तोमर समेत AAP के दर्जनभर विधायक निशाने पर
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भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन से पैदा हुई आम आदमी पार्टी को भ्रष्टाचार के जाल में ही फंसाने की भाजपा की रणनीति है। पार्टी ने पहला निशाना कानून मंत्री जितेंद्र तोमर पर साधा था। तोमर की गिरफ्तारी के बाद भाजपा को उसकी रणनीति कारगर साबित होती दिख रही है।
अब पार्टी की कोशिश ‘आप’ के ऐसे नेताओं पर शिकंजा कसने की है जिनपर भ्रष्टाचार से जुड़ी शिकायत है। सूत्र बताते है कि इसके लिए दर्जन भर नामों की सूची तैयार है। ‘आप’ की भ्रष्टाचार विरोधी छवि भाजपा की बेनकाब करने की मुहिम में शामिल है।
भाजपा रणनीतिकारों की कोशिश है कि जिस तरह ‘आप’ अन्य राजनीतिक पार्टियों पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाकर सत्ता में काबिज हुई उसी हथियार से उसे कटघरे में खड़ा कर दिया जाए। दिल्ली की जनता के बीच उस पार्टी की छवि भी भ्रष्टाचारी बना दी जाए।
ताकि अपने को पाक-साफ कहने वाली पार्टी अन्य राजनीतिक पार्टियों व एमसीडी पर कीचड़ उछालने के पहले अपने गिरेबां में झांक सके। यही वजह थी कि जितेंद्र सिंह तोमर की बर्खास्तगी की मांग को लेकर सड़क से सदन तक विरोध-प्रदर्शन किया गया।
अब इन पर भी होगा हमला
विधानसभा चुनाव के दौरान भी भाजपा के पूर्व विधायक नंद किशोर गर्ग ने फर्जी डिग्री का मामला उठाया था। पार्टी रणनीतिकारों का कहना है कि न केवल तोमर बल्कि एक दर्जन से अधिक ‘आप’ के विधायकों का चिट्ठा इकट्ठा किया गया है।
भाजपा का आरटीआई सेल भी इस मुहिम में जुटा है। पार्टी जल्द ही ‘आप’ विधायक प्रोमिला टोकस, राखी बिड़लान, नरेश बाल्यान, अखिलेश पति त्रिपाठी, संजीव झा, ऋतुराज गोविंद, जरनैल सिंह, कमांडो सुरेंद्र सिंह को भी कटघरे में खड़ा करेगी।
पार्टी का मानना है कि इनके अलावा भी कई विधायक है जिनकी छवि साफ नहीं है। बता दें कि विस चुनाव के दौरान मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने प्रदेश अध्यक्ष सतीश उपाध्याय व महामंत्री आशीष सूद पर भ्रष्टाचारी होने का आरोप मढ़ा था।
यह आरोप लगाया था कि बिजली मीटर लगाने का काम इन्हीं नेताओं ने किया था। इसी आरोप के बाद भाजपा किरण बेदी को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार बनाकर चुनाव लड़ने को मजबूर हुई थी।