रक्षा मंत्री ने किया OROP का ऐलान, VRS पर अड़े पूर्व सैनिक
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दशकों से लटकी पूर्व सैनिकों की मांग को मानते हुए आज एनडीए सरकार ने वन रैंक वन पेंशन का ऐलान कर दिया है। हालांकि पूर्व-सैनिक इस ऐलान से पूरी तरह संतुष्ट नहीं हैं। इसलिए अभी उनका अनशन जारी है।
सैनिकों का कहना है कि वो सरकार के ओआरओपी को लागू करने के फैसले का तो स्वागत करते हैं लेकिन उनकी 6 मांगों को नहीं माना गया है जिससे वो संतुष्ट नहीं हैं।
गौरतलब है कि पूर्व सैनिकों ने वीआरएस लेने वालों को ओआरओपी में लाने की मांग की थी जबकि सरकार ने ऐसा नहीं किया है। इसके साथ ही बेस ईयर 2013 की अधिकतम स्केल को माना जाए ऐसा सैनिक चाहते थे लेकिन सरकार ने 2013 की एवरेज आय को बेस माना है।
वहीं इसे लागू करने के लिए जो कमेटी बनी है वो एक सदस्यीय है जबकि पूर्व सैनिकों की मांग थी कि ये 5 सदस्यों वाली हो। वहीं सरकार इसे 1 जुलाई 2014 से लागू कर रही है जबकि पूर्व सरकार ने इसे 1 अप्रैल 2014 से लागू किया था। वहीं पूर्व सैनिकों की मांग ठुकराते हुए सरकार ने रिव्यू के लिए हर साल की जगह 5 साल का समय तय किया है।
सैनिक कर रहे वेट एंड वॉच की रणनीति पर काम
वन रैंक वन पेंशन की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर आंदोलन कर रहे पूर्व सैनिक फिलहाल वेट एंड वाच की रणनीति पर काम कर रहे हैं। पूर्व सैनिकों को कहना है कि अगर सरकार से उनका समझौता नहीं होता तो अगले सप्ताह से आंदोलन को तेज किया जाएगा।
जंतर-मंतर के साथ पूर्व सैनिक नागपुर में आरएसएस मुख्यालय व वाराणसी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय कार्यालय के सामने आंदोलन करेंगे। इसके अलावा अगले शनिवार व रविवार को जंतर मंतर पर बड़ी रैली होगी।
मीडिया से बात करते हुए आंदोलनकारियों का कहना था कि सरकार का मौजूदा रुख पांच साल में पेंशन का रिव्यू करने का है। पूर्व सैनिक सरकार की इस शर्त को किसी भी हालत में स्वीकार नहीं करेंगे।
सैनिक चाहते हैं दो साल पर रिव्यू
पूर्व सैनिक अधिकतम दो साल में रिव्यू करने को सहमत हैं। हालांकि, इस बदलाव से भी 11 फीसदी वरिष्ठ पूर्व सैनिकों को अपने कनिष्ठों से कम पेंशन मिलेगी। लेकिन अगर सरकार पांच साल में रिव्यू करती है तो यह वन रैंक वन पेंशन रह ही नहीं जाएगी।
एनएक्ससीसी के राष्ट्रीय महासचिव रामकुमार शर्मा ने बताया कि सोमवार को अगर सरकार एकतरफा वन रैंक वन पेंशन लागू करने का ऐलान करती है तो आंदोलन का रूप व्यापक होगा।
इसके बाद करीब 500 पूर्व सैनिक आमरण अनशन पर बैठेंगे। वहीं, जंतर-मंतर के साथ पूरे देश में आंदोलन होगा। इसके साथ ही अगले शनिवार और रविवार को जंतर मंतर पर बड़ा आंदोलन होगा। सैनिक अपने हक की लड़ाई आखिरी सांस तक लड़ेगा।