Delhi: 36 में से एक बच्चा है ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर से पीड़ित, 12 से 18 माह के उम्र में हो सकता है निदान
डॉक्टरों की माने तो एएसडी का निदान 12-18 महीने की उम्र में ही हो सकता है। 2022-2023 के सीडीसी सांख्यिकीय डेटा बताते हैं कि 36 में से एक बच्चे में यह समस्या पाई जाती है। एएसडी सभी बच्चों में एक जैसी नहीं होती।
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बच्चों में होने वाले ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर (एएसडी) को दूर किया जा सकता है। यदि समय पर उनका उपचार किया जाए और इसे लेकर जागरूकता हो तो समस्या आसानी से पकड़ में आ सकती है। इस विषय को लेकर एम्स के चाइल्ड न्यूरोलॉजी डिविजन ने मंगलवार को एक चर्चा रखी है। इसमें डिविजन की प्रमुख प्रोफेसर डॉ. शेफाली गुलाटी व अन्य ऑटिज्म से पीड़ित बच्चों के संबंध में अपनी बात रखेंगे।
डॉक्टरों की माने तो एएसडी का निदान 12-18 महीने की उम्र में ही हो सकता है। 2022-2023 के सीडीसी सांख्यिकीय डेटा बताते हैं कि 36 में से एक बच्चे में यह समस्या पाई जाती है। एएसडी सभी बच्चों में एक जैसी नहीं होती। एम्स के चाइल्ड न्यूरोलॉजी डिवीजन में हर साल 1800 से अधिक मामले आते हैं। इनमें से करीब 80 फीसदी बच्चों में एक से अधिक समस्याएं होती हैं।
एएसडी वाले बच्चों और उनकी देखभाल करने वालों के साथ-साथ भाई-बहनों के जीवन की गुणवत्ता आम तौर पर विकासशील बच्चों की तुलना में खराब होती है। इनमें भी ऑटिज्म की गंभीरता देखी जा सकती है। ऐसे बच्चों के देखभाल को बेहतर बनाने व उनके जीवन स्तर को सुधारने के लिए मंगलवार को एम्स में चर्चा की जाएगी। इस दौरान विशेषज्ञ इस गंभीर बीमारी के लक्षण, उपचार आदि विषयों पर अपने विचार प्रस्तुत करेंगे।