कपड़े, मोबाइल ही नहीं कुर्बानी का बकरा भी यहां मिल रहा ऑनलाइन, इतनी है कीमत
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आपने अब तक कपड़े, गैजेट्स और इलेक्ट्रॉनिक आइटम ऑनलाइन खरीदने की बात सुनी होगी, लेकिन अब कुर्बानी का बकरा भी ऑनलाइन खरीदा जा सकता है। बकरीद के दिन कुर्बानी के लिए बकरे खरीदे जाते हैं, इसके लिए मंडियां लगती हैं।
मेले में आकर बकरे पसंद करने का चलन रहा है। बदलते वक्त के साथ अब ऑनलाइन बाजार में बकरा बिक रहा है। कुर्बानी का दिन नजदीक आते ही बकरे के ऑनलाइन विज्ञापन में इजाफा हो गया है। विज्ञापन देने वालों की मानें तो 22 अगस्त को होने वाली बकरीद के लिए बड़ी संख्या में लोग ऑनलाइन बकरे खरीद रहे हैं।
गुरुग्राम से करीब 70 किलोमीटर दूर बसे मेवात के पशुपालक मेवाती नस्ल के बकरे को लाकर यहां की मंडियों में बेचते थे। मेले लगाते थे, लेकिन इस साल मेवाती नस्ल के बकरे गुरुग्राम में लाने के साथ ऑनलाइन बाजार में भी बेचे जा रहे हैं।
ओएलएक्स से लेकर क्विकर तक कई ई-कॉमर्स वेबसाइट पर बकरों के वर्गीकृत इश्तेहार मौजूद हैं, जो 18 हजार से 55 हजार तक की कीमत के हैं।
विज्ञापन में पूरी जानकारी
पेशे से पशुपालक नजफगढ़ के सलमान सिद्दकी ने ओएलएक्स पर अपने बकरे की कीमत 22 हजार रुपये रखी है। फोन पर उन्होंने बताया कि यह आइडिया उनके बेटे ने दिया। बकौल सलमान, हमारे बकरे पर चांद बना हुआ है और ये पूरी तरह से स्वस्थ है। अभी तक 6 बकरे बेच चुके हैं।
विज्ञापन में पूरी जानकारी : ओएलएक्स पर बकरों के करीब पांच हजार इश्तेहार हैं, जबकि क्विकर पर यह संख्या एक से डेढ़ हजार के बीच है। कुर्बानी के पशु में दांत का महत्व है इसलिए अमूमन विज्ञापन में बकरे का दांत दिखाया गया है।
विज्ञापनों में बकरे की कीमत, वजन, ऊंचाई, रंग, आकार तथा प्रजाति का विवरण दिया जाता है। विक्रेताओं का कहना है कि ऑनलाइन विज्ञापन से उन्हें शहरी खरीदारों से अच्छा रिस्पांस मिल रहा है।
होम डिलीवरी की भी सुविधा
ऑनलाइन बिजनेस की तर्ज पर होम डिलीवरी की सुविधा दी जा रही है। ऑनलाइन विज्ञापन को देखकर फोन कर तसल्ली होने पर कई पशुपालक होम डिलीवरी की सुविधा दे रहे हैं। लेकिन, यह एक निश्चित दायरे तक सीमित है।
पटौदी के फारूख ने बताया कि फोटो दिखाने और फोन पर डील फाइनल होने के बाद उसे घर तक पहुंचाकर पैसे लेते हैं। अभी तक अधिकतम 40 किलोमीटर तक ही गए हैं। इसके लिए अलग से चार्ज लेते हैं।
अधिकांश मामले में खरीददार ही घर आकर बकरा ले जाते हैं। एक अन्य पशुपालक मुंशी बाबू बताते हैं कि ऑनलाइन इश्तेहार उन्होंने डाला क्योंकि जो लोग घर पर बकरा खरीदने आ रहे थे, उनमें से कोई सही कीमत नहीं दे रहा था। उनका बकरा अभी बिका नहीं है, लेकिन वेबसाइट के जरिये कई लोगों ने उनसे संपर्क किया है।