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मौत के साए में काम कर रहे इस सरकारी दफ्तर के कर्मचारी, प्रशासन है इससे अनजान
ब्यूरो/अमर उजाला, गुरुग्राम(मेवात)
Updated Tue, 27 Dec 2016 05:15 PM IST
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सचिवालय में लगा मधुमक्खी का छत्ता
- फोटो : अमर उजाला
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ओह, ये कैसा सचिवालय है। यहां लोगों की संख्या चाहें जितनी रही हो, पर मधुमक्खियों की संख्या अनगिनत है। दरवाजा खोलते ही कर्मचारी तो बाद में अंदर आते हैं, मधुमक्खियां पहले ही एंट्री मार लेती हैं।
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जी हां। ये सच है। ये है नूंह जिला मुख्यालय स्थित लघु सचिवालय का हाल। विभाग ध्यान नहीं दे रहा और लोग परेशानी झेल रहे हैं। लोगों को डर है कि कहीं मधुमक्खी के गुस्से का शिकार हुए तो सीधे अस्पताल का रास्ता अख्तियार करना पड़ेगा। ये बेहद खतरनाक किस्म की हैं।
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ताज्जुब इस बात का है कि कई बार शिकायत करने के बाद कोई कार्रवाई नहीं हुई। सचिवालय में जहां एक छत्ता लगा था, वहीं अब ढेरों की संख्या में लग गए चुके हैं। लोग अब ऑफिस के दरवाजे खिड़की खोलने से भी डरने लगे हैं।
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इनके काटने से मौत भी हो जाती है
file photo
बता दें कि लघु सचिवालय के बीच में पार्क बना हुआ है। इस पार्क के साथ लघु सचिवालय की अंदर वाली दीवारों पर ये छत्ते लटके हुए है, जो काफी नीचे भी है। सिर बचा के न चले तो छत्ता सीधे सिर से टकराएगा और मधुमक्खियां हमला कर सकती हैं।
मौत भी हो जाती है
नूंह सामुदायिक अस्पताल के एसएमओ डा. गोविंदशरण का कहना है कि यह मधुमक्खी बेहद खतरनाक होती हैं। इसके काटते ही व्यक्ति को रिएक्शन होता है, जिसका अस्पताल से पहले इलाज नहीं हो पाता और यदि ज्यादा संख्या में ये मधुमक्खियां किसी को काट लें तथा समय पर प्राथमिक उपचार न मिले तो व्यक्ति मर भी सकता है।
मामला संज्ञान में नहीं था
वास्तव में यह काफी खतरनाक हो सकता है। एक-दो दिन में संबंधित विभाग को आदेश देकर इस दिशा में कार्यवाई कराई जाएगी और छत्तों को सुरक्षित तरीके से हटवाया जाएगा, ताकि किसी को नुकसान न पहुंचे। साथ ही भविष्य में फिर से ये छत्ते यहां न लगे, इसके विकल्प भी तलाशे जाएंगे। -प्रदीप अहलावत, जिला नगराधीश, मेवात।
मौत भी हो जाती है
नूंह सामुदायिक अस्पताल के एसएमओ डा. गोविंदशरण का कहना है कि यह मधुमक्खी बेहद खतरनाक होती हैं। इसके काटते ही व्यक्ति को रिएक्शन होता है, जिसका अस्पताल से पहले इलाज नहीं हो पाता और यदि ज्यादा संख्या में ये मधुमक्खियां किसी को काट लें तथा समय पर प्राथमिक उपचार न मिले तो व्यक्ति मर भी सकता है।
मामला संज्ञान में नहीं था
वास्तव में यह काफी खतरनाक हो सकता है। एक-दो दिन में संबंधित विभाग को आदेश देकर इस दिशा में कार्यवाई कराई जाएगी और छत्तों को सुरक्षित तरीके से हटवाया जाएगा, ताकि किसी को नुकसान न पहुंचे। साथ ही भविष्य में फिर से ये छत्ते यहां न लगे, इसके विकल्प भी तलाशे जाएंगे। -प्रदीप अहलावत, जिला नगराधीश, मेवात।