर कंपनी मालिक ने फैक्ट्री में सबमर्सिबल पंप लगवा रखा है। लेकिन पीने के साफ पानी के लिए उन्हें निजी टैंकरों या बोतलबंद पानी की खरीद पर निर्भर रहना पड़ता है। इस मजबूरी ने औद्योगिक क्षेत्र के आर्थिक ढांचे पर अतिरिक्त भार डाल दिया है।
व्यापारियों का वर्जन
इलाके में पीने के साफ पानी की कोई व्यवस्था न होने के कारण हमें बाहर से पानी मंगवाना पड़ता है। इससे हमारा खर्च काफी बढ़ जाता है। कई बार फैक्ट्रियों की जरूरतें पूरी करने के लिए हमें महंगे टैंकर भी मंगवाने पड़ते हैं।
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— हंसराज रावत, व्यापारी
हमारी फैक्टरी में कई लोग काम करते हैं, जिस कारण पानी की मांग भी बहुत ज्यादा है। बुनियादी व्यवस्था न होने के कारण हमें रोजाना पीने का पानी खरीदना पड़ता है। पानी पर होने वाले इस भारी खर्च से हमारे बजट और मुनाफे पर काफी बुरा असर पड़ रहा है।
— अभय त्यागी, व्यापारी
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प्रथम चौहान
पूर्वी दिल्ली। प्रतिष्ठित औद्योगिक केंद्र पटपड़गंज गंभीर पेयजल संकट से जूझ रहा है। प्रिंटिंग, पैकेजिंग, गारमेंट मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपोर्ट से जुड़ी बड़ी इकाइयां पानी की भारी किल्लत का सामना कर रही हैं। सरकारी स्तर पर साफ पानी की व्यवस्था न होने के कारण व्यापारियों को रोजाना महंगे टैंकर और बोतलें मंगवानी पड़ रही हैं, जिसका सीधा असर मुनाफे पर पड़ रहा है।
फैक्ट्रियों में हजारों कर्मचारी काम करते हैं, लेकिन बुनियादी जरूरत के लिए सुचारू तंत्र मौजूद नहीं है। जल संकट से निपटने के लिए लगभग हर कंपनी मालिक ने फैक्ट्री में सबमर्सिबल पंप लगवा रखा है। लेकिन पीने के साफ पानी के लिए उन्हें निजी टैंकरों या बोतलबंद पानी की खरीद पर निर्भर रहना पड़ता है। इस मजबूरी ने औद्योगिक क्षेत्र के आर्थिक ढांचे पर अतिरिक्त भार डाल दिया है।
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व्यापारियों का वर्जन
इलाके में पीने के साफ पानी की कोई व्यवस्था न होने के कारण हमें बाहर से पानी मंगवाना पड़ता है। इससे हमारा खर्च काफी बढ़ जाता है। कई बार फैक्ट्रियों की जरूरतें पूरी करने के लिए हमें महंगे टैंकर भी मंगवाने पड़ते हैं।
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— हंसराज रावत, व्यापारी
हमारी फैक्टरी में कई लोग काम करते हैं, जिस कारण पानी की मांग भी बहुत ज्यादा है। बुनियादी व्यवस्था न होने के कारण हमें रोजाना पीने का पानी खरीदना पड़ता है। पानी पर होने वाले इस भारी खर्च से हमारे बजट और मुनाफे पर काफी बुरा असर पड़ रहा है।
— अभय त्यागी, व्यापारी