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Delhi NCR News: नीट यूजी परीक्षा रद्द होने पर एनएसयूआई का प्रदर्शन
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एबीवीपी ने निष्पक्ष जांच और कड़ी कार्रवाई की मांग की
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। मेडिकल संस्थानों में दाखिले के लिए होने वाली नीट परीक्षा को लेकर विवाद गहरा गया है। पेपर लीक होने के आरोपों के बाद परीक्षा को रद्द कर दिया गया है। इसको लेकर एनएसयूआई ने मंगलवार को शिक्षा मंत्रालय के पास प्रदर्शन किया और परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल उठाए। वहीं छात्र संगठन एबीवीपी ने मामले की निष्पक्ष जांच और कड़ी कार्रवाई की मांग की।
एनएसयूआई ने राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद जाखड़ के नेतृत्व में बड़ी संख्या में कार्यकर्ता व छात्र शामिल हुए। प्रदर्शन के दौरान भारी पुलिस बल तैनात रहा और कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में भी लिया गया। एनएसयूआई ने आरोप लगाया कि राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) निष्पक्ष और पारदर्शी परीक्षा कराने में पूरी तरह विफल रही है। संगठन का कहना है कि परीक्षा रद्द होना इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि परीक्षा प्रक्रिया में बड़े स्तर पर गंभीर अनियमितताएं और लापरवाही हुई है। विनोद जाखड़ ने कहा कि परीक्षा रद्द करने का निर्णय देशभर के लाखों छात्रों की आवाज़ की जीत है। यदि परीक्षा प्रणाली निष्पक्ष होती तो सरकार को परीक्षा रद्द कर सीबीआई जांच के आदेश देने के लिए मजबूर नहीं होना पड़ता। एनएसयूआई ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग करते हुए एनटीए को भंग करने की भी मांग उठाई। इसके अलावा संगठन ने सवाल किया कि ईमानदारी से तैयारी करने वाले लाखों छात्रों के साथ हुए अन्याय की जिम्मेदारी कौन लेगा और कथित पेपर लीक नेटवर्क में शामिल गिरोहों पर कब कार्रवाई होगी।
एबीवीपी ने कठोरतम कार्रवाई की मांग की
वहीं अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने चिंता जताते हुए कहा कि प्रवेश परीक्षाओं की गोपनीयता के साथ किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जा सकता। संगठन ने केंद्र सरकार से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष और समयबद्ध जांच केंद्रीय एजेंसियों से करवाई जाए तथा दोषियों, परीक्षा माफियाओं और सहयोगियों के खिलाफ कठोरतम कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। एबीवीपी के राष्ट्रीय महामंत्री डॉ वीरेंद्र सिंह सोलंकी ने कहा कि लाखों विद्यार्थी वर्षों की मेहनत और संघर्ष के बाद नीट जैसी परीक्षाओं में शामिल होते हैं, इसलिए किसी भी प्रकार की अनियमितता उनके भविष्य और मनोबल पर प्रभाव डालती है।
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। मेडिकल संस्थानों में दाखिले के लिए होने वाली नीट परीक्षा को लेकर विवाद गहरा गया है। पेपर लीक होने के आरोपों के बाद परीक्षा को रद्द कर दिया गया है। इसको लेकर एनएसयूआई ने मंगलवार को शिक्षा मंत्रालय के पास प्रदर्शन किया और परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल उठाए। वहीं छात्र संगठन एबीवीपी ने मामले की निष्पक्ष जांच और कड़ी कार्रवाई की मांग की।
एनएसयूआई ने राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद जाखड़ के नेतृत्व में बड़ी संख्या में कार्यकर्ता व छात्र शामिल हुए। प्रदर्शन के दौरान भारी पुलिस बल तैनात रहा और कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में भी लिया गया। एनएसयूआई ने आरोप लगाया कि राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) निष्पक्ष और पारदर्शी परीक्षा कराने में पूरी तरह विफल रही है। संगठन का कहना है कि परीक्षा रद्द होना इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि परीक्षा प्रक्रिया में बड़े स्तर पर गंभीर अनियमितताएं और लापरवाही हुई है। विनोद जाखड़ ने कहा कि परीक्षा रद्द करने का निर्णय देशभर के लाखों छात्रों की आवाज़ की जीत है। यदि परीक्षा प्रणाली निष्पक्ष होती तो सरकार को परीक्षा रद्द कर सीबीआई जांच के आदेश देने के लिए मजबूर नहीं होना पड़ता। एनएसयूआई ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग करते हुए एनटीए को भंग करने की भी मांग उठाई। इसके अलावा संगठन ने सवाल किया कि ईमानदारी से तैयारी करने वाले लाखों छात्रों के साथ हुए अन्याय की जिम्मेदारी कौन लेगा और कथित पेपर लीक नेटवर्क में शामिल गिरोहों पर कब कार्रवाई होगी।
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एबीवीपी ने कठोरतम कार्रवाई की मांग की
वहीं अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने चिंता जताते हुए कहा कि प्रवेश परीक्षाओं की गोपनीयता के साथ किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जा सकता। संगठन ने केंद्र सरकार से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष और समयबद्ध जांच केंद्रीय एजेंसियों से करवाई जाए तथा दोषियों, परीक्षा माफियाओं और सहयोगियों के खिलाफ कठोरतम कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। एबीवीपी के राष्ट्रीय महामंत्री डॉ वीरेंद्र सिंह सोलंकी ने कहा कि लाखों विद्यार्थी वर्षों की मेहनत और संघर्ष के बाद नीट जैसी परीक्षाओं में शामिल होते हैं, इसलिए किसी भी प्रकार की अनियमितता उनके भविष्य और मनोबल पर प्रभाव डालती है।
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