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12वीं में युवाक्षी और 10वीं में मयंक-वैष्णवी के 500/500 अंक

Sat, 23 Jul 2022 02:06 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Sat