DU: 57 साल में चमकी सिर्फ तीन की किस्मत
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दिल्ली विश्वविद्यालय में पढ़ने वाले छात्रों के बीच एनएसयूआई और एबीवीपी के पैनल पर छात्र संघ (डूसू) चुनाव लड़ने की होड़ लगी रहती है। इसके अलावा चुनाव मैदान में कूदने में कामयाब होने के बाद वे जीत हासिल करने के लिए पानी की तरह धन खर्च करते है।
यह सब वह दिल्ली व देश की रातनीति में पहुंचने के लिए करते है। मगर डूसू से राजनीतिक सफर शुरू करना अधिकतर छात्र नेताओं के लिए भाग्यशाली नहीं रहा है। डूसू के अभी तक चुने गए 57 अध्यक्षों में से केवल तीन ही संसद में पहुंचे है। वहीं छह विधायक बन पाए और छह ही पार्षद चुने गए। अजय माकन विधायक व सांसद बनने में कामयाब रहे।
दिल्ली विश्वविद्यालय में वर्ष 1954-55 में छात्रसंघ (डूसू) का गठन होने की शुरूआत हुई थी, तब से अभी तक 57 बार डूसू का गठन हो चुका है। आपातकाल के दौरान दो वर्ष डूसू का गठन नहीं हुआ था। इन 57 बार में 21 बार एबीवीपी का उम्मीदवार अध्यक्ष बना, जबकि एनएसयूआई 18 बार ही अध्यक्ष पद पर कब्जा कर सका।
सिर्फ ये नेता रहे हैं लकी
इन दोनों संगठनों के अलावा अन्य डूसू अध्यक्ष रहे केवल 21 छात्र नेताओं को ही पार्षद, विधायक व सांसद का चुनाव लड़ने का मौका मिला और उनमें से केवल 14 ही जीतने में कामयाब रहे। खास बात यह है कि उनमें से चार नेताओं का ही अजय रहने का रिकार्ड है। अन्य 10 नेता जीत के साथ-साथ हार का भी स्वाद चख चुके है।
डूसू के अध्यक्ष बनने वाले अरुण जेटली, अजय माकन व विजय गोयल ही केंद्र की राजनीति तक पहुंच सके। अजय माकन तीन बार विधायक के बनने के दौरान दिल्ली सरकार में मंत्री व विस अध्यक्ष भी रहे। सांसद बनने पर केंद्र में मंत्री भी बने। विजय गोयल भी केंद्र में मंत्री बन चुके है।
बहुत ऐसे डूसू के पूर्व अध्यक्ष है जिनको पार्षद का भी टिकट नहीं मिल पाया है, जबकि वह वर्षों से टिकट मांग रहे है। आठ पूर्व अध्यक्ष चुनाव लड़े तो जरूर मगर डूसू की भांति धमाका नहीं कर सके।
फिलहाल सात ही जनप्रतिनिधि सक्रिय
डूसू अध्यक्ष रहे चुके छात्र नेताओं में आज के समय अरुण जेटली (1974-75) केंद्रीय मंत्री है, जबकि विजय गोयल (1977-78) राजस्थान से राज्यसभा सांसद है। हरीशंकर गुप्ता (1978-79) व अनिल झा (1997-98) विधायक है और आशीष सूद (1988-89), रेखा गुप्ता (1996-97) व अमृता धवन (2006-07) पार्षद है।
डूसू अध्यक्ष रहते हुए पार्षद का भी चुनाव जीता
डूसू में संयुक्त सचिव, उपाध्यक्ष व वर्ष 2001-02 में अध्यक्ष बनी नीतू वर्मा ने वर्ष 2002 में जनप्रतिनिधि के तौर पर शुरूआत कर दी थी। वह डूसू अध्यक्ष पद रहते हुए वर्ष 2002 में पार्षद का चुनाव जीत गई थी। वर्ष 2007 में अमृता धवन यह इतिहास दोहराने से वंचित रह गई थी।
अध्यक्ष न बनने के बावजूद नगर निगम में बड़े पद प्राप्त किए
डूसू उपाध्यक्ष बनने के बाद अध्यक्ष बनने में नाकाम रहे तीन नेता सक्रिय राजनीति में अच्छी कामयाबी हासिल कर गए। भाजपा की आरती मेहरा नगर निगम की दो बार मेयर रही और दो बार विधायक का चुनाव लड़ चुकी है, जबकि प्रदेश भाजपा के पूर्व अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता नगर निगम की स्थायी समिति के दो बार अध्यक्ष रहे। एक सांसद व एक बार विधायक का भी चुनाव लड़ा। प्र्रदेश भाजपा के वर्तमान अध्यक्ष सतीश उपाध्याय दक्षिण दिल्ली नगर निगम की स्थायी समिति के अध्यक्ष है।