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Delhi NCR News: 3700 से अधिक जर्जर वर्कस्पेस होंगे ध्वस्त, बनेंगे आधुनिक व्यावसायिक केंद्र
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30 साल की मियाद पूरी कर चुकीं डीएसआईआईडीसी की इमारतें तोड़ी जाएंगी, 46.7 एकड़ जमीन का होगा पुनर्विकास
पीपीपी मॉडल पर बनेंगे केंद्र, सलाहकार चयन के लिए 3.26 करोड़ रुपये जारी
आदित्य पाण्डेय
नई दिल्ली।दिल्ली में हादसों का खतरा बने 3700 से अधिक जर्जर कम्युनिटी वर्कस्पेस को ध्वस्त कर उनकी जगह आधुनिक औद्योगिक और व्यावसायिक केंद्र विकसित किए जाएंगे। दिल्ली राज्य औद्योगिक एवं बुनियादी ढांचा विकास निगम (डीएसआईआईडीसी) ने पुनर्वास कॉलोनियों और झुग्गी-झोपड़ी (जेजे) क्लस्टरों में स्थित इन वर्कस्पेस के पुनर्विकास की योजना तैयार की है। इसके तहत 52 स्थानों पर 46.7 एकड़ से अधिक जमीन का सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल पर विकास किया जाएगा। परियोजना की रूपरेखा तैयार करने और निजी डेवलपर के चयन में सहायता के लिए निगम ने 3,26,30,500 रुपये की अनुमानित लागत से ट्रांजैक्शन एडवाइजर नियुक्त करने की निविदा जारी की है।
डीएसआईआईडीसी ने इन वर्कस्पेस का निर्माण दो चरणों में कराया था। पहले चरण में 1978 से 1980 के बीच 29 स्थानों पर 1120 एक मंजिला वर्कशेड बनाए गए थे। इसके बाद 1991-92 में दूसरे चरण के तहत 23 स्थानों पर 2589 वर्कस्पेस वाली भूतल और प्रथम तल की संरचनाएं तैयार की गई थीं। इन अर्ध-स्थायी ढांचों की निर्धारित उम्र 30 वर्ष थी, जो अब पूरी हो चुकी है।
समय के साथ इन इमारतों की हालत खराब हो गई है। कई जगह छतें, कैंटिलीवर और पैरापेट क्षतिग्रस्त हैं। सीवर और सेप्टिक टैंक जाम होने के साथ आंतरिक सड़कें और नालियां भी बदहाल हैं। ऐसे में यहां काम करने वाले छोटे कारोबारियों और श्रमिकों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। पुनर्विकास योजना के तहत पुराने ढांचों को हटाकर सुरक्षित और बेहतर सुविधाओं वाले केंद्र बनाने का प्रस्ताव है।
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मंगोलपुरी से सीलमपुर तक 52 स्थान शामिल
योजना में मंगोलपुरी के तीन ब्लॉक, सुल्तानपुरी, जहांगीरपुरी, शकूरपुर, वजीरपुर, मादीपुर, कालकाजी, दक्षिणपुरी, सीलमपुर, सीमापुरी, नंद नगरी, संगम पार्क, तिलक विहार और ज्वालापुरी समेत 52 स्थान शामिल हैं। इन क्षेत्रों में छोटे कामगारों और उद्यमियों को कारोबार के लिए जगह उपलब्ध कराने के उद्देश्य से वर्कस्पेस बनाए गए थे। अब बहुमंजिला इमारतों के रूप में इनका पुनर्विकास कर जमीन का बेहतर उपयोग करने की योजना है।
52 सप्ताह में तैयार होगा परियोजना का खाका
ट्रांजैक्शन एडवाइजर के चयन के बाद एजेंसी को 52 सप्ताह के भीतर परियोजना की व्यवहार्यता का अध्ययन, वास्तु एवं संरचनात्मक डिजाइन और कारोबारी मॉडल तैयार करना होगा। इसके बाद निजी डेवलपर के चयन के लिए निविदा प्रक्रिया और रियायत समझौते से जुड़ी औपचारिकताओं में भी सलाहकार निगम की मदद करेगा।
आवंटियों का पुनर्वास होगी अहम चुनौती
पुनर्विकास के बाद छोटे उद्यमियों को आधुनिक वर्कस्पेस, बेहतर बिजली-पानी, स्वच्छता और सुरक्षित कार्यस्थल उपलब्ध कराने की योजना है। पुराने शेडों में अनधिकृत निर्माण और अतिक्रमण की समस्या भी सामने आई है। नए केंद्रों से बुनियादी सुविधाओं में सुधार की उम्मीद है। हालांकि, परियोजना की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि निर्माण के दौरान मौजूदा आवंटियों के कारोबार को कैसे सुरक्षित रखा जाता है, उनके पुनर्वास की क्या व्यवस्था होती है और उन्हें नए वर्कस्पेस किन शर्तों पर उपलब्ध कराए जाते हैं।
