कई महीनों से काम मांगने के लिए दर-दर भटक रहा है अधिकारी
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देश के करीब-करीब सभी महकमों में कर्मचारियों और अधिकारियों की कमी है जिसकी वजह से उन पर काम का अतिरिक्त दबाव होता है।
वहीं भारत सरकार का एक अधिकारी पिछले कई महीनों से काम मांगने के लिए दर-दर भटक रहा है लेकिन उन्हें काम नहीं मिल रहा है।
एम्स के पूर्व सीवीओ संजीव चतुर्वेदी ने काम के लिए कैबिनेट सचिव को पत्र लिखा है। इससे पहले संजीव काम मांगने के लिए एम्स निदेशक, स्वास्थ्य मंत्रालय और सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल (कैट) के दरवाजे खटखटा चुके हैं।
अपमानजनक स्थिति है कि मेरे पास कोई काम नहीं है
संजीव ने कैबिनेट सचिव से व्यक्तिगत तौर पर मिलने का भी समय मांगा है। एम्स के पूर्व सीवीओ और उत्तराखंड कैडर के आईएफएस अधिकारी संजीव चतुर्वेदी ने भारत सकार के कैबिनेट सचिव पीके सिन्हा को लिखे पत्र में कहा है कि ‘यह बहुत ही अपमानजनक स्थिति है कि मेरे पास कोई काम नहीं है और मुझे सरकार हर माह एक लाख रुपये से अधिक बतौर वेतन दे रही है।’
उन्होंने कहा कि मुझसे सभी काम छीनकर न सिर्फ सरकार को आर्थिक नुकसान पहुंचाया जा रहा है बल्कि मानव संसाधनों का भी दुरुपयोग किया जा रहा है जबकि देश की दो तिहाई आबादी अपने वजूद की लड़ाई लड़ रही है।
संजीव ने अपने पत्र में लिखा है कि काम के लिए लगातार केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव को लिखा और उनसे मिला भी लेकिन इस संबंध में उन्हें कोई सफलता नहीं मिली।
हर माह बतौर वेतन मिल रहा एक लाख रुपये से अधिक
राजनीतिक दबाव की वजह से केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव भी असहाय महसूस कर रहे हैं, जबकि उन्हें अपने ही मंत्रालय के आदेश का पालन कराना है। पत्र में कैबिनेट सचिव से आग्रह किया गया है कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय को निर्देश दिया जाए कि सरकार की ओर से एम्स के डिप्टी सेक्रेट्री के लिए जो काम आवंटित किया गया था वह दिया जाए।
पत्र में यह भी मांग की गई है कि इस पूरे मामले में नियम-कानून को ताक पर रख कर मुझे परेशान करने वाले स्वास्थ्य मंत्रालय के पूर्व सचिव लव वर्मा, एम्स के पूर्व डीडीए विनीत चौधरी और एम्स के निदेशक डॉ. एमसी मिश्रा के खिलाफ शीघ्र कार्रवाई की जाए।
मालूम हो कि एम्स में जब संजीव को डिप्टी सेक्रेट्री का पद दिया गया था उस समय उन्हें एम्स में भ्रष्टाचार पर रोक लगाने के सीवीओ का भी काम दिया गया था। लेकिन 14 अगस्त 2014 को उनसे पहले सीवीओ का काम लिया गया, इसके बाद धीरे-धीरे उन्हें आवंटित सभी काम ले लिए गए। जबकि उन पर किसी तरह का न तो आरोप है और न ही किसी ने इस अधिकारी की शिकायत की है।