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Delhi NCR News: असम की सत्रीया परंपरा से रूबरू कराएगी पारिजात हरण
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एनएसडी में 23 अगस्त को होगी प्रस्तुति
संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। भारत की समृद्ध शास्त्रीय नृत्य परंपराओं को दिल्ली के दर्शकों तक पहुंचाने के लिए कला-तरंगिणी (द दिल्ली कला फेस्टिवल 2026) के तहत 23 अगस्त को राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (एनएसडी) में सत्रीया नृत्य-नाटिका पारिजात हरण प्रस्तुत की जाएगी। दिल्ली सरकार के पर्यटन विभाग के सहयोग से आयोजित यह प्रस्तुति श्रीमंत शंकरदेव की रचित प्रसिद्ध अंकिया नाट पर आधारित है।
लगभग पांच शताब्दियों पुरानी सत्रीया, भारत की आठ मान्यता प्राप्त शास्त्रीय नृत्य परंपराओं में शामिल है। श्रीमंत शंकरदेव और माधवदेव से जुड़ी वैष्णव परंपरा से विकसित इस कला में आध्यात्मिकता के साथ नृत्य, संगीत व अभिनय का अनूठा संगम दिखता है।
19 से 31 अगस्त तक चलने वाले कला-तरंगिणी महोत्सव में सत्रीया के साथ भरतनाट्यम, कथकली, ओडिसी, कथक, छऊ और मणिपुरी शैलियों को भी मंच मिलेगा।
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संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। भारत की समृद्ध शास्त्रीय नृत्य परंपराओं को दिल्ली के दर्शकों तक पहुंचाने के लिए कला-तरंगिणी (द दिल्ली कला फेस्टिवल 2026) के तहत 23 अगस्त को राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (एनएसडी) में सत्रीया नृत्य-नाटिका पारिजात हरण प्रस्तुत की जाएगी। दिल्ली सरकार के पर्यटन विभाग के सहयोग से आयोजित यह प्रस्तुति श्रीमंत शंकरदेव की रचित प्रसिद्ध अंकिया नाट पर आधारित है।
लगभग पांच शताब्दियों पुरानी सत्रीया, भारत की आठ मान्यता प्राप्त शास्त्रीय नृत्य परंपराओं में शामिल है। श्रीमंत शंकरदेव और माधवदेव से जुड़ी वैष्णव परंपरा से विकसित इस कला में आध्यात्मिकता के साथ नृत्य, संगीत व अभिनय का अनूठा संगम दिखता है।
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19 से 31 अगस्त तक चलने वाले कला-तरंगिणी महोत्सव में सत्रीया के साथ भरतनाट्यम, कथकली, ओडिसी, कथक, छऊ और मणिपुरी शैलियों को भी मंच मिलेगा।