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नीरज के इशारे पर दोनों कैदियों के कुचल डाले थे सिर

Wed, 26 Aug 2015 12:39 PM IST
Updated Wed, 26 Aug 2015 12:39 PM IST
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on the Neeraj's gesture, crushing head of both prisoners

रोहिणी अदालत से तिहाड़ जेल जा रही कैदियों की वैन में गैंगवार हो गई। नीरज बवानिया व उसके गिरोह के सदस्यों ने नीतू दाबोदा गिरोह के दो बदमाशों पारस उर्फ गोल्डी और प्रदीप उर्फ भोला की पीट-पीट कर हत्या कर दी।

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इस दौरान नीरज बवानिया सहित तीन कैदी घायल हो गए। उन्हें भगवान महावीर अस्पताल में भर्ती कराया गया। बाहरी दिल्ली के पुलिस उपायुक्त विक्रमजीत सिंह ने बताया कि मंगलवार को तिहाड़ जेल से दोनों गैंग के सदस्यों को पेश करने के लिए रोहिणी कोर्ट लाया गया था।

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इसमें नीरज बवानिया गैंग के नीरज के अलावा छह सदस्य नवीन उर्फ बाली, भांजा, राहुल उर्फ काला, सुनील, दिनेश और सन्नी शामिल था। वहीं, नीतू दाबोदा गिरोह का पारस उर्फ गोल्डी और प्रदीप उर्फ भोला भी वैन में थे।
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लात-घूंसों से मारा और फिर उनके सिर पर कूदने लगे।

on the Neeraj's gesture, crushing head of both prisoners

पेशी के बाद करीब 4:30 बजे कुल नौ कैदियों को लेकर वैन रवाना हुई। कुछ दूर चलने के बाद नीरज के इशारे पर उसके सभी सहयोगियों ने पारस और प्रदीप के गले में गमछा लपेट कर दोनों को नीचे गिराया और पहले लात-घूंसों से मारा और फिर उनके सिर पर कूदने लगे।

इससे दोनों के सिर बुरी तरह से कुचल गए। पारस की एक आंख तक अंदर घुस गई। वैन में कैदियों की मारपीट देखकर चालक ने वैन सीधी भगवान महावीर अस्पताल की ओर मोड़ी और जानकारी आला अधिकारियों को दे दी।

अस्पताल में डॉक्टरों ने दोनों को मृत घोषित कर दिया। वहीं, मारपीट में जख्मी हुए नीरज बवाना सहित तीन कैदियों का प्राथमिक इलाज कर फिट करार दे दिया।

पहले भी दोनों गैंग के सदस्य एक साथ जा चुके थे अदालत

on the Neeraj's gesture, crushing head of both prisoners

पुलिस ने दोनों मृत कैदियों के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। मंगोलपुरी थाना में इस बाबत मामला दर्ज कर लिया गया। सभी आरोपियों को बुधवार को अदालत में पेश किया जाएगा।

पुलिस सूत्रों का कहना है कि गत 10 और 11 अगस्त को दोनों गैंग के सदस्य एक ही वैन में रोहिणी अदालत पहुंचे थे।

उस दिन इस तरह की घटना नहीं होने के पीछे पुलिस का तर्क है कि 10 और 11 अगस्त को नीरज बवाना अपने गैंग के साथ नहीं था। बल्कि वह अकेला था और उसके साथ पारस और प्रदीप थे।

चालक ने डर की वजह से रास्ते में रोकी वैन

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पुलिस सूत्रों का कहना है कि जब वैन पीतमपुरा के वेस्ट एन्क्लेव के पास पहुंची। इसी दौरान मारपीट शुरू हो गई। सभी कैदी काफी शोर मचा रहे थे और दोनों कैदियों को बेरहमी से पीट रहे थे।

चालक ने डर की वजह से वैन को वहीं रोक दिया और 100 नंबर पर पुलिस को घटना की जानकारी दी। वैन के रुकने और उसमें मारपीट होती देख वहां काफी लोग जमा हो गए। जिस तरह से दोनों कैदियों की पिटाई हो रही थी, लोगों ने पुलिसकर्मियों को कुछ करने के लिए कहा।

लेकिन पुलिसकर्मियों ने अपने हाथ खड़े कर दिए और बताया कि वह कुछ भी नहीं कर सकते। अगर वह ऐसी हालत में गेट खोलते हैं तो सभी कैदी फरार हो जाएंगे। पुलिस को पहुंचने में देर होती देख चालक ने वैन को अस्पताल की ओर मोड़ दिया।

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