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अब कोविंद के आरएसएस ठप्पे से ही बच सकती है विपक्ष की एकजुटता
धीरज कनोजिया, नई दिल्ली
Updated Tue, 20 Jun 2017 01:55 PM IST
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रामनाथ कोविंद और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
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एनडीए के उम्मीदवार रामनाथ कोविंद के रूप में भाजपा के दलित कार्ड के खिलाफ अब कांग्रेस रणनीति बनाने में जुट गई है। कांग्रेस के रणनीतिकारों का कहना है कि पार्टी के पास बस अब विपक्ष की एकजुटता बचाने के लिए कोविंद की आरएसएस पृष्ष्ठभूमि एकमात्र आस है।
कांग्रेस वामदलों के साथ मिलकर इस बात को तूल देने की कोशिश कर सकती है। इसी केसाथ ही पूर्व लोकसभा अध्यक्ष और दलित नेता मीरा कुमार को उम्मीदवार खड़ा करने पर भी विचार चल रहा है। ताकि बसपा को साथ रखा जाये। माकपा महासचिव सीताराम येचुरी ने तो सीधे कह दिया है कि कोविंद आरएसएस के दलित विभाग के सर्वेसर्वा रह चुके है। यह वैचारिक लड़ाई है। मगर विपक्ष का प्रमुख अंग जनता दल युनाइटेड तो कोविंद को संघ का कट्टर कार्यकर्त्ता कहने पर भी खुलकर एतराज कर रहा है। जदयू ने कहा, ‘कोविंद प्रवीण तोगड़िया नहीं हैं।’
जदयू नेता के सी त्यागी ने अमर उजाला को कहा, जदयू के सामने बड़ी असहज स्थिति खड़ी हो गई है, क्योंकि कोविंद ने बिहार के राज्यपाल के तौर पर नीतीश सरकार के साथ बहुत अच्छा रिश्ता बनाकर रखा। दूसरे विपक्षी दल शासित राज्यों में भाजपा के नेताओं ने राज्यपाल बनकर जिस तरह से सरकारों को परेशान किया है। इसके उलट कोविंद ने बेहतर रिश्ते बनाए। हम विपक्ष में एकजुटता भी चाहते है। त्यागी कहते है कि हम 22 जून की बैठक के बाद ही अपने स्टैंड को लेकर अंतिम फैसला लेंगे। कांग्रेस के नेता तृणमूल कांग्रेस और एनसीपी नेताओं से भी कोविंद की आरएसएस पृष्ठभूमि को लेकर बात कर रहे हैं। कोविंद की पृष्ठभूमि को खंगाला जा रहा है। कुछ विवादित मामले और उन पर संघ की विचारधारा के प्रभाव को लेकर तथ्य जुटाए जा रहे हैं।
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कांग्रेस वामदलों के साथ मिलकर इस बात को तूल देने की कोशिश कर सकती है। इसी केसाथ ही पूर्व लोकसभा अध्यक्ष और दलित नेता मीरा कुमार को उम्मीदवार खड़ा करने पर भी विचार चल रहा है। ताकि बसपा को साथ रखा जाये। माकपा महासचिव सीताराम येचुरी ने तो सीधे कह दिया है कि कोविंद आरएसएस के दलित विभाग के सर्वेसर्वा रह चुके है। यह वैचारिक लड़ाई है। मगर विपक्ष का प्रमुख अंग जनता दल युनाइटेड तो कोविंद को संघ का कट्टर कार्यकर्त्ता कहने पर भी खुलकर एतराज कर रहा है। जदयू ने कहा, ‘कोविंद प्रवीण तोगड़िया नहीं हैं।’
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जदयू नेता के सी त्यागी ने अमर उजाला को कहा, जदयू के सामने बड़ी असहज स्थिति खड़ी हो गई है, क्योंकि कोविंद ने बिहार के राज्यपाल के तौर पर नीतीश सरकार के साथ बहुत अच्छा रिश्ता बनाकर रखा। दूसरे विपक्षी दल शासित राज्यों में भाजपा के नेताओं ने राज्यपाल बनकर जिस तरह से सरकारों को परेशान किया है। इसके उलट कोविंद ने बेहतर रिश्ते बनाए। हम विपक्ष में एकजुटता भी चाहते है। त्यागी कहते है कि हम 22 जून की बैठक के बाद ही अपने स्टैंड को लेकर अंतिम फैसला लेंगे। कांग्रेस के नेता तृणमूल कांग्रेस और एनसीपी नेताओं से भी कोविंद की आरएसएस पृष्ठभूमि को लेकर बात कर रहे हैं। कोविंद की पृष्ठभूमि को खंगाला जा रहा है। कुछ विवादित मामले और उन पर संघ की विचारधारा के प्रभाव को लेकर तथ्य जुटाए जा रहे हैं।
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