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दशहरे पर एक तरफ जलेगा रावण दूसरी ओर स्थापित होगी लंकेश की मूर्ति

Thu, 18 Aug 2016 02:28 PM IST
आशुतोष दुबे/अमर उजाला, नोएडा
आशुतोष दुबे/अमर उजाला, नोएडा Updated Thu, 18 Aug 2016 02:28 PM IST
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On side Ravana will be brunt and on other hand the statue would stablish
रावण का मंदिर - फोटो : अमर उजाला

दशहरे पर जहां शहर में रावण का दहन किया जाएगा। वहीं दूसरी ओर बिसरख गांव में रावण की प्रतिमा स्थापित की जाएगी। यह वही मंदिर है, जहां बीते दिनों कई हिंदू संगठन व महंतों ने प्रतिमा लगाने का विरोध करने के साथ रावण की मूर्ति तोड़ डाली थी। 

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फिलहाल खंडित रावण की मूर्ति को मंदिर से हटा दिया गया। दो माह में रावण की नई प्रतिमा बनकर तैयार हो जाएगी। इसके लिए पांच लाख रुपये खर्च किए जाएंगे। हालांकि, अभी भी एक पक्ष मंदिर में प्रतिमा की स्थापना के विरोध में है। लिहाजा, पुलिस की निगरानी में स्थापना की क्रिया को अमलीजामा पहनाया जाएगा।
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मंदिर में रावण की जो प्रतिमा स्थापित की जाएगी। वह दशकों पुरानी तो नहीं, लेकिन जयपुर के कलाकार मूर्ति को नया आयाम देंगे। मूर्ति दशहरे से ठीक पहले गांव पहुंच जाएगी।
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इसके निर्माण में जो भी खर्च आएगा, वह ग्रामीण उठाएंगे। मंदिर के संस्थापक अशोकानंद महाराज ने बताया कि मंदिर बिसरख गांव के लोगों के लिए आस्था का प्रतीक है।

जानिए क्या था पूरा मामला

On side Ravana will be brunt and on other hand the statue would stablish
रावण का मंदिर - फोटो : अमर उजाला

लिहाजा यहां प्रतिमा का विराजमान होना बेहद जरूरी है। बताया जा रहा है कि मूर्ति की स्थापना से पहले गांव में पंचायत आयोजित की जाएगी। इसमें सर्वसम्मति से दिन व समय तय किए जाएंगे। 

क्या था पूरा मामला
कुछ संगठनों ने 9 अगस्त को बिसरख धाम (रावण के मंदिर) में जमकर उत्पात मचाया था। स्थापना से दो दिन पहले एक दशक पुरानी रावण की प्रतिमा को खंडित कर दिया। 

आरोप है कि मंदिर में लगी दशकों पुरानी प्राचीन मूर्तियों को भी तोड़ दिया। करीब 30 से 40 लोग बंदूक व लाठी डंडे लेकर मंदिर पहुंचे थे, जिन्होंने यहां तोड़फोड़ की। इस मामले में बिसरख थाने में 30 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज है। इसकी जांच की जा रही है। 

जूना अखाड़ा व महंत का विरोध अब भी जारी
गाजियाबाद के ऐतिहासिक दूधेश्वरनाथ मठ में जूना अखाड़ा के अंतरराष्ट्रीय मंत्री महंत नारायण गिरी महाराज, कालिका मंदिर दिल्ली के महंत सुरेंद्रनाथ अवधूत और प्राचीन देवी मंदिर डासना के महंत यति बाबा नरसिंहानन्द सरस्वती महाराज केसाथ अब भी कई लोग मंदिर में रावण की प्रतिमा के स्थापना के विरोध में है। लिहाजा पुलिस के साये में मंदिर में मूर्ति की स्थापना की जाएगी। संगठनों ने चेतावनी दे रखी है कि बुराई के प्रतीक रावण की मूर्ति को किसी भी हालत में स्थापित नहीं होने दिया जाएगा।

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