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पीपीपी मॉडल पर बनेंगे केंद्र, सलाहकार चयन के लिए 3.26 करोड़ रुपये जारी
आदित्य पाण्डेय
नई दिल्ली।दिल्ली में हादसों का खतरा बने 3700 से अधिक जर्जर कम्युनिटी वर्कस्पेस को ध्वस्त कर उनकी जगह आधुनिक औद्योगिक और व्यावसायिक केंद्र विकसित किए जाएंगे। दिल्ली राज्य औद्योगिक एवं बुनियादी ढांचा विकास निगम (डीएसआईआईडीसी) ने पुनर्वास कॉलोनियों और झुग्गी-झोपड़ी (जेजे) क्लस्टरों में स्थित इन वर्कस्पेस के पुनर्विकास की योजना तैयार की है। इसके तहत 52 स्थानों पर 46.7 एकड़ से अधिक जमीन का सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल पर विकास किया जाएगा। परियोजना की रूपरेखा तैयार करने और निजी डेवलपर के चयन में सहायता के लिए निगम ने 3,26,30,500 रुपये की अनुमानित लागत से ट्रांजैक्शन एडवाइजर नियुक्त करने की निविदा जारी की है।
डीएसआईआईडीसी ने इन वर्कस्पेस का निर्माण दो चरणों में कराया था। पहले चरण में 1978 से 1980 के बीच 29 स्थानों पर 1120 एक मंजिला वर्कशेड बनाए गए थे। इसके बाद 1991-92 में दूसरे चरण के तहत 23 स्थानों पर 2589 वर्कस्पेस वाली भूतल और प्रथम तल की संरचनाएं तैयार की गई थीं। इन अर्ध-स्थायी ढांचों की निर्धारित उम्र 30 वर्ष थी, जो अब पूरी हो चुकी है।
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समय के साथ इन इमारतों की हालत खराब हो गई है। कई जगह छतें, कैंटिलीवर और पैरापेट क्षतिग्रस्त हैं। सीवर और सेप्टिक टैंक जाम होने के साथ आंतरिक सड़कें और नालियां भी बदहाल हैं। ऐसे में यहां काम करने वाले छोटे कारोबारियों और श्रमिकों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। पुनर्विकास योजना के तहत पुराने ढांचों को हटाकर सुरक्षित और बेहतर सुविधाओं वाले केंद्र बनाने का प्रस्ताव है।
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मंगोलपुरी से सीलमपुर तक 52 स्थान शामिल
योजना में मंगोलपुरी के तीन ब्लॉक, सुल्तानपुरी, जहांगीरपुरी, शकूरपुर, वजीरपुर, मादीपुर, कालकाजी, दक्षिणपुरी, सीलमपुर, सीमापुरी, नंद नगरी, संगम पार्क, तिलक विहार और ज्वालापुरी समेत 52 स्थान शामिल हैं। इन क्षेत्रों में छोटे कामगारों और उद्यमियों को कारोबार के लिए जगह उपलब्ध कराने के उद्देश्य से वर्कस्पेस बनाए गए थे। अब बहुमंजिला इमारतों के रूप में इनका पुनर्विकास कर जमीन का बेहतर उपयोग करने की योजना है।
52 सप्ताह में तैयार होगा परियोजना का खाका
ट्रांजैक्शन एडवाइजर के चयन के बाद एजेंसी को 52 सप्ताह के भीतर परियोजना की व्यवहार्यता का अध्ययन, वास्तु एवं संरचनात्मक डिजाइन और कारोबारी मॉडल तैयार करना होगा। इसके बाद निजी डेवलपर के चयन के लिए निविदा प्रक्रिया और रियायत समझौते से जुड़ी औपचारिकताओं में भी सलाहकार निगम की मदद करेगा।
आवंटियों का पुनर्वास होगी अहम चुनौती
पुनर्विकास के बाद छोटे उद्यमियों को आधुनिक वर्कस्पेस, बेहतर बिजली-पानी, स्वच्छता और सुरक्षित कार्यस्थल उपलब्ध कराने की योजना है। पुराने शेडों में अनधिकृत निर्माण और अतिक्रमण की समस्या भी सामने आई है। नए केंद्रों से बुनियादी सुविधाओं में सुधार की उम्मीद है। हालांकि, परियोजना की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि निर्माण के दौरान मौजूदा आवंटियों के कारोबार को कैसे सुरक्षित रखा जाता है, उनके पुनर्वास की क्या व्यवस्था होती है और उन्हें नए वर्कस्पेस किन शर्तों पर उपलब्ध कराए जाते हैं।