'बच्चे 7 बजे स्कूल जा सकते हैं तो ग्रेजुएट क्यों नहीं?'
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नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने मंगलवार को राष्ट्रीय राजधानी में पीक ऑवर्स में वाहनों से होने वाले प्रदूषण में कमी लाने के लिए सरकारी और निजी क्षेत्र के ऑफिसों के खुलने के समय में बदलाव करने का सुझाव दिया है।
साथ ही इस सुझाव पर केंद्र सरकार से सभी स्टेकहोल्डरों के साथ विचार-विमर्श करने को भी कहा है। एनजीटी चेयरपर्सन स्वतंत्र कुमार की अध्यक्षता वाली पीठ ने केंद्र से प्रदूषण स्तर पर अंकुश लगाने के लिए नए सुझावों को अपनाने और पहले के निर्देशों के अनुपालन पर स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने को कहा।
पीठ ने कहा कि वर्किंग ऑवर्स में बदलाव प्रदूषण पर अंकुश लगाने का एक समाधान हो सकता है। दिल्ली में अदालतें और सरकारी कार्यालय सुबह 10 बजे खुलते हैं और यदि इनके खुलने के वक्त में एक या दो घंटों का अंतर कर दिया जाए तो इससे वाहनों से होने उत्सर्जन में कमी लाने में काफी मदद मिलेगी।
मेट्रो पर भी कम होगा भीड़ का दबाव
साथ ही पीक ऑवर्स के दौरान बसों, ऑटो और मेट्रो पर भीड़ का दबाव भी कम होगा। यहां तक व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के वर्किंग ऑवर्स को भी विनियमित किया जा सकता है।
ट्रिब्यूनल ने केंद्र सरकार से उसके सुझाव पर सभी स्टेकहोल्डरों के साथ विचार-विमर्श करने को कहा है। एनजीटी ने कहा कि सभी को साथ लाने और नए सुझाव के साथ सामने आने की जरूरत है।
पीठ ने कहा कि आप (केंद्र) विश्वविद्यालयों को आपने साथ ले सकते हैं। यदि बच्चे सुबह 7 बजे स्कूल जा सकते हैं तो ग्रेजुएट छात्र क्यों नहीं।
कारों की बिक्री तेजी से बढ़ी
सुनवाई के दौरान एडिशनल सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) पिंकी आनंद ने कहा कि वायु प्रदूषण को कम करने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं और ट्रिब्यूनल के आदेश के अनुपालन में काम होना शुरू हो गया है।
आनंद ने कहा कि मौजूदा कानून पर्याप्त हैं लेकिन हमें इन्हें प्रभावी तरीके से लागू करने की जरूरत है। इस पर पीठ ने एक रिपोर्ट का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्ष 2000 में डीजल कारों की बिक्री मात्र 4 फीसदी थी।
लेकिन वर्ष 2014 में यह आंकड़ा 60 फीसदी हो गया और मल्टी पर्पज यूटिलिटी व्हीकल की संख्या में भी 60 फीसदी से अधिक की बढ़ोतरी हुई है।