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वीजा होने से भारत में प्रवेश का पूर्ण अधिकार नहीं : हाईकोर्ट
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। हाईकोर्ट ने सोमवार को एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि किसी विदेशी नागरिक के पास वैध वीजा होने का मतलब यह नहीं है कि उसे भारत में प्रवेश का पूर्ण अधिकार मिल जाता है। कोर्ट ने तुर्कमेनिस्तान की एक महिला की याचिका खारिज कर दी, जिसे इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर इमिग्रेशन अधिकारियों ने प्रवेश देने से इन्कार कर दिया था, जबकि उसी उड़ान से आए उसके पति को प्रवेश मिल गया था।
याचिकाकर्ता महिला और उसके पति 25 मार्च 2026 को दिल्ली पहुंचे थे। पति के पास वैध बिजनेस वीजा था, इसलिए उन्हें प्रवेश दे दिया गया। महिला के जवाब संतोषजनक नहीं पाए जाने और गोपनीय इनपुट के आधार पर इमिग्रेशन अधिकारियों ने उन्हें उसी दिन तुर्कमेनिस्तान वापस भेज दिया। महिला ने कोर्ट में याचिका दायर कर दावा किया था कि उनके साथ भेदभाव हुआ और बिना उचित कारण बताए उन्हें वापस भेज दिया गया। न्यायमूर्ति अमित महाजन की पीठ ने याचिका खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि भारत में प्रवेश का अधिकार राज्य का संप्रभु अधिकार है। यह राष्ट्रीय सुरक्षा और सार्वजनिक व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए तय किया जाता है। कोर्ट ने कहा कि वीजा केवल प्रवेश की अनुमति का एक दस्तावेज है, लेकिन इससे प्रवेश का कोई अबाधित अधिकार नहीं बनता।
कोर्ट ने सीलबंद लिफाफे में पेश गोपनीय जानकारी का भी संज्ञान लिया, जिसमें महिला के खिलाफ प्रतिकूल तथ्य सामने आए। जांच में पता चला कि महिला ने 2025 में भारत की 47 बार यात्रा की थी, जिनमें ज्यादातर छोटी अवधि की थीं। उन्होंने खुद को हाउसवाइफ बताया, जबकि बिजनेस वीजा लिया था। उनके जवाबों में विसंगतियां पाई गईं, बिजनेस कार्ड या निमंत्रण पत्र उपलब्ध नहीं था और मोबाइल नंबर भी अवैध पाया गया।
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नई दिल्ली। हाईकोर्ट ने सोमवार को एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि किसी विदेशी नागरिक के पास वैध वीजा होने का मतलब यह नहीं है कि उसे भारत में प्रवेश का पूर्ण अधिकार मिल जाता है। कोर्ट ने तुर्कमेनिस्तान की एक महिला की याचिका खारिज कर दी, जिसे इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर इमिग्रेशन अधिकारियों ने प्रवेश देने से इन्कार कर दिया था, जबकि उसी उड़ान से आए उसके पति को प्रवेश मिल गया था।
याचिकाकर्ता महिला और उसके पति 25 मार्च 2026 को दिल्ली पहुंचे थे। पति के पास वैध बिजनेस वीजा था, इसलिए उन्हें प्रवेश दे दिया गया। महिला के जवाब संतोषजनक नहीं पाए जाने और गोपनीय इनपुट के आधार पर इमिग्रेशन अधिकारियों ने उन्हें उसी दिन तुर्कमेनिस्तान वापस भेज दिया। महिला ने कोर्ट में याचिका दायर कर दावा किया था कि उनके साथ भेदभाव हुआ और बिना उचित कारण बताए उन्हें वापस भेज दिया गया। न्यायमूर्ति अमित महाजन की पीठ ने याचिका खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि भारत में प्रवेश का अधिकार राज्य का संप्रभु अधिकार है। यह राष्ट्रीय सुरक्षा और सार्वजनिक व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए तय किया जाता है। कोर्ट ने कहा कि वीजा केवल प्रवेश की अनुमति का एक दस्तावेज है, लेकिन इससे प्रवेश का कोई अबाधित अधिकार नहीं बनता।
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कोर्ट ने सीलबंद लिफाफे में पेश गोपनीय जानकारी का भी संज्ञान लिया, जिसमें महिला के खिलाफ प्रतिकूल तथ्य सामने आए। जांच में पता चला कि महिला ने 2025 में भारत की 47 बार यात्रा की थी, जिनमें ज्यादातर छोटी अवधि की थीं। उन्होंने खुद को हाउसवाइफ बताया, जबकि बिजनेस वीजा लिया था। उनके जवाबों में विसंगतियां पाई गईं, बिजनेस कार्ड या निमंत्रण पत्र उपलब्ध नहीं था और मोबाइल नंबर भी अवैध पाया गया।
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