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अब जिंदगीभर नहीं चला पाएगा वाहन, अदालत ने दिया एक अनोखा फैसला

Mon, 20 Mar 2017 11:35 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Mon, 20 Mar 2017 11:35 AM IST
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Now, the vehicle will not run life, the court has given such a decision
कोर्ट - फोटो : Pintrest

अदालत ने सड़क दुर्घटना में एक नौ वर्षीय छात्र की मौत मामले को गंभीरता से लिया है। अदालत ने आरोपी ट्रक चालक के प्रति सजा मामले में तो राहत प्रदान करते हुए उसकी सजा घटाकर एक वर्ष कर दी लेकिन उस पर जिंदगी भर वाहन चलाने पर रोक लगा दी।

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अदालत ने लाईसेसिंग विभाग को उसका लाईसेंस रद्द करने का निर्देश दिया है। अतिरिक्त अर्चना सिन्हा ने अपने फैसले में कहा कि तथ्यों से स्पष्ट है कि दोषी काफी तेज व लापरवाही से ट्रक को चला रहा था। अदालत ने कहा दोषी के रवैये के कारण मासूम बच्चे को अपने जीवन से हाथ धोना पड़ा है।
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अदालत ने उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ निवासी दोषी सुनील कुमार मिश्रा के ड्राइविंग लाइसेंस को रद्द करने का आदेश देत हुए कहा कि उसे कोई नया लाइसेंस जारी नहीं किया जाना चाहिए क्योंकि उसे अपने पूरे जीवन में इसे प्राप्त करने पर रोक दिया गया है।
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यह आदेश पूरे देश की सभी लाईसेंस विभाग अथारिटी को भेजा जाए

Now, the vehicle will not run life, the court has given such a decision
file photo - फोटो : अमर उजाला

अदालत ने कहा कि यह आदेश पूरे देश की सभी लाईसेंस विभाग अथारिटी को भेजा जाए। अदालत ने कहा दोषी का लाईसेंस जहां से बना है वहां के रजिस्ट्रेंशन अथिरिटी के एमएलओ को सूचना दीजाए कि मिश्रा का लाईसेंस रद्द करने का आदेश है और पूरी जिंदगी उसके वाहन चलाने पर रोक लगाई        गई है।

अदालत ने यह फैसला मजिस्ट्रेट अदालत के निर्णय को चालक द्वारा चुनौती याचिका का निपटारा करते हुए दिया है। अदालत ने चालक को मात्र यह राहत दी है कि उसकी सजा घटाकर कर 18 माह से एक वर्ष कर दी है।

अदालत ने कहा दोषी के चार बच्चे है और वह करीब 17 वर्ष से मुकदमें का सामना कर रही है। अभियोजन पक्ष के अनुसारए यह घटना 31 अगस्त 2000 को समयपुर बदली में डीएवी विद्यालय के सामने हुई थी। छात्र नवीन अपने पिता के साथ स्कूल जा रहा था और इसी दौरान पीछे से ट्रक चालक ने उसे टक्कर मार दी जिससे उसकी मौत हो गई।

दोषी ने दावा किया था कि उसे फर्जी मामले में फंसाया गया है और भीड़ भरे रास्ते पर वाहन तेज चलान संभव ही नहीं है। इसके अलावा यह भी साबित नहीं हुआ कि वह ट्रक चला रहा था। अदालत ने उसके तर्क को खारिज करते हुए कहा कि सौभाग्य से दुर्घटना में पिता बच गया और उसे दुर्घटना को देखा था व उसकी गवाही को नकारा नहीं जा सकता।

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