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ये सर्वे देख आ जाएगा AK विरोधियों को पसीना

Sat, 14 Mar 2015 03:59 PM IST
Updated Sat, 14 Mar 2015 03:59 PM IST
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one month of kejriwal govt

आम आदमी पार्टी ने शुक्रवार को एक महीने पूरे कर लिए। इस दौरान आप सरकार ने शुरुआती एक माह में बिजली बिल आधा और पानी माफ का नारा पूरा किया। लेकिन इसके बाद जनता को सीधे राहत देने वाला कोई बड़ा फैसला नहीं किया। बल्कि महीना का पूरा होते-होते आप जबर्दस्त अंदरूनी कलह से गुजरने लगी है।

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हाल में आए कुछ ऑडियो टेपों ने और हलचल बढ़ा दी है, लेकिन क्या इन सबसे दिल्ली के मुख्मंत्री और आप मुखिया अरविंद केजरीवाल की लोकप्रियता पर कोई असर पड़ रहा है? तो इसका जबाव है कि बिल्कुल नहीं।
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यह जवाब एबीपी न्यूज़-नीलसन के एक ताजा सर्वे में सामने आई है। सर्वे के मुताबिक बहुमत से ज्यादा 60 फीसदी जनता की राय है कि अरविंद केजरीवाल दिल्ली के सबसे लोकप्रिय नेता हैं।

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कैसा है आप सरकार का कामकाज?

one month of kejriwal govt

सर्वे के मुताबिक 49 फीसदी का मानना है कि बीते एक महीने में केजरीवाल सरकार का कामकाज बढ़िया रहा है। खास बात ये है कि मुसलमानों और झुग्गी झोपडियों में रहने वाले लोग केजरीवाल सरकार के कामकाज से ज्यादा खुश हैं। 9 फीसदी जनता की राय में केजरीवाल सरकार का कामकाज खराब रहा है, वही 40 फीसदी औसत बता रहे हैं।

इसी क्रम में विधानसभा चुनाव के दौरान किए गए वायदों को लेकर जब जनता से सवाल पूछा गया, तो 63 फीसदी लोगों को भरोसा है कि अरविंद केजरीवाल ने चुनावों के दौरान जो वादा किया है उसे पूरा करने में कामयाब रहेंगे। वही, 28 फीसदी को केजरीवाल के वादे पर यकीन नहीं है।

उधर, 48 फीसदी जनता यह भी मानती है कि केजरीवाल ने जो वादे किए हैं, उसे इस एक महीने में पूरा किया है। एबीपी न्यूज़ नीलसन का ये सर्वे 10 और 11 मार्च के बीच किया गया। इसमें दिल्ली के 30 इलाकों के उन 1258 लोगों मतदाताओं को शामिल किया गया।

योगेंद्र-प्रशांत तनातनी से पार्टी को नुकसान होगा?

one month of kejriwal govt

इस सर्वे में जो सबसे महत्वपूर्ण बात सामने आई है, वो ये कि योगेंद्र यादव-प्रशांत भूषण की पीएसी से विदाई के बाद शुरू हुए अंदरूनी कलह से आप को नुकसान होगा। सर्वे में 52 फीसदी लोगों का मानना था कि पार्टी के भीतर आए तूफान से परेशनी बढ़ेगी।

हालांकि 34 फीसदी लोगों का यह भी मानना है कि इससे आप को नुकसान नहीं होगा। 14 फीसदी जनता की इस मुद्दे पर कोई राय नहीं है।

मामले में जब यह जानने की कोशिश की गई कि क्या योगेंद्र यादव और प्रशांत भूषण की छुट्टी के पीछे अरविंद केजरीवाल हैं तो 44 फीसदी लोगों ने इसे सिरे से खारिज कर दिया। हालांकि 43 फीसदी लोगों को ऐसा लगता कि इसके पीछे केजरीवाल का हाथ है।

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