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गुड़गांव का नाम बदल दो,कहीं भी बस जाओ पर हरियाणवीं तो गुड़गामा ही कहेंगे
यशलोक सिंह/अमर उजाला, गुरुग्राम
Updated Thu, 12 Jan 2017 10:26 AM IST
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rinkoo dhankhad
- फोटो : अमर उजाला
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प्रवासी हरियाणा दिवस के अंतिम दिन जुटे एनआरआईज ने कहा कि गुड़गांव के लोग कहीं भी बस जाएं, इसका नाम चाहें अब गुरुग्राम हो गया हो, पर हरियाणा के लोग इसे गुड़गामा ही कहेंगे। यहीं उनकी खासियत है।
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दुनिया के 33 देशों से आए 400 प्रवासियों को अपनी जोड़ने की मुहिम को सभी ने सराहा है। मगर उन्हें यह बात अखर रही है कि सरकार ने गुड़गांव का नाम बदल कर गुरुग्राम कर दिया है।
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उन्होंने कहा कि नए नाम की विदेश में ब्रांडिंग करना काफी खर्चीला है। सरकार को ऐसा नहीं करना चाहिए था। अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले हरियाणा मूल के लोगों का कहना है कि जब उन्हें पता चला कि गुड़गांव अब गुरुग्राम हो गया है तो काफी अजीब लगा था।
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गुड़गांव का नाम बदलना ठीक फैसला नहीं
sushil goet
- फोटो : अमर उजाला
उन्होंने कहा कि कॉरपोट, आईटी, बीपीओ, इंडस्ट्री व कारोबार से जुड़े लोगों को इससे काफी मुश्किल हो रही है। उनका खर्चा बढ़ गया है। गुड़गांव के स्थान पर गुरुग्राम बताने पर लोगों को लगता है कि यह कहां है।
ब्रिटेन में रहने वाले व हरियाणा इन यूके एसोसिएशन के अध्यक्ष कुलदीप अहलावत का कहना है कि सब कुछ ठीक चल रहा था ऐसे में गुड़गांव का नाम बदलना ठीक फैसला नहीं लगा।
ऑस्ट्रेलिया के ब्रिसबेन में राहने वाले प्रवासी हरियाणावासी सुनील गोयत व उनके साथियों ने वहां रेडिया कसूत शुरू किया है। जिसमें हरियाणा बोली का खास महत्व है। इन्हें भी गुड़गांव का गुरुग्राम होना पसंद नहीं आया।
कई और प्रवासी ऐसे हैं जिन्हें हरियाणा सरकार का यह फैसला रास नहीं आया है। उनका कहना है कि गुरुग्राम आईटी-बीपीओ का बड़ा हब है। अमेरिका और यूरोप से काफी कारोबार होता है। इन देशों से हरियाणा को गुड़गांव के नाम से काम मिलता है अब गुरुग्राम समझाना उनके लिए आने वाले दिनों में काफी मुश्किल होगा।
ब्रिटेन में रहने वाले व हरियाणा इन यूके एसोसिएशन के अध्यक्ष कुलदीप अहलावत का कहना है कि सब कुछ ठीक चल रहा था ऐसे में गुड़गांव का नाम बदलना ठीक फैसला नहीं लगा।
ऑस्ट्रेलिया के ब्रिसबेन में राहने वाले प्रवासी हरियाणावासी सुनील गोयत व उनके साथियों ने वहां रेडिया कसूत शुरू किया है। जिसमें हरियाणा बोली का खास महत्व है। इन्हें भी गुड़गांव का गुरुग्राम होना पसंद नहीं आया।
कई और प्रवासी ऐसे हैं जिन्हें हरियाणा सरकार का यह फैसला रास नहीं आया है। उनका कहना है कि गुरुग्राम आईटी-बीपीओ का बड़ा हब है। अमेरिका और यूरोप से काफी कारोबार होता है। इन देशों से हरियाणा को गुड़गांव के नाम से काम मिलता है अब गुरुग्राम समझाना उनके लिए आने वाले दिनों में काफी मुश्किल होगा।
नोटबंदी की तारीफ की प्रवासियों ने
kuldeep ahlavat
- फोटो : अमर उजाला
गुरुग्राम नाम भले ही हरियाणा प्रवासियों को रास नहीं आया हो मगर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नोटबंदी की हर प्रवासी ने तारीफ की है। उन्होंने कहा कि इससे कालाधन और भ्रष्टाचार को करारी मार पड़ी है।
ब्रिटेन से आए रवि शर्मा ने कहा कि यह प्रधानमंत्री का बड़ा ही ऐतिहासिक फैसला है। वहीं यूएएस से आए ओपी धनखड़ व बलविंदर कुंडू ने भी नोटबंदी की जमकर तारीफ की।
ब्रिटेन निवासी रिंकु धनखड़ ने कहा कि गुड़गांव को गुरुग्राम में बदलने का कोई फायदा नहीं दिख रहा है। उल्टे इससे कारोबारियों, इंडस्ट्री और कॉरपोरेट की परेशानी बढ़ गई है। नए नाम की ब्रांडिंग पर काफी खर्च करना पड़ेगा। वही,ऑस्ट्रेलिया निवासी अरुण मलिक ने कहा कि गुड़गांव का गुरुग्राम नहीं होना चाहिए था। यह जरूरी भी नहीं था। फिर भी हरियाणा के लोग दुनिया में कहीं भी बसें हों वह गुड़गांमा ही कहते हैं।
ब्रिटेन से आए रवि शर्मा ने कहा कि यह प्रधानमंत्री का बड़ा ही ऐतिहासिक फैसला है। वहीं यूएएस से आए ओपी धनखड़ व बलविंदर कुंडू ने भी नोटबंदी की जमकर तारीफ की।
ब्रिटेन निवासी रिंकु धनखड़ ने कहा कि गुड़गांव को गुरुग्राम में बदलने का कोई फायदा नहीं दिख रहा है। उल्टे इससे कारोबारियों, इंडस्ट्री और कॉरपोरेट की परेशानी बढ़ गई है। नए नाम की ब्रांडिंग पर काफी खर्च करना पड़ेगा। वही,ऑस्ट्रेलिया निवासी अरुण मलिक ने कहा कि गुड़गांव का गुरुग्राम नहीं होना चाहिए था। यह जरूरी भी नहीं था। फिर भी हरियाणा के लोग दुनिया में कहीं भी बसें हों वह गुड़गांमा ही कहते हैं।