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लॉकडाउन की कीमत अब तक चुका रहे मरीज, कइयों का इलाज डॉक्टरों के लिए चुनौती

Wed, 02 Dec 2020 02:37 AM IST
दुष्यंत शर्मा परीक्षित निर्भय, नई दिल्ली
परीक्षित निर्भय, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Wed, 02 Dec 2020 02:37 AM IST
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Patients still paying the price of lockdown
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कोरोना वायरस की वजह से लगे लॉकडाउन में बीमारियों का सही से इलाज नहीं करा पाने वाली मरीज अब तक परेशानी झेल रहे हैं। कई मरीज ऐसी स्थिति में पहुंच गए हैं कि उनका उपचार करना डॉक्टरों के लिए भी चुनौती बन गया है। राजधानी के सरकारी और प्राइवेट अस्पतालों में लॉकडाउन के दौरान मरीजों का व्यवस्थित उपचार न होने या फिर सर्जरी टलने की वजह से यह दिक्कतें आई हैं। इनमें मूत्राशय से जुड़े रोगी भी हैं। हर वर्ष मूत्राशय रोगों को लेकर जागरूकता कार्यक्रम भी आयोजित होते हैं। डॉक्टरों का कहना है कि मूत्राशय संबंधी जटिल बीमारियों से ग्रस्त रोगियों की संख्या हजारों में है।

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दिल्ली के पटपड़गंज स्थित मैक्स अस्पताल के डॉ. मनोज जैन ने कहा कि हमारे पास मूत्राशय की जटिल समस्याओं से ग्रस्त रोगी काफी संख्या में आ रहे हैं। इनका इलाज काफी चुनौतीपूर्ण हो गया है क्योंकि कोरोनो के कारण रोगियों ने चिकित्सकीय सहायता लेने में देरी की है। वहीं नई दिल्ली स्थित डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल के वरिष्ठ डॉ. राजीव सूद का कहना है कि सर्जरी न होने से कुछ रोगियों के केस जटिल हो गए हैं। 
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डॉ. मनोज जैन कहते हैं कि गुर्दे की पथरी निकालने जैसी सरल सर्जरी को टालने से गंभीर समस्याओं का जन्म हो सकता है। उपचार में देर करना सही नहीं है। पुरुषों में यूरेनरी रिटेंशन, लॉकडाउन अवधि में सबसे आम समस्या रही है। जबकि महिलाओं में यूरेनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन की समस्या आम थी। लॉकडाउन के दौरान कई रोगियों को वैकल्पिक दवाइयां दी जाती रहीं, जिससे मरीजों की स्थिति और बदतर हो गई। चिकित्सक से परामर्श के बिना कई लोगों ने गुर्दे की पथरी को निकलवाने में देरी की, ऐसा करना किडनी फेल्योर का कारण हो सकता है।
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कोरोना का खौफ सबसे बड़ी वजह
डॉक्टरों के अनुसार मरीजों में कोरोना का काफी खौफ है। उन्हें लगता है कि अस्पताल जाने पर वह संक्रमित हो सकते हैं, जबकि उन्हीं के परिजन बाजार या शॉपिंग मॉल्स में खरीदारी कर रहे हैं। शादी समारोह आदि में भी सहभागिता की जा रही है। कहने का आशय है कि व्यक्ति अपने रोजमर्रा के कार्यों में किसी प्रकार की कोताही नहीं करना चाहते। ऐसे में मरीजों को समझना चाहिए कि अस्पतालों में कोविड वार्ड और सामान्य मरीजों के वार्ड के बीच स्पष्ट रूप से अलगाव किया गया है। शॉपिग करने वाली जगह की तुलना में अस्पताल सुरक्षित हैं। इसलिए कोरोनो से संक्रमित होने की आशंका के कारण सर्जरी में देरी करना सही नहीं है।

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