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पानी निकालने के इंतजाम नहीं, दावे स्मार्ट सिटी के
अमर उजाला, गाजियाबाद
Updated Tue, 28 Jul 2015 01:42 AM IST
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एक दिन की बारिश में शहर में जगह-जगह जलभराव बो जाता है। गोशाला अंडरपास का जलभराव शहर को कई दिनों तक दो हिस्सों में बांट देता है। सीवर ओवरफ्लो होना आम बात है।
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जरूरत के मुताबिक लोगों को पीने का पानी तक नहीं मिल पा रहा है। इसके बावजूद जिस दिन से मोदी सरकार ने देश में 100 स्मार्ट शहर बसाने की घोषणा की है, गाजियाबाद दावेदारों की कतार में खुद को शामिल कराने की जद्दोजहद में जुटा है।
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पूर्व जीडीए वीसी संतोष यादव ने शहरी एवं विकास मंत्रालय में दो जीडीए अधिकारियों की ड्यूटी ही इस प्रोजेक्ट में गाजियाबाद को शामिल कराने के लिए लगा दी थी।
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इससे जुड़ी तमाम कागजी कार्रवाई भी फाइलों के रूप में दौड़ रही है। पहले चरण में मानकों के लिहाज से स्मार्ट सिटी बनने वाले शहरों के नामों की घोषणा केंद्र सरकार जल्द करने वाला है।
अगले वर्ष दूसरे चरण में शामिल होने वाले शहरों की घोषणा की जाएगी। नागरिक सुविधाओं के संसाधनों की स्थिति से तो अगले कई सालों तक गाजियाबाद के इस प्रोजेक्ट में शामिल होने के आसार नजर नहीं आते।
स्मार्ट सिटीज के मानक
स्मार्ट सिटी के मानकों को तीन श्रेणियों फिजिकल इंफ्रास्ट्रक्चर, सोशल इंफ्रास्ट्रक्चर और इंस्टीट्यूशनल इंफ्रास्ट्रक्चर में बांटा गया है।
1. फिजिकल इंफ्रास्ट्रक्चर
इलेक्ट्रिसिटी, वाटर सप्लाई, सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट, सीवरेज, मल्टीमॉडल ट्रांसपोर्ट, साइबर कनेक्शन, कनेक्टिविटी, हाउसिंग और डिजास्टर मैनेजमेंट
2. सोशल इंफ्रास्ट्रक्चर
एजूकेशन, हेल्थकेयर, इंटरटेंनमेंट, हाउसिंग सेक्टर
3. इंस्टीट्यूशनल इंफ्रास्ट्रक्चर
स्पीडी सर्विस डिलीवरी, सिक्योरिटी, टैक्सेशन, स्किल डेवलेपमेंट, इंवायरमेंटल इश्यूज, सिटिजन एडवाइजरी कमेटी
स्मार्ट सिटी के मानक
वाटर सप्लाई
24 गुणे 7 वाटर सर्प्लाई, 100 फीसदी घरों में वाटर सप्लाई कनेक्शन, 135 लीटर प्रति व्यक्ति पानी की सप्लाई, 100 फीसदी घरों में वाटर मीटर, 100 फीसदी वाटर टैक्स कलेक्शन
वर्तमान स्थिति
दो-दो घंटे सुबह शाम पानी की सप्लाई, 70 फीसदी ही घरों में कनेक्शन, प्रति व्यक्ति मानक से कम सप्लाई, शहर में वाटर मीटर लगे ही नहीं, टैक्स कलेक्शन भी शत-प्रतिशत नहीं
ट्रांसपोर्ट
प्रमुख स्थानों और कार्यस्थल पर पहुंचने में अधिकतम 30 से 45 मिनट का समय लगे, सड़क के दोनों ओर 12 मीटर से अधिक लंबे और 2 मीटर चौड़े फुटपाथ, 10 मीटर चौड़ी सड़क के दोनों ओर दो मीटर चौड़े साइकिल ट्रैक, रिहायशी इलाकों में प्रत्येक 800 मीटर की दूरी पर ट्रांसपोर्ट सुविधा, 300 मीटर की दूरी पर सहायक ट्रांसपोर्ट की सुविधा।
वर्तमान स्थिति
राजधानी दिल्ली की करीब 15 से 16 किलोमीटर की दूरी तय करने में लग जाते हैं एक से डेढ़ घंटे। शहर के ही कई क्षेत्रों में जाने के लिए भी एक से डेढ़ घंटा लगना आम बात।
वर्षों पहले बसी कालोनियों में भी ट्रांसपोर्ट सुविधा नदारद, कई मुख्य सड़कों पर फुटपाथ बने ही नहीं, जहां बने वहां अवैध कब्जों में गुम। मुख्य सड़कों की हालत खराब, रोजाना जाम लगना आम बात। शहर से गुजर रहे तीनों हाईवे जूझ रहे जाम से। शहर की कुछ सड़कों किनारे जीडीए बनवा रहा साइकिल ट्रैक।
सीवरेज
100 फीसदी घरों में शौचालय. 100 फीसदी स्कूलों में गर्ल्स और ब्वॉयज के अलग-अलग शौचालय, 100 फीसदी घरों में सीवर कनेक्शन
वर्तमान स्थिति
महज 30 फीसदी घरों में शौचालय और सीवर कनेक्शन नहीं, सरकारी स्कूलों में शौचालय की बुरी हालात, कई स्कूलों में शौचालय बने ही नहीं।
सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट
100 फीसदी घरों में डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन, प्रतिदिन 100 फीसदी कूड़ा उठान, कूड़े का 100 फीसदी निस्तारण
वर्तमान स्थिति
गाजियाबाद में सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट सिस्टम है ही नहीं। डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन भी नहीं
फायर फाइटिंग
दो लाख की आबादी में एक फायर स्टेशन (अधिकतम 5 से 7 किलोमीटर की दूरी पर), 3 से 4 किलोमीटर के दायरे में एक सबस्टेशन
वर्तमान स्थिति
शहर में सिर्फ दो फायर स्टेशन हैं।
ड्रेनेज सिस्टम
सड़कों के किनारे 100 फीसदी बनें ड्रेनेज, 100 फीसदी रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगें
वर्तमान स्थित
थोड़ी सी ही बारिश में शहर की सड़कें बन जातीं तालाब, ड्रेनेज सिस्टम बुरी तरह से ध्वस्त, 25 फीसदी बिल्डिंगों में नहीं रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम
घर हों पार्क-पार्किंग सुविधा संग
स्मार्ट सिटी की परिकल्पना में 95 फीसदी घरों में पार्किंग सुविधा होना अनिवार्य है। इसके साथ ही आबादी से 400 मीटर के दायरे में पार्क, मनोरंजन स्थल, सामुदायिक केंद्र, खेल के मैदान आदि सुविधाओं की अपेक्षा की गई है।
वर्तमान स्थित
बिल्डरों ने एकल यूनिट पर अवैध रूप से कई-कई मंजिला इमारतें बना दीं तो भूमाफिया ने शहर में अवैध कालोनियों का जाल बिछा दिया।
इनमें न तो पार्किंग की सुविधा है और न ही अन्य सामुदायिक सुविधाओं के प्रावधान। अवैध निर्माण के चलते सीवर-पानी, सड़क समेत कई सुविधाओं की स्थिति खस्ताहाल।
बिजली-स्वास्थ्य-शिक्षा बचा सकते लाज
बिजली से जुड़े मानकों में 24 घंटे बिजली सप्लाई, 100 फीसदी घरों में बिजली कनेक्शन, 100 फीसदी मीटर से सप्लाई, 100 फीसदी बिजली लागत की भरपाई शामिल हैं। गाजियाबाद पहले ही नो कट जोन में शामिल है।
प्रदेश में सर्वाधिक कनेक्शन, सर्वाधिक राजस्व वसूली और सबसे कम लाइनलॉस गाजियाबाद में है। थोड़े से संसाधनों को सुधारकर इससे जुडे़ मानक पूरे किए जा सकते हैं।
एजूकेशन हब होने के चलते शहर में शिक्षण केंद्रों की बहुतायत है। हालांकि सरकारी कॉलेज की और जरूरत है। इसी प्रकार स्वास्थ्य सेवाओं के मामले में भी शहर मानक पूरे करने के करीब है।
अन्य मानक
पूरे शहर में वाईफाई कनेक्टिविटी (100 एमबीपीएस स्पीड के साथ)
शतप्रतिशत घरों में लैंडलाइन टेलीफोन कनेक्शन या मोबाइल फोन
वेस्ट वाटर हो 100 फीसदी ट्रीटमेंट।
‘स्मार्ट सिटी’ प्रोजेक्ट पर 29 को दिल्ली में बैठक
स्मार्ट सिटी को लेकर 29 जुलाई को दिल्ली में बैठक होगी। बैठक में नगर आयुक्त अब्दुल समद समेत यूपी के कई बड़े अधिकारी भी शामिल होंगे। केंद्रीय शहरी विकास विभाग के अफसर स्मार्ट सिटी को लेकर मंथन करेंगे।
स्मार्ट सिटी की सूची में यूपी के 13 शहरों को शामिल किया जाना है। नगर आयुक्त अब्दुल समद का कहना है कि इस सूची में गाजियाबाद को भी शामिल किए जाने की प्रबल संभावना है।