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एक लाश ने खोल दी यूपी पुलिस की पोल

Sat, 19 Jul 2014 11:47 AM IST
Updated Sat, 19 Jul 2014 11:47 AM IST
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One handed corpse have ten fingers, UP police said

गाजियाबाद पुलिस ने एक हाथ वाले व्यक्ति की दसों अंगुलियों के निशान ले डाले। पुलिस ने हत्या के एक मामले में दोषी करार दिए गए राजबीर उर्फ छंगा के शव के दोनों हाथों के फिंगर प्रिंट लेकर उसकी पहचान भी करा दी।

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मामले में तीन कांस्टेबलों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू कर दी गई है। इनमें से एक को निलंबित कर दिया गया है। गाजियाबाद व दिल्ली पुलिस ने शुक्रवार को हाईकोर्ट को यह जानकारी दी है।
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न्यायमूर्ति कैलाश गंभीर व न्यायमूर्ति सुनीता गुप्ता की खंडपीठ ने कहा कि जब तक यह पूरी तरह से सुनिश्चित नहीं हो जाता शव राजबीर का ही था उसके खिलाफ मामले को बंद नहीं किया जा सकता।

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अदालत ने जाताया संदेह‌

One handed corpse have ten fingers, UP police said

अदालत ने एक बार फिर गिरफ्तारी वारंट जारी कर दिल्ली और गाजियाबाद पुलिस को उसे ढूंढने का प्रयास जारी रखने का निर्देश दिया है। इतना ही नहीं अदालत ने लखनऊ स्थित फोरेंसिक लैब के निदेशक को राजबीर व उसके परिवार से संबंधित डीएनए रिपोर्ट दो माह में पुलिस को सौंपने को कहा है।

खंडपीठ ने अदालत में उपस्थित गाजियाबाद के एसएसपी को निर्देश दिया कि वह दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई रिपोर्ट पेश करने के साथ राजबीर को भी ढूंढने के हर संभव प्रयास करें। मामले की सुनवाई 10 अक्तूबर को होगी।

वहीं दिल्ली पुलिस ने रिपोर्ट पेश करते हुए कहा कि बरामद शव काफी खराब हालत में था। परिवार ने कपड़ों के आधार पर शव की पहचान की थी। शव का बायां हाथ कटा हुआ था। जबकि गाजियाबाद पुलिस के कांस्टेबल पप्पू सिंह ने शव के जो फिंगर प्रिंट लिए वह सभी दस अंगुलियों के थे। जो संभव नहीं है।

संबंधित पुलिसवाला सस्पेंड

One handed corpse have ten fingers, UP police said

गाजियाबाद पुलिस ने अब माना है कि जिस शव के फिंगर प्रिंट लिए गए थे वह किसी और का था। मामले की जांच के बाद पप्पू सिंह को निलंबित कर दिया गया है।

जबकि कांस्टेबल रणजीत सिंह और विपिन कुमार के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जा रही है। इसके अलावा शव की पहचान के लिए राजबीर के परिवार के सदस्यों के ब्लड सैंपल को जांच के लिए लखनऊ फोरेंसिक लैब में भेजा गया है।

अहम बात यह है कि पूरे मामले में परिवार के सदस्य अभी भी इसी बात पर अड़े है कि गंगनहर से बरामद शव राजबीर का था।

क्या था मामला?

One handed corpse have ten fingers, UP police said

सीलमपुर में एक हत्या के मामले में राजबीर को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी। घोंडा निवासी राजबीर ने फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी। अदालत ने अपील के निपटारे तक उसे जमानत प्रदान कर दी।

हाईकोर्ट में जब अपील पर सुनवाई तय हुई तो राजबीर व उनका वकील पेश नहीं हुआ। अदालत ने उसके नाम वारंट जारी कर दिया। गाजियाबाद पुलिस ने वारंट पर अपनी रिपोर्ट में कहा कि 10 नवंबर 2013 को गंगनहर से एक शव मिला था।

राजबीर के परिवार के सदस्यों ने उसके कपड़ों से पहचान की थी। ऐसे में अपील पर सुनवाई बंद कर दी जाए। अदालत ने पूरे मामले पर संदेह जाहिर करते हुए जांच का आदेश जारी किए थे।

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