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उपहार अग्निकांड : ‘अपनों’ के लिए फिर बरसे आंसू, पीड़ितों ने न्याय पालिका के रवैये पर जताई निराशा
Fri, 14 Jun 2019 01:40 AM IST
Vikas Kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Vikas Kumar
Updated Fri, 14 Jun 2019 01:40 AM IST
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उपहार अग्निकांड की 22वीं बरसी
- फोटो : फाइल फोटो
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उपहार अग्निकांड की 22वीं बरसी पर एक बार फिर मृतकों के परिजनों और शुभचिंतकों की आंखें नम हो गईं। उन्होंने दिवंगत आत्माओं की शांति के लिए प्रार्थना की। साथ ही, न्याय पालिका के रवैये पर निराशा भी जताई। ग्रीन पार्क एक्सटेंशन स्थित स्मृति उपवन में प्रात: 9 बजे लोग एकत्रित हुए और उन्होंने पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। इस मौके पर नीलम कृष्णामूर्ति की अंग्रेजी पुस्तक ‘ट्रायल बाई फायर’ के हिंदी अनुवाद ‘अग्निपरीक्षा : न्याय की लड़ाई जारी है’ का भी विमोचन किया गया।
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हिंदी फिल्म ‘बॉर्डर’ के शो के दौरान 13 जून 1997 को उपहार सिनेमा में आग लग गई थी। इस हादसे में धुएं से दम घुटने के कारण 59 लोगों की जान चली गई थी और 100 से अधिक जख्मी हो गए थे। इस हादसे में नीलम कृष्णामूर्ति के बेटे व बेटी की भी जान चली गई थी। उपहार दुर्घटना पीड़ित एसोसिएशन की अध्यक्ष नीलम कृष्णमूर्ति व अन्य ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि दो दशक बीतने के बावजूद पूर्ण न्याय नहीं मिला।
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सर्वोच्च न्यायालय ने हाल ही में 40 वर्ष पुराने एक मामले में 90 वर्षीय वृद्ध को आजीवन कारावास की सजा सुनाते हुए तर्क रखा है कि इंसाफ के लिए जरूरी है। यह दुर्भाग्य है कि 59 लोगों की जान लेने वाले गोपाल अंसल को मात्र एक वर्ष की कैद दी। वहीं, 76 वर्षीय सुशील असंल जब गोल्फ खेलने के लिए फिट हैं, वह अपनी व्यावसायिक गतिविधियों को जारी रख सकता है और विदेशों में आवागमन कर सकता है तो फिर उसे आयु के आधार पर छूट क्यों? उन्होंने कहा कि साबित हो गया कि कानून बनाने वालों से कानून तोड़ने वाले आगे हैं। न्यायपालिका को इसे समझना चाहिए।
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