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ई-संजीवनी: जानकारी के अभाव में मरीज नहीं कर रहे संपर्क, ओपीडी में खाली बैठे रहते हैं डॉक्टर

Sun, 19 Jun 2022 06:32 AM IST
विजय पुंडीर अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: विजय पुंडीर Updated Sun, 19 Jun 2022 06:32 AM IST
सार

दिल्ली नगर निगम के हिंदूराव अस्पताल की जनरल ओपीडी में भीड़भाड़ कम करने के लिए ई-संजीवनी ओपीडी खोली गई। लेकिन ओपीडी में रोज औसतन 10 मरीज ही फोन कर रहे हैं। मरीजों की संख्या कम होने की वजह से डॉक्टर खाली बैठे रहते हैं। 

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Patients are not contacting in e sanjeevani opd doctors are sitting empty
हिंदूराव अस्पताल - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कोरोना महामारी काल में लगे लॉकडाउन के समय घरों में कैद लोगों को इलाज की अत्यंत आवश्यकता थी। सरकार ने उस समय ई-संजीवनी सेवा शुरू की और लोगों ने घर बैठे ई-संजीवनी एप के इस्तेमाल से चिकित्सकीय परामर्श लिया और स्वस्थ हुए। हाल ही में दिल्ली नगर निगम के हिंदूराव अस्पताल में ई-संजीवनी ओपीडी खोली, ताकि अस्पताल की जनरल ओपीडी में भीड़भाड़ कम हो और लोग घर बैठे इलाज करा सकें, लेकिन अभी काफी संख्या में लोगों को ई-संजीवनी ओपीडी की जानकारी नहीं है, जिसके कारण ओपीडी में डॉक्टर खाली बैठे रहते हैं और यहां रोज औसतन 10 मरीज ही फोन कर रहे हैं। पेश है संवाददाता आदित्य पाण्डेय की लाइव रिपोर्ट....

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स्थान : हिंदूराव अस्पताल परिसर
समय : दोपहर 1 बजे
हिंदूराव अस्पताल की जनरल ओपीडी में अमूमन भारी भीड़भाड़ रहती है, लेकिन शनिवार को यहां खास भीड़ नहीं थी। दो बजे तक जनरल ओपीडी खुली रहती है। यहां छह खिड़कियां हैं, इसकी एक खिड़की पर केवल दो लोग थे। बेहद पुरानी अस्पताल की बिल्डिंग में साफ सफाई तो थी, लेकिन बिल्डिंग में जहां तहां दरारें नजर आ रही थीं। यह बिल्डिंग खासी जर्जर हालत में है। यहां ड्यूटी कर रहे एक गार्ड ने कैजुअलटी वार्ड के बगल में स्थापित ई-संजीवनी ओपीडी तक पहुंचाया। इस महीने छह जून को इसका उद्घाटन हुआ है। उद्घाटन के समय लगाए गए फूल अभी यहां लगे थे। सामने हेल्प डेस्क थी, पर यहां कोई नहीं था। दाहिनी दीवार पर ई-संजीवनी ओपीडी का बोर्ड देखकर सीधे कमरे में प्रवेश किया तो अंदर कंप्यूटर के सामने बैठी एक महिला नजर आईं। बातचीत के दौरान पता चला कि वह डॉक्टर हैं, उन्होंने बताया कि सुबह से तीन डॉक्टर यहां ड्यूटी पर थे। एक बजे से वह अकेले ड्यूटी पर हैं। 
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औसतन 10 लोग ही कर रहे फोन
ई-संजीवनी ओपीडी में 13 दिन में करीब 130 लोगों ने फोन किया। औसतन रोज 10 लोगों ने फोन किया। पहले दिन 28, दूसरे, तीसरे दिन शून्य, चौथे दिन सात, पांचवें दिन 14 और अगले दिन फिर शून्य लोगों ने फोन किया।
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इस तरह चलती है ई-संजीवनी की ओपीडी
पहला स्टेप : फोन के प्ले स्टोर से पहले ई-संजीवनी ओपीडी एप डाउनलोड करना है। प्ले स्टोर पर इस एप को 3.8 की रेटिंग प्राप्त है। यह कम एमबी का है इसलिए आसानी से डाउनलोड होकर इंस्टाल हो जाता है।

दूसरा स्टेप : एप खुलने के बाद सबसे पहला विकल्प मरीज के रजिस्ट्रेशन और टोकन नंबर लेने का होता है। फिर राज्य दिल्ली चुनना है और इसके नीचे दो बटन, जनरल ओपीडी, स्पेशल ओपीडी का है। जनरल ओपीडी चुनते ही दिल्ली राज्य संजीवनी ओपीडी और दिल्ली नगर निगम ओपीडी का विकल्प आता है।

तीसरा स्टेप : फिर मोबाइल नंबर वेरिफिकेशन का विकल्प है। दस अंकों का मोबाइल नंबर लिखकर ओटीपी आएगा। ओटीपी भरते ही रजिस्ट्रेशन नंबर और टोकन नंबर का संदेश मोबाइल पर मिलता है।

चौथा स्टेप : मरीज को पीछे आकर लॉगिन करना है। मोबाइल नंबर और टोकन नंबर की मदद से तत्काल ही डॉक्टर को कॉल लगती है। कुछ सेकेंड में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में डॉक्टर आपसे परेशानी पूछेंगे।

पांचवां स्टेप : एमसीडी डॉक्टर रजनी सिंह ने बीमारी जानने के बाद परामर्श दिया और साथ ही दवा का पर्चा और प्रिस्क्रिप्शन डाउनलोड करने का सुझाव दिया। परेशानी ज्यादा होने की स्थिति में नजदीकी अस्पताल में भर्ती होने की सलाह दी।

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