दम तोड़ रहा खुले में शौच मुक्त अभियान, 1200 घरों में नहीं है शौचालय
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खुले में शौच मुक्त भारत अभियान राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से महज 50 किलोमीटर दूर ही दम तोड़ रहा है। साइबर सिटी के चकाचौंध और हर तरफ गगनचुंबी इमारतों के बीच एक हकीकत यह भी है कि जिले के हर घर में अभी तक शौचालय तक नहीं हैं।
करीब 12000 परिवार खुले में शौच जाते हैं। जिला प्रशासन द्वारा कराए गए इंडीविजुअल हाउस होल्ड लैट्रीन (आईएचएचएल) बेसलाइन सर्वे-2016 में इसका खुलासा हुआ है। खुले में शौच मुक्त प्रदेश के लिए प्रधानमंत्री स्वच्छ भारत मिशन-ग्रामीण के तहत 2015 के अंत में सर्वे शुरू किया गया था।
इसमें पूरे जिले के 61 ग्राम पंचायतों के 11750 गांवों में शौचालय नहीं पाए गए। इनमें सबसे अधिक पटौदी खंड में 5057, फर्रूखनगर में 2458, सोहना खंड में 3296 और गुड़गांव खंड में 939 परिवार हैं। इसमें गरीबी रेखा के नीचे और थोड़े ऊपर दोनों परिवार शामिल हैं। स्वच्छ भारत मिशन-ग्रामीण के तहत प्रोत्साहन राशि देकर ऐसे घरों में शौचालय बनाने का काम शुरू किया गया है। 2017 तक प्रदेश सरकार ने खुले में शौचमुक्त करने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए इस माह से अब ग्राम पंचायतों के बीच प्रतियोगिता भी कराई जा रही है।
13790 परिवारों के पास शौचालय नहीं थे
2012 में हुए आईएचएचएल बेसलाइन सर्वे में 13790 परिवारों के पास शौचालय नहीं थे। इसके लिए तत्कालीन कांग्रेस सरकार में निर्मल भारत अभियान और मनरेगा (महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गांरटी योजना) के तहत बतौर प्रोत्साहन राशि करीब 10000 रुपये दिए जाते थे, लेकिन इसके बाद वर्ष 2016 के सर्वे में 11750 परिवारों को चिह्नित किया गया है।
प्रशासन का मानना है कि इस सर्वे में वह लोग सामने आए है, जो पहले संयुक्त रहते थे, लेकिन अब अलग हो गए। गरीबी और कम आमदनी की वजह से छोटे मकान तो बनवा लिए, लेकिन वहां शौचालय नहीं बना पाए।
अतिरिक्त जिला उपायुक्त विनय प्रताप ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में शौचालय की कमी है। सर्वे के बाद परिवारों को प्रोत्साहन के जरिये वहां शौचालय बनवाए जा रहे हैं। सरकार की ओर से प्रोत्साहन राशि भी दी जा रही है। 2017 तक लक्ष्य पूरा कर लिया जाएगा।
15 फीसदी आबादी के पास नहीं था शौचालय
2011 की जनगणना में गुड़गांव की कुल आबादी के करीब 15 फीसदी घरों में शौचालय की सुविधा नहीं थी। जनगणना में शामिल 320642 घरों में 49473 घरों में शौचालय नहीं थे। इसमें 19214 घर शहरी और 30259 घर ग्रामीण क्षेत्र में थे। हालांकि इस दौरान संपूर्ण स्वच्छ अभियान के तहत शौचालय बनाने के लिए सरकार प्रोत्साहित कर रही थी, लेकिन सफलता नहीं मिलने की वजह से 2012 में निर्मल भारत अभियान की शुरुआत की गई।
सरकार की अब तक की पहल
प्रदेश सरकार ने ग्रामीणों को प्रोत्साहित करने के लिए हर महीने गांवों के बीच स्वच्छता कराने का निर्णय लिया है। अव्वल रहने वाले गांव को एक लाख रुपये इनाम दिया जाएगा। यह पुरस्कार प्रत्येक खंड में एक श्रेष्ठ स्वच्छ एवं हरित ग्राम पंचायत को दिया जाएगा।
पहली प्रतियोगिता इसी माह से शुरू होगी। जुलाई में पुरस्कार जीतने वाली प्रदेश की सभी 126 पंचायतों को स्वतंत्रता दिवस समारोह में सम्मानित किया जाएगा। योजना के अनुसार स्वच्छ व हरित ग्राम पंचायत को 1 लाख रुपये, स्वच्छ खंड को 5 लाख रुपये तथा स्वच्छ व हरित जिला को 20 लाख रुपये दिए जाएंगे।