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Delhi NCR News: 70 सदस्यीय हरियाणा एथलेटिक्स टीम में जिले का एक भी खिलाड़ी नहीं
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- ताऊ देवीलाल खेल परिसर में अत्याधुनिक सिंथेटिक एथलेटिक्स ट्रैक उपलब्ध है
संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। ओडिशा के भुवनेश्वर में आयोजित होने वाली राष्ट्रीय सीनियर एथलेटिक्स प्रतियोगिता के लिए घोषित 70 सदस्यीय हरियाणा टीम में जिले का एक भी एथलीट शामिल नहीं है। इस प्रतियोगिता के विजेता खिलाड़ियों को जापान में होने वाले एशियाई खेलों तक पहुंचने का अवसर मिल सकता है। ऐसे में जिले का प्रतिनिधित्व पूरी तरह से शून्य होना जिले की खेल व्यवस्था पर बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।
गुरुग्राम के ताऊ देवीलाल खेल परिसर में अत्याधुनिक सिंथेटिक एथलेटिक्स ट्रैक उपलब्ध है। यहां सरकारी कोचों के साथ-साथ बड़ी संख्या में निजी कोच भी अपनी-अपनी एथलेटिक्स अकादमियां संचालित कर रहे हैं। इसके बावजूद सीनियर वर्ग में राष्ट्रीय स्तर पर खेलने योग्य खिलाड़ी जिले से सामने नहीं आ रहे हैं।
खेल प्रेमियों और अभिभावकों का कहना है कि जिले में एथलेटिक्स अकादमियों की संख्या बढ़ रही है, लेकिन खिलाड़ियों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने के बजाय अधिकांश अकादमियां केवल अपने प्रचार-प्रसार तक सीमित दिखाई देती हैं। कई निजी अकादमियां खिलाड़ियों की उपलब्धियों से अधिक अपने ब्रांड, लोगो और खेल सामग्री के प्रचार पर ध्यान केंद्रित कर रही है।
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गुरुग्राम। ओडिशा के भुवनेश्वर में आयोजित होने वाली राष्ट्रीय सीनियर एथलेटिक्स प्रतियोगिता के लिए घोषित 70 सदस्यीय हरियाणा टीम में जिले का एक भी एथलीट शामिल नहीं है। इस प्रतियोगिता के विजेता खिलाड़ियों को जापान में होने वाले एशियाई खेलों तक पहुंचने का अवसर मिल सकता है। ऐसे में जिले का प्रतिनिधित्व पूरी तरह से शून्य होना जिले की खेल व्यवस्था पर बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।
गुरुग्राम के ताऊ देवीलाल खेल परिसर में अत्याधुनिक सिंथेटिक एथलेटिक्स ट्रैक उपलब्ध है। यहां सरकारी कोचों के साथ-साथ बड़ी संख्या में निजी कोच भी अपनी-अपनी एथलेटिक्स अकादमियां संचालित कर रहे हैं। इसके बावजूद सीनियर वर्ग में राष्ट्रीय स्तर पर खेलने योग्य खिलाड़ी जिले से सामने नहीं आ रहे हैं।
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खेल प्रेमियों और अभिभावकों का कहना है कि जिले में एथलेटिक्स अकादमियों की संख्या बढ़ रही है, लेकिन खिलाड़ियों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने के बजाय अधिकांश अकादमियां केवल अपने प्रचार-प्रसार तक सीमित दिखाई देती हैं। कई निजी अकादमियां खिलाड़ियों की उपलब्धियों से अधिक अपने ब्रांड, लोगो और खेल सामग्री के प्रचार पर ध्यान केंद्रित कर रही है।
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