संसदीय सचिव बने 21 विधायकों को लेकर अब चुनाव आयोग पर टिकीं आप की निगाहें
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दिल्ली हाईकोर्ट से 21 संसदीय सचिवों की नियुक्ति रद्द होने के बाद अब आम आदमी पार्टी (आप) की नजर केंद्रीय चुनाव आयोग के फैसले पर टिक गई है। पार्टी का मानना है कि यहां से फैसला उनके हक में जा सकता है।
एक वरिष्ठ नेता के मुताबिक, जब नियुक्तियां ही वैध नहीं हैं तो उस आधार पर विधायकों की सदस्यता कैसे रद्द हो सकती है। हालांकि, पार्टी अभी इस मामले में खुलकर बोलने से बच रही है। पार्टी का कहना है कि चुनाव आयोग में सुनवाई जारी होने से इस पर ज्यादा कुछ कहने की जरूरत नहीं।
आयोग हर पक्ष को ध्यान में रखते हुए अपना फैसला सुनाएगा। जानकारों का मानना है कि संसदीय सचिवों की नियुक्ति अवैध होने के बाद वे लाभ के पद के दायरे में ही नहीं आ सकते। हां यदि नियुक्ति सही मानी जाती तो जरूर इनके लिए सदस्यता तक जाने का खतरा बन जाता।
बीते साल मई में दिल्ली सरकार ने 21 संसदीय सचिवों की नियुक्ति की थी। इससे मामले में विवाद शुरू हो गया। इसके बाद दिल्ली सरकार विधायकों के बचाव में उतर आई।
क्या है संसदीय सचिवों की नियुक्ति की उलझन
संसदीय सचिवों की नियुक्ति के बाद जून 2015 में दिल्ली विधानसभा सदस्य (अयोग्यता निवारण संशोधन) बिल लाया गया। इसमें मंत्रियों को संसदीय सचिव रखने की छूट दी गई।
साथ ही इसे लाभ के पद से अलग किया। संसदीय सचिवों को वेतन, भत्ता नहीं मिलता। जरूरत पड़ने पर उन्हें वाहन और मंत्री के ऑफिस में बैठने की जगह मिल सकती है।
उधर, आप विधायकों ने चुनाव आयोग में दलील दी है कि उनका पद लाभ के पद के दायरे में नहीं आता है। उन्हेें न सरकार से कोई ऑफिस मिला, ना कोई परिवहन की सुविधा। वह सरकार के पैसे से नोटबुक या पेन का भी इस्तेमाल नहीं करते।
संसदीय सचिवों की नियुक्ति की उलझन
मार्च 2015 में 21 विधायकों की संसदीय सचिव के तौर पर नियुक्ति हुई।
जून 2015 में सरकार ने बिल लाकर संसदीय सचिव के पद को लाभ के पद से हटाया
सरकार ने संशोधित कानून को बैक डेट से लागू करने का प्रस्ताव किया।
दिल्ली सरकार ने बिल को उपराज्यपाल के पास भेजा, जिसे मंजूरी के लिए केंद्र सरकार व राष्ट्रपति के पास भेज दिया गया।
बैक डेट से बिल लाने की वजह से दिल्ली सरकार के फैसले को केंद्र से मंजूरी नहीं मिली।
जून 2016 : राष्ट्रपति ने संशोधित बिल को खारिज कर इसे चुनाव आयोग के पास भेज दिया।
फिलहाल मामले की सुनवाई चुनाव आयोग में चल रही है।