डीयू कुलपति के कार्यक्रम में हंगामा: सत्य निकेतन हादसे के बाद एनएसयूआई ने की कड़ी निंदा, पूछा- जिम्मेदार कौन?
दिल्ली के सत्य निकेतन में हुए हादसे के बाद डीयू कुलपति के एक कार्यक्रम में शामिल होने को लेकर एनएसयूआई ने कड़ी आपत्ति जताई। प्रदर्शन कर विश्वविद्यालय प्रशासन की असंवेदनशीलता पर सवाल उठाए और प्रभावित छात्रों व उनके परिवारों के प्रति जवाबदेही की मांग की।
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नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (एनएसयूआई) ने दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलपति द्वारा एक विश्वविद्यालय कार्यक्रम में शामिल होने की कड़ी निंदा की है। यह निंदा सत्या निकेतन में हुई दुखद त्रासदी के कुछ ही दिनों बाद की गई है। इस घटना में कई छात्रों की जान चली गई थी और बड़ी संख्या में अन्य छात्र भी गंभीर रूप से प्रभावित हुए थे।
एनएसयूआई के सदस्यों ने आर्ट्स फैकल्टी के पास आयोजित इस कार्यक्रम के दौरान जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने विश्वविद्यालय प्रशासन की असंवेदनशीलता पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने सत्या निकेतन त्रासदी से प्रभावित छात्रों और उनके परिवारों के प्रति तत्काल जवाबदेही की मांग की। छात्रों का कहना था कि पूरा विश्वविद्यालय समुदाय इस समय शोक में है। ऐसे में कुलपति का किसी कार्यक्रम में शामिल होना उचित नहीं था।
सत्य निकेतन त्रासदी के बाद भी विश्वविद्यालय प्रशासन की संवेदनहीनता जारी है।
NSUI ने आज वाइस चांसलर के खिलाफ प्रदर्शन कर जवाबदेही तय करने की मांग उठाई। तीन दिन पहले छात्रों की मौत हुई है, लेकिन वाइस चांसलर पीड़ितों और छात्रों के सवालों का जवाब देने के बजाय कार्यक्रमों में व्यस्त… pic.twitter.com/sHm4BgrBMwविज्ञापन विज्ञापन— NSUI (@nsui) September 8, 2026
प्रदर्शनकारियों ने कुलपति के आचरण को असंवेदनशील बताया। उनका तर्क था कि त्रासदी के तुरंत बाद ऐसे किसी कार्यक्रम में भाग लेना उचित नहीं था। यह पीड़ितों के प्रति सम्मान की कमी दर्शाता है। छात्रों ने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन को पहले प्रभावित परिवारों को सांत्वना देनी चाहिए थी। इसके बजाय, कुलपति का कार्यक्रम में शामिल होना छात्रों के गुस्से का कारण बना। यह घटना विश्वविद्यालय के छात्रों और प्रशासन के बीच बढ़ते तनाव को भी दर्शाती है।
एनएसयूआई ने विश्वविद्यालय प्रशासन से त्रासदी के लिए जवाबदेही तय करने की मांग की है। उन्होंने घटना के कारणों की निष्पक्ष जांच कराने पर जोर दिया। प्रदर्शनकारियों ने प्रभावित छात्रों और उनके परिवारों के लिए उचित मुआवजे और सहायता की भी मांग की। छात्रों का मानना है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाने चाहिए। यह प्रदर्शन विश्वविद्यालय प्रशासन पर दबाव बनाने का एक प्रयास था।