मरने से पहले लिख गई- 'मैं अच्छी बेटी नहीं बन पाई पापा, मेरे अंग दान कर देना'
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अपनी जान देने के बाद 11वीं कक्षा की छात्रा दो लोगों के जीवन में उजाला कर गई। मौरिस नगर इलाके में मंगलवार को कंपार्टमेंट के पेपर में फेल होने के बाद फांसी लगाने वाली रीमा सूद (17) ने सुसाइड नोट में शरीर के अंगों को दान करने की इच्छा जताई थी।
परिवार को रीमा का नोट देर से मिला। इसी वजह से सिर्फ उसकी आंखें दान की जा सकीं। नोएडा के एक अस्पताल में रीमा की अंतिम इच्छा को पूरा किया।
पुलिस के मुताबिक रीमा अपने परिवार के साथ डीयू के नॉर्थ कैंपस में रहती थी। वह शक्ति नगर स्थित सरकारी स्कूल में में साइंस स्ट्रीम की छात्रा था। फाइनल रिजल्ट में उसकी रसायन विज्ञान में कंपार्टमेंट आई थी।
बाकी अंग काम न आए पर दान कर दी आंखें
जिसके बाद उसने दोबारा पेपर दिया था, लेकिन मंगलवार आए रिजल्ट में वह दोबारा फेल हो गई। इससे आहत होकर उसने फांसी लगा ली। देर रात रीमा के बैग से परिवार को सुसाइड नोट बरामद हुआ।
रीमा के पिता राजेश के मुताबिक नोट में माता-पिता से माफी मांगते हुए जीवन में कामयाब न होने का जिक्र किया गया था। रीमा ने अपनी अंतिम इच्छा के रूप में अपने शरीर के अंगों को दान करने की इच्छा जताई थी।
इसका पता चलते ही परिवार ने बेटी की इच्छा पर अमल करना शुरू किया। रीमा के बाकी अंग तो काम नहीं आ सके, लेकिन उसकी आंखें दान कर दी गई। नोएडा के एक अस्पताल ने उसकी आंखें लेकर दो लोगों को लगाने का वादा किया गया।