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अब कैमरा खोलेगा राज, अरावली में मौजूद वन्य जीवों की मिलेगी जानकारी
शाहनवाज आलम/अमर उजाला, फरीदाबाद
Updated Mon, 27 Jun 2016 12:21 AM IST
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अरावली
- फोटो : अमर उजाला
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अरावली के जंगलों में कितने जंगली जानवर है? जंगली जानवरों की कौन-कौन सी प्रजातियां मौजूद है? अब इसकी गिनती कैमरे की निगरानी में होगी।
हरियाणा वन्य जीव विभाग और देहरादून स्थित वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (डब्ल्यूआईआई) की ओर से किए जंगली जानवरों की गिनती किए जाने का दूसरा फेज जून के बाद शुरू होगा।
इसे दिसंबर तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इससे अगले छह माह में तस्वीर साफ हो जाएगी कि अरावली में कितने तेंदुए, सियार, लकड़बग्घा और अन्य जानवर है। इस रिपोर्ट के आधार पर प्रदेश सरकार वन्य जीवों के सरंक्षण का विशेष प्लान तैयार करेगी।
दरअसल, अरावली के वन्य जीवों के अस्तित्व को लेकर कई सवाल खड़े किए जा रहे हैं। यहां तेंदुआ, नील गाय, हिरण, लकड़बग्घा, लोमड़ी समेत कई अन्य वन्य जीव मौजूद है, लेकिन ये कहां मौजूद है?
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इनकी संख्या कितनी है? इस बारे में अभी सटीक जानकारी नहीं है। इन वन्य जीवों के संरक्षण के लिए वन्य विभाग भी चिंतित है। इस बाबत हरियाणा सरकार ने 10 जनवरी 2016 को डब्ल्यूआईआई को इसकी जिम्मेवारी सौंपी थी।
डब्ल्यूआईआई के अधिकारियों का कहना है कि पहले फेज के सर्वे के बाद दूसरे फेज जानवरों के पुख्ता गिनती के लिए कैमरे लगाए जाएंगे।
इसके लिए गुडग़ांव, फरीदाबाद, मेवात, रेवाड़ी और महेंद्रगढ़ के नारनौल वाले क्षेत्र के 12 गांव चिह्नित किए गए हैं। इन गांवों के जंगल क्षेत्र में 51 स्थान तय हुए है, जहां पर कैमरे लगाए जाएंगे। कैमरे लगाने का स्थान लाइन ट्रांजिट और साइन सर्वे के आधार पर तय किया है।
पहले फेज के सर्वे में मिले है कई जंगली जानवर
पहले फेज में लाइन ट्रांजिट सर्वे में खुर वाले जानवरों का पता लगाया गया था, जिसमें नील गाय, लकड़बग्घा, चिंकारा और अन्य जंगली पक्षी भी मिले थे।
जबकि साइन सर्वे में मांसाहारी जानवरों को लेकर सर्वे किया गया था, जिसमें तेंदुआ, लकड़बग्घा, सियार और अन्य मांसाहारी जानवरों के होने का सबूत मिला है। इसमें इन जानवरों के पग मार्क, स्क्रैप मार्क, मल-मूत्र के निशान लिए गए हैं।
बता दें कि पहली बार प्रदेश सरकार हरियाणा के हिस्से की अरावली के जंगलों में पाए जाने वाले जंगली जानवरों की गणना करा रही है। इसमें भिवानी, मेवात, गुडग़ांव, महेंद्रगढ़, रेवाड़ी, फरीदाबाद और पलवल के घने क्षेत्र शामिल है।
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हरियाणा वन्य जीव विभाग और देहरादून स्थित वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (डब्ल्यूआईआई) की ओर से किए जंगली जानवरों की गिनती किए जाने का दूसरा फेज जून के बाद शुरू होगा।
इसे दिसंबर तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इससे अगले छह माह में तस्वीर साफ हो जाएगी कि अरावली में कितने तेंदुए, सियार, लकड़बग्घा और अन्य जानवर है। इस रिपोर्ट के आधार पर प्रदेश सरकार वन्य जीवों के सरंक्षण का विशेष प्लान तैयार करेगी।
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दरअसल, अरावली के वन्य जीवों के अस्तित्व को लेकर कई सवाल खड़े किए जा रहे हैं। यहां तेंदुआ, नील गाय, हिरण, लकड़बग्घा, लोमड़ी समेत कई अन्य वन्य जीव मौजूद है, लेकिन ये कहां मौजूद है?
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इनकी संख्या कितनी है? इस बारे में अभी सटीक जानकारी नहीं है। इन वन्य जीवों के संरक्षण के लिए वन्य विभाग भी चिंतित है। इस बाबत हरियाणा सरकार ने 10 जनवरी 2016 को डब्ल्यूआईआई को इसकी जिम्मेवारी सौंपी थी।
डब्ल्यूआईआई के अधिकारियों का कहना है कि पहले फेज के सर्वे के बाद दूसरे फेज जानवरों के पुख्ता गिनती के लिए कैमरे लगाए जाएंगे।
इसके लिए गुडग़ांव, फरीदाबाद, मेवात, रेवाड़ी और महेंद्रगढ़ के नारनौल वाले क्षेत्र के 12 गांव चिह्नित किए गए हैं। इन गांवों के जंगल क्षेत्र में 51 स्थान तय हुए है, जहां पर कैमरे लगाए जाएंगे। कैमरे लगाने का स्थान लाइन ट्रांजिट और साइन सर्वे के आधार पर तय किया है।
पहले फेज के सर्वे में मिले है कई जंगली जानवर
पहले फेज में लाइन ट्रांजिट सर्वे में खुर वाले जानवरों का पता लगाया गया था, जिसमें नील गाय, लकड़बग्घा, चिंकारा और अन्य जंगली पक्षी भी मिले थे।
जबकि साइन सर्वे में मांसाहारी जानवरों को लेकर सर्वे किया गया था, जिसमें तेंदुआ, लकड़बग्घा, सियार और अन्य मांसाहारी जानवरों के होने का सबूत मिला है। इसमें इन जानवरों के पग मार्क, स्क्रैप मार्क, मल-मूत्र के निशान लिए गए हैं।
बता दें कि पहली बार प्रदेश सरकार हरियाणा के हिस्से की अरावली के जंगलों में पाए जाने वाले जंगली जानवरों की गणना करा रही है। इसमें भिवानी, मेवात, गुडग़ांव, महेंद्रगढ़, रेवाड़ी, फरीदाबाद और पलवल के घने क्षेत्र शामिल है।