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रेप पीड़िताओं के लिए बनाए गए क्राइसिस सेंटर का हाल किसी कबाड़खाने से कम नहीं

Tue, 17 Jan 2017 04:08 PM IST
शाहनवाज आलम/अमर उजाला, गुरुग्राम
शाहनवाज आलम/अमर उजाला, गुरुग्राम Updated Tue, 17 Jan 2017 04:08 PM IST
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one stop crisis center in gurugram like a garbage center
वन स्टॉप क्राइसिस सेंटर, गुरुग्राम - फोटो : अमर उजाला

हरियाणा सरकार छह जिलों में दुष्कर्म और घरेलू हिंसा की शिकार महिलाओं के लिए वन स्टॉप क्राइसिस सेंटर तो खोलने जा रही है पर सरकार का ध्यान गुरुग्राम में बने इस सेंटर की ओर नहीं है जहां की हालत किसी कवाड़खाने से कम नहीं है। 

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सखी योजना’ के तहत गुरुग्राम, फरीदाबाद समेत छह जिलों में  वन स्टॉप क्राइसिस सेंटर’ खोलने की तैयारी कर रही है। लेकिन गुरुग्राम में बने इस ओएससीसी ने दम तोड़ दिया है। नागरिक अस्पताल के ग्राउंड फ्लोर पर बने इस सेंटर को कचरा और कबाड़ रखने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है।
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बलात्कार व घरेलू हिंसा के शिकार महिलाओं के लिए यहां कोई खास बंदोबस्त नहीं है। इस पर न तो जिला प्रशासन ने कभी ध्यान दिया और न ही महिला एवं बाल विकास विभाग ने। स्वास्थ्य विभाग के आंगन में होने के बावजूद इस पर कोई कदम नहीं उठाया गया। अधिकारियों की मानें तो योजना के साथ इसके बजट पर खास ध्यान नहीं दिया गया। इसके लिए अलग से स्टाफ तैनात करने की योजना थी। जिसका इंतजाम अब तक नहीं हुआ।   

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​अलग से नहीं है कोई स्टाफ 

one stop crisis center in gurugram like a garbage center
वन स्टॉप क्राइसिस सेंटर, गुरुग्राम - फोटो : अमर उजाला
बता दें कि 2012 में दिल्ली में हुए निर्भया कांड के बाद केंद्र सरकार ने जिले में बलात्कार पीड़ित महिलाओं की सुरक्षा और उनके समग्र विकास के लिए ओएससीसी बनवाया था। इसका मकसद एक ही छत के नीचे पीड़ित महिलाओं को आर्थिक, सामाजिक, स्वास्थ्यगत, वैधानिक, पुनर्वास, कामकाज के साथ ही मानसिक सपोर्ट आदि की सुविधा देना था। 


यह केवल कागजों में ही सिमट कर रह गई है। अब फिर से मौजूदा सरकार के महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा इस तरह की योजना तैयार की गई है। -नियम के मुताबिक सेंटर में एक पुलिस अधिकारी, दो चिकित्सक, स्टाफ नर्स, मनोचिकित्सक की तैनाती करने का नियम है। सेंटर पर बलात्कार समेत घरेलू हिंसा की शिकायत दर्ज कराई जा सकती है।

 

किसी भी मामले में महिलाओं को तुरंत पुलिस, मेडिकल और मानसिक सहायता मुहैया कराए जाने का प्रावधान है, लेकिन यहां अब कुछ नहीं होता है। यह सेंटर स्थापित होने से लेकर अब तक कोई स्टाफ नियुक्त नहीं किया गया। रात में आने वाली बलात्कार पीड़ित को काउंसलिंग तक नहीं मिल पाती है। ऐसे में अन्य सुविधाओं की बात के बारे मेें सोचना भी बेमानी है। 

एक कोने में रखकर पीड़िताओं का होता है इलाज

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वन स्टॉप क्राइसिस सेंटर, गुरुग्राम - फोटो : अमर उजाला

गायनी वार्ड को वर्ष 2015 में ग्राउंड फ्लोर से पहले तल पर शिफ्ट कर दिया गया, लेकिन सेंटर को शिफ्ट नहीं किया गया। केवल एक कोने में रखकर पीड़ितों का केवल मेडिकल कराया जाता है। जबकि काउंसलिंग, कानूनी सलाह व अस्थायी आवासीय सहायता नहीं मिलती है।


विभाग द्वारा स्टाफ की कमी होने के चलते सेंटर को बंद किए जाने का रोना रोया जा रहा है। एक अधिकारी ने बताया कि सेंटर के लिए अलग से काउंसलर नियुक्त किया जाना है, लेकिन बजट के अभाव में काउंसलर नियुक्त नहीं किया जा रहा है।

डॉ. कांता गोयल, प्रधान चिकित्सा अधिकारी, नागरिक अस्पताल: अस्पताल के पास स्टाफ की कमी है। इसे ऊपर शिफ्ट किया गया है। नीचे की तरह अलग से कोई व्यवस्था नहीं है, लेकिन हमारी प्राथमिकता पीड़ित को इलाज देना है। 

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