कोरोना से हालात सुधरने से मनोरोगी भी हो गए चंगे
- अस्पतालों में उपचार करा रहे मरीज अब तेजी से हो रहे स्वस्थ
- पहले के मुकाबले कम हुई रोगियों की संख्या
- गंभीर मरीज भी पहले की तुलना में कम
- डॉक्टरों का कहना-लंबे समय बाद अच्छी स्थिति देखी
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राजधानी में पिछले डेढ़ माह से कोरोना बेदम है। अधिकतर गतिविधियां भी खुल गई है। हालातों के सुधरने का बड़ा फायदा मनोरोगियों को मिल रहा है। अस्पतालों में इलाज करा रहे यह मरीज अब तेजी से स्वस्थ हो रहे हैं। पहले की तुलना में गंभीर मामले भी नहीं आ रहे हैं। भय और चिंता से जो मानसिक परेशानियां हो रही थी। वह भी अब काबू में आ गई है। पिछले साल कोरोना की शुरुआत के बाद ऐसा पहली बार हो रहा है की मनोरोगियों की सेहत तेजी से चंगी हो रही है। डॉक्टरों का कहना है सकारात्मक माहौल का फायदा मरीजों को हुआ है। इससे उनकी समस्याए कम हो रही है। यह लंबे समय बाद एक राहत की बात है।
मानव व्यवहार और संबद्घ विज्ञान संस्थान (इहबास) अस्पताल के चिकित्सा निदेशक डॉ. निमेष देसाई बताते हैं कि पहले यह अनुमान लगाया जा रहा था कि अनलॉक के बाद रोगियों की संख्या बढ़ सकती है, लेकिन ओपीडी में आने वाले मरीजों की संख्या में कोई इजाफा नहीं हुआ है। जिन मरीजों का उपचार चल रहा है। वह भी तेजी से स्वस्थ हो रहे हैं।
गंभीर रोगी भी पहले की तुलना में काफी कम हो गए हैं। कुछ ही रोगियों को भर्ती करने की जरूरत पड़ रही है। जबकि, मई और जून में हालात काफी खराब थे। तब इलाज करा रहे कई रोगियों की हालत गंभीर हो गई थी। ओपीडी में आने वाले हर व्यक्ति को तनाव और घबराहट थी। उस समय को देखते हुए स्थिति अब काफी बेहतर हो गई है। डॉ. देसाई का कहना है कि अगर संक्रमण से हालात इसी तरह बेहतर रहे तो आने वाले समय में मनोरोगियों की कई समस्या काबू में जाएंगी। जो एक बड़ी राहत होगी।
इसलिए मिली है राहत
सर गंगाराम अस्पताल के वरिष्ठ मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. राजीव मेहता का कहना है कि बाहरी हलचल का सीधा असर मनोरगियों के दिमाग पर पड़ता है। चूंकि अब कोरोना से हालात बेहतर हो चुके हैं। अधिकतर ऑफिस फिर से खुल गए हैं। लोगों ने बाहर आना -जाना और एक दूसरे से मिलना शुरू कर दिया है। कोरोना से जुड़ी कोई नकारात्मक खबरे भी नहीं आ रही है। लायरस के दैनिक मामले भी काबू में है। इसका सीधा असर लोगों की मानसिक सेहत पर पड़ रहा है। अब उनके मन में अधिक चिंता व भय नहीं है।
तनाव भी कम हो गया है। यही कारण है कि मनोरोगी अब तेजी से स्वस्थ हो रहे हैं। हालांकि, अभी कुछ ऐसे मामले सामने आ रहे हैं, जिनमें छोटे बच्चों और किशोरो को मानसिक समस्याएं हो रही है। ऐसा स्क्रीन पर ज्यादा समय बिताने से हो रहा है। इन मरीजों को काउंसलिंग और दवाओं के माध्यम से स्वस्थ किया जा रहा है। डॉक्टर के मुताबिक, हालात अच्छे हो रहे हैं, लेकिन लोगों को पूरी तरह सतर्क रहने की जरूरत है।
इन बातों का ध्यान रखना जरूरी
वरिष्ठ मनोरोग चिकित्सक डॉक्टर राजकुमार बताते हैं कि अब हालात बेहतर हैं। हालांकि, जिन लोगों को कुछ परेशानियां हैं उनके लिए जरूरी है की मित्रों और परिवार के सदस्यों के साथ अधिक से अधिक समय बिताएं। अपनी समस्या के बारे में उनसे चर्चा करें, पर्याप्त नींद व संतुलित भोजन लें, नियमित रूप से व्यायाम करें, धीमी आवाज में संगीत का आनंद लें, प्रकृति के सानिध्य में रहें, हमेशा सकारात्मक रहें और ऐसे ही लोगों की संगति में रहें। प्रतिदिन योग करके भी आत्मिक शांति मिलती है।
क्या कहते हैं आंकड़े?
- नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ मेंटल हेल्थ एंड न्यूरो साइंस (निम्हंस) ने 2016 में देश के 12 राज्यों में एक सर्वेक्षण करवाया था। आंकड़ों के मुताबिक, देश की आबादी का 2.7 फ़ीसदी हिस्सा अवसाद जैसी समस्याओं से पीड़ित हैं।
- राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के मुताबिक, साल 2019 में दिल्ली में प्रतिदिन औसतन 7 लोगों ने आत्महत्या की। इनमें सबसे ज्यादा संख्या मनोरोगियों की है। मनोरोग की वजह से आत्महत्या करने वालों की संख्या 2018 के मुकाबले 2019 में ढाई गुना बढ़ गई है, जबकि 2020 में यह आंकड़ा और बढ़ा है। हालांकि, अभी 2020 के आधिकारिक आंकड़े तैयार नहीं किए गए हैं
दिल्ली सरकार ने भी जारी किया है हेल्पलाइन नंबर
मानसिक समस्याओं से जूझ रहे लोगों के लिए दिल्ली सरकार ने हेल्पलाइन नंबर 180011688 और 10580 जारी किया है। इन नंबरों पर कॉल करके कोई भी व्यक्ति अपनी मानसिक समस्या बताकर उससे जुड़ा हल प्राप्त कर सकता है।