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घर के कचरे से बनेगी बिजली, लगेगा वेस्ट टू एनर्जी प्लांट
ब्यूरो/अमर उजाला, फरीदाबाद
Updated Thu, 03 Mar 2016 11:08 AM IST
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औद्योगिक नगरी ने स्मार्ट सिटी बनने की तरफ पहला बड़ा कदम उठाया दिया है। प्रदेश के पहले वेस्ट टू एनर्जी प्लांट का रास्ता साफ करते हुए सरकार ने इस प्रोजेक्ट पर काम करने वाली कंपनी नीलकंठ समूह के साथ समझौता कर लिया है।
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अगले दो साल में 800 करोड़ रुपये के इस प्रोजेक्ट को पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इसका फायदा न केवल फरीदाबाद बल्कि पड़ोसी शहर गुड़गांव को भी मिलेगा।
दोनों शहरों के तकरीबन एक हजार टन कचरे से 50 मेगावाट बिजली रोजाना उत्पादित की जाएगी। हालांकि, वेस्ट टू एनर्जी प्लांट लगाने के लिए अभी जमीन तय नहीं हो पाई है लेकिन बंधबाड़ी में इसे स्थापित करने पर विचार किया जा रहा है।
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एनसीआर के प्रमुख शहर फरीदाबाद और गुड़गांव कचरा निस्तारण के मामले में मार खा रहे हैं। इस वजह से फरीदाबाद को स्मार्ट सिटी की टॉप 20 शहरों की दौड़ से बाहर भी होना पड़ा है।
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शहर की डीएलएफ इंडस्ट्री एसोसिएशन ने इस प्रोजेक्ट को रफ्तार देने में अहम भूमिका निभाई है। बुधवार को अरावली गोल्फ क्लब में पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए एसोसिएशन के प्रधान जेपी मल्होत्रा ने बताया कि इस प्रोजेक्ट से स्मार्ट सिटी के साथ हैपनिंग हरियाणा जैसी महत्वाकांक्षी परियोजनाओं को गति मिलेगी।
उन्होंने कहा कि डीएलएफ पहला ऐसा औद्योगिक संगठन है जिसने डोर टू डोर कचरा एकत्रीकरण में नीलकंठ फाउंडेशन को सहयोग दिया। प्रोजेक्ट के लिए एचएसआईडीसी के राकेश टूटेजा को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है।
उल्लेखनीय है कि कचरे से बिजली बनाने के लिए अमेरिकी तकनीकी (प्लाजमा मैसिफिकेशन) का इस्तेमाल किया जाएगा। योजना के मुताबिक कचरे की छंटनी का काम कंप्यूराइज्ड मैकेनिज्म से होगा, यानि इसमें मानव शक्ति का उपयोग नहीं होगा।
कचरा निस्तारण प्रक्रिया में सभी प्रकार के कचरे का प्रयोग किया जाएगा। भले वह प्लास्टिक हो या रबड़, शीशा हो या लेदर, मेटल या पेपर या पॉलिथीन। योजना के तहत घरों से कचरा एकत्र किया जाएगा।
फास्ट ट्रैक में मजबूत होगी दावेदारी
स्मार्ट सिटी के तहत फास्ट ट्रैक कंपीटीशन में इस प्रोजेक्ट से फरीदाबाद की दावेदारी मजबूत होने की उम्मीद है, क्योंकि इस कंपीटीशन में शामिल 23 शहरों में से किसी के पास ऐसा प्रोजेक्ट नहीं है।
हालांकि, प्रोजेक्ट का फायदा दो साल बाद मिलेगा। गुड़गांव में 7 व 8 मार्च होने होने वाली हरियाणा हैपनिंग समिट में भी इस प्रोजेक्ट पर चर्चा होगी।
530 लोगों को मिलेगा रोजगार
नीलकंठ फाउंडेशन के एक प्रतिनिधि ने प्रजेंटेशन के दौरान प्रोजेक्ट की जानकारी दी। इस दौरान बताया गया कि 800 करोड़ रुपये के इस प्रोजेक्ट से 530 लोगों को रोजगार मिलेगा।
प्लांट से उत्पादित होने वाली बिजली को बेचने के लिए पावर परचेज एग्रीमेंट और प्लांट लगाने के लिए जमीन की उपलब्धता संबंधित कार्य शुरू कर दिया गया है।