पलवली हत्याकांड : महज आठ वोट से जीती थी बिल्लू की पत्नी, इसके बाद से ही बढ़ा विवाद
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राजनीति की चपेट में आए ब्राह्मण बहूल्य पलवली गांव के भाईचारे में खटास पैदा हो गई है। ग्रामीणों को चिंता इस बात की सताने लगी है कि चुनावी रंजिश से शुरू होकर खूनी संघर्ष में बदला यह विवाद आखिर खत्म होगा या नहीं।
घटना के बाद सत्ताधारी नेताओं को लोगों के विरोध का सामना करना पड़ा। बताया जाता है कि गांव की सरपंच दयावती का पति वीरेंद्र उर्फ बिल्लू केंद्रीय राज्यमंत्री कृष्णपाल गुर्जर का खास है।
इसी के चलते पीड़ित परिवार के लोगों में केंद्रीय राज्यमंत्री के प्रति सोमवार को उबाल देखने को मिला। दरअसल, गांव से जुड़े बड़े-बुजुर्ग बताते हैं कि वीरेंद्र उर्फ बिल्लू कई साल पहले दिल्ली से इस गांव में आकर बसा था।
लगातार तीन बार बिल्लू के परिवार के पास ही गांव की सरपंची रही है। डेढ़ साल पहले हुए पलवली, बादशाहपुर और ईदगाह की संयुक्त ग्राम पंचायत के लिए महिला आरक्षित सीट पर बिल्लू ने अपनी पत्नी दयावती को चुनाव लड़ाया था।
गुर्जर का विरोध, विधायकों पर भी भड़ास
हालांकि, गांव के लोग पिछले तीन बार सरपंची पद पर काबिज रह चुके बिल्लू परिवार से खुश नहीं थे, इसलिए इस बार बिजेंद्र शर्मा के परिवार से महिला सदस्य को उनके मुकाबले पर उतारा गया।
हालांकि, महज आठ वोट के अंतर से बिल्लू की पत्नी दयावती चुनाव जीत गई, लेकिन इसके बाद राजनीति की भेंट चढ़े गांव का माहौल बिगड़ता चला गया। दो गुटों में बंटा गांव कई बार सुलगते-सुलगते बचा लेकिन 17 सितंबर की खूनी रात का अंदाजा किसी को न था।
सोमवार को मृतकों के परिजनों को सांत्वना देने पहुंचे केंद्रीय राज्यमंत्री कृष्णपाल गुर्जर पलवली गांव पहुंचे। उन्हे देखते हुए गांव के लोगों ने विरोध शुरू कर दिया। परिजनों ने गुर्जर के विरोध में नारे भी लगाए।
उल्टे पांव लौटे नेता
जिसके चलते उन्हें वापस लौटना पड़ा। इसके बाद शवों के पोस्टमार्टम के दौरान बीके सिविल अस्पताल की मोर्चरी के बाहर गुस्साई भीड़ ने बल्लभगढ़ विधायक मूलचंद शर्मा और पृथला विधायक टेकचंद शर्मा का भी जमकर विरोध दिया।
दोनों विधायक दस मिनट तक गमगीन माहौल में टिके रहे लेकिन जब परिजनों की नजर पड़ी तो इस मामले में राजनीति न करने की हिदायत देते हुए वापस जाने को कहा। लोगों का गुस्सा बढ़ते देख दोनों विधायक लौट गए।
दोपहर को केंद्रीय राज्यमंत्री कृष्णपाल गुर्जर के बेटे एवं वरिष्ठ उप महापौर देवेंद्र चौधरी विधायक सीमा त्रिखा के साथ मोर्चरी पहुंचे लेकिन उन्हें भी परिजनों के विरोध का सामना करना पड़ा। गुस्साई भीड़ चौधरी पर टूटने को तैयार हो गई, पुलिस और गांव के बड़े-बुजुर्गों ने माहौल को शांत कराया। इसके बाद उन्हें भी वापस जाना पड़ा।