बिना लक्षण वाले मरीजों की जांच पर रोक मामले में दिल्ली सरकार को नोटिस
- हाईकोर्ट ने डॉ केके अग्रवाल की याचिका पर सरकार से मांगा जवाब
- दिल्ली सरकार को इस नोटिस का 22 जून से पहले जवाब देना है
विस्तार
हाईकोर्ट ने बिना लक्षण तथा मामूली लक्षण वालों की कोरोना जांच पर रोक के मामले में दिल्ली सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। हाईकोर्ट ने यह नोटिस पद्मश्री तथा हार्ट केयर फाउंडेशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष डॉ. केके अग्रवाल की याचिका पर जारी किया है। दिल्ली सरकार को इस नोटिस का 22 जून से पहले जवाब देना है।
मुख्य न्यायाधीश डीएन पटेल तथा न्यायमूर्ति प्रतीक जालान के समक्ष डॉ केके अग्रवाल तथा रेणु गोस्वामी की ओर से दायर ऐसी एक अन्य याचिका पर वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ लूथरा ने बहस की।
खंडपीठ के समक्ष डॉ अग्रवाल ने कहा कि बिना लक्षण वाले, पूर्व लक्षण वाले तथा मामूली लक्षण वाले मामलों में आने वाले दिनों में तेजी से वृद्धि होगी। उन्होंने कहा कि पांच से 80 मामलों में पॉजिटिव पाए जाने वाले मरीजों में कोरोना के लक्षण नहीं होते।
उन्होंने कहा कि बिना लक्षण वाले तथा पूर्व लक्षण वाले रोगियों को जांच की अनुमति नहीं देने से कोरोना का उपचार नहीं मिलेगा और वह पूर्ण रोगी बन जाएंगे। बिना लक्षण वाले साइलेंट कोरोना स्प्रेडर होते हैं और जांच करके इन्हें रोका जाना चाहिए। इनकी जांच और फोलो अप का दायरा बढ़ाया जाना चाहिए।
इसमें उन लोगों को भी शामिल किया जाना चाहिए जो कोरोना पॉजिटिव के संपर्क में आए। इसके अलावा घनी आबादी वाले क्षेत्र जहां संक्रमण बढ़ने की आशंका ज्यादा है, वहां भी जांच का दायरा बढ़ाया जाना चाहिए।
खंडपीठ के समक्ष डॉ. अग्रवाल ने कहा कि स्वास्थ्य का अधिकार नागरिकों को प्राप्त मौलिक अधिकार है। स्वास्थ्य के अधिकार में हैल्थकेयर शामिल है जो बड़े पैमाने पर जनता के लिए उपलब्ध है। इन सेवाओं में रोकथाम, निदान, उपचार, रोग प्रबंधन, विकारों का उपचार जैसी सुविधाएं शामिल हैं। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 47 के अनुसार रोग के प्रसार को रोकना सरकार का दायित्व है।
उन्होंने कहा कि कोरोना की बीमारी तेजी से फैल रही है, ऐसे में एहतियात बरतना बेहद जरूरी है। बीमारी के लक्षणों के उभरने का इंतजार करने से संक्रमण गंभीर रूप ले सकता है। इस स्थिति में संविधान के अनुच्छेद 47 का पालन नहीं हो सकेगा।
परिवहन विभाग के 11 कर्मचारी कोरोना संक्रमित
परिवहन विभाग मुख्यालय की अलग-अलग विंग में कार्यरत 11 कर्मचारी कोरोना पॉजीटिव पाए गए हैं। इनमें एक अधिकारी भी हैं। रिपोर्ट आने के बाद सभी को घर में एकांतवास में भेज दिया है। इससे पहले भी मुख्यालय में दो कर्मी पॉजीटिव हो गए थे। परिवहन विभाग में एक साथ इतनी संख्या में कर्मचारियों के पॉजीटिव होने से दफ्तर में काम-काज प्रभावित न हो इसके भी प्रयास लगातार किए जा रहे हैं।
इससे पहले एमएलओ दफ्तर सराय काले खां और राजा गार्डन में भी कोरोना संक्रमण के मामले सामने आने से काम प्रभावित हो गया था। हाल ही में परिवहन विभाग के 25 लोगों की जांच की गई थी, जिनमें 11 के संक्रमित होने के बाद कर्मचारियों में चिंता का माहौल है।
अब पीपीई किट पहनकर छह घंटे ड्यूटी करेंगे नर्सिंग कर्मी
एम्स प्रबंधन के खिलाफ बीते कई दिनों से विरोध प्रदर्शन कर रहे नर्सिंग कर्मचारियों का मामला अब सुलझ गया है। मंगलवार को एम्स प्रबंधन के साथ बैठक में नई योजना पर सहमति बन गई है। इसके तहत नर्सिंग कर्मचारी कोविड वार्ड में पीपीई किट के साथ 6 घंटे की शिफ्ट करेंगे। जय प्रकाश नारायण ट्रामा सेंटर में तैनात नर्सिंग स्टाफ में 25 फीसदी को हर 2 हफ्ते बाद नॉन कोविड वार्ड में लगाया जाएगा। रात 11 बजे से सुबह 6 बजे तक स्टाफ के लिए अस्पताल से विक्रम सदन तक परिवहन सुविधा उपलब्ध रहेगी। साथ ही पहले की तुलना में बेहतर सुविधाएं दी जाएंगी। ब्यूरो
सामाजिक दूरी बनाने को कहा तो हवलदार को पीट वर्दी फाड़ी
वेलकम इलाके में सामाजिक दूरी बनाने के लिए कहने पर चार युवकों ने एक हवलदार की पिटाई कर उसकी वर्दी फाड़ दी और सरकारी बाइक की चाबी लेकर फरार हो गए। घायल हवलदार को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। पुलिस आरोपियों के खिलाफ सरकारी काम में बाधा पहुंचाने और मारपीट करने का मामला दर्ज कर उनकी पहचान करने में जुट गई है।