{"_id":"6238b7a435844951de07ace5","slug":"order-of-supreme-court-faridabad-authority-should-cooperate-with-railways-in-removing-encroachment","type":"story","status":"publish","title_hn":"सुप्रीम कोर्ट का आदेश: अतिक्रमण हटाने में रेलवे को सहयोग करे फरीदाबाद अथॉरिटी, 600 लोगों का है संपत्ति पर कब्जा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सुप्रीम कोर्ट का आदेश: अतिक्रमण हटाने में रेलवे को सहयोग करे फरीदाबाद अथॉरिटी, 600 लोगों का है संपत्ति पर कब्जा
Mon, 21 Mar 2022 11:17 PM IST
आकाश दुबे
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
Published by: आकाश दुबे
Updated Mon, 21 Mar 2022 11:17 PM IST
सार
जस्टिस एएम खानविलकर और जस्टिस एएस ओका की पीठ ने आदेश में कहा हम फरीदाबाद नगर निगम के आयुक्त, पुलिस अधीक्षक व जिला कलेक्टर को यह सुनिश्चित करने का निर्देश देते हैं कि प्रशासन अनधिकृत संरचनाओं को जल्द से जल्द हटाने में रेलवे के अधिकारियों को सहयोग करें। रेलवे ने शीर्ष अदालत में बताया कि फरीदाबाद में करीब 600 लोगों ने उसकी संपत्ति पर कब्जा कर रखा है।
विज्ञापन
सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को फरीदाबाद नगर निगम के आयुक्त एवं अन्य अथॉरिटी को अतिक्रमण हटाने में रेलवे को सहयोग करने का निर्देश दिया है। रेलवे ने शीर्ष अदालत में बताया कि फरीदाबाद में करीब 600 लोगों ने उसकी संपत्ति पर कब्जा कर रखा है। रेलवे ने बेदखली का आदेश भी पारित किया है लेकिन स्थानीय प्रशासन की ओर से सहयोग नहीं हो रहा।
जस्टिस एएम खानविलकर और जस्टिस एएस ओका की पीठ ने आदेश में कहा, हम फरीदाबाद नगर निगम के आयुक्त, पुलिस अधीक्षक व जिला कलेक्टर को यह सुनिश्चित करने का निर्देश देते हैं कि प्रशासन अनधिकृत संरचनाओं को जल्द से जल्द हटाने में रेलवे के अधिकारियों को सहयोग करें। रेलवे की ओर से पेश हुए एडिशनल सॉलिसिटर जनरल केएम नटराज ने पीठ को बताया कि सार्वजनिक परिसर (अनाधिकृत अधिभोगी बेदखल) अधिनियम के तहत रेलवे की संपत्ति पर अतिक्रमण को हटाने का आदेश पारित किया गया है, लेकिन फरीदाबाद की स्थानीय अथॉरिटी के असहयोग के कारण इसके निष्पादन में देरी हो रही है। स्थानीय प्रशासन के सहयोग के बिना हम इस आदेश को पूरा करने में असमर्थ हैं।
एएसजी नटराज ने कहा, स्थानीय प्रशासन को ड्यूटी मजिस्ट्रेट नियुक्त कर सहयोग करना चाहिए और पुलिस द्वारा सहायता मिलनी चाहिए, जिससे कि आदेश का अनुपालन किया जा सके। जिसके बाद पीठ ने स्थानीय अथॉरिटी को रेलवे को सहयोग देने का निर्देश दिया। पीठ ने आदेश की प्रति नगर निगम आयुक्त, जिला कलेक्टर एवं पुलिस अधीक्षक, फरीदाबाद को देने का भी निर्देश दिया। सुप्रीम कोर्ट दो अलग-अलग याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है। इनमें से एक गुजरात तो दूसरी हरियाणा में रेलवे की जमीन पर अतिक्रमण से जुड़ी है। हरियाणा मामले की याचिका फरीदाबाद के रेलवे ट्रैक के पास अनधिकृत रूप से बसी झुग्गियों को हटाने से जुड़ी है।
विज्ञापन
विज्ञापन
जस्टिस एएम खानविलकर और जस्टिस एएस ओका की पीठ ने आदेश में कहा, हम फरीदाबाद नगर निगम के आयुक्त, पुलिस अधीक्षक व जिला कलेक्टर को यह सुनिश्चित करने का निर्देश देते हैं कि प्रशासन अनधिकृत संरचनाओं को जल्द से जल्द हटाने में रेलवे के अधिकारियों को सहयोग करें। रेलवे की ओर से पेश हुए एडिशनल सॉलिसिटर जनरल केएम नटराज ने पीठ को बताया कि सार्वजनिक परिसर (अनाधिकृत अधिभोगी बेदखल) अधिनियम के तहत रेलवे की संपत्ति पर अतिक्रमण को हटाने का आदेश पारित किया गया है, लेकिन फरीदाबाद की स्थानीय अथॉरिटी के असहयोग के कारण इसके निष्पादन में देरी हो रही है। स्थानीय प्रशासन के सहयोग के बिना हम इस आदेश को पूरा करने में असमर्थ हैं।
विज्ञापन
एएसजी नटराज ने कहा, स्थानीय प्रशासन को ड्यूटी मजिस्ट्रेट नियुक्त कर सहयोग करना चाहिए और पुलिस द्वारा सहायता मिलनी चाहिए, जिससे कि आदेश का अनुपालन किया जा सके। जिसके बाद पीठ ने स्थानीय अथॉरिटी को रेलवे को सहयोग देने का निर्देश दिया। पीठ ने आदेश की प्रति नगर निगम आयुक्त, जिला कलेक्टर एवं पुलिस अधीक्षक, फरीदाबाद को देने का भी निर्देश दिया। सुप्रीम कोर्ट दो अलग-अलग याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है। इनमें से एक गुजरात तो दूसरी हरियाणा में रेलवे की जमीन पर अतिक्रमण से जुड़ी है। हरियाणा मामले की याचिका फरीदाबाद के रेलवे ट्रैक के पास अनधिकृत रूप से बसी झुग्गियों को हटाने से जुड़ी है।
विज्ञापन
रिपोर्ट पर गौर करेगी पीठ
एएसजी नटराज ने पीठ को यह भी बताया कि उन्होंने एक स्थिति रिपोर्ट दाखिल की है जिसमें रेलवे की संपत्ति से अतिक्रमण हटाने में हुई प्रगति और उन मामलों में उठाए गए कदमों के बारे में जानकारी दी गई है। विभिन्न न्यायालयों में ऐसे मामले लंबित है। पीठ ने कहा, हम उस रिपोर्ट को देखना चाहेंगे। 11 अप्रैल को अगली सुनवाई में पीठ रिपोर्ट पर गौर करेगी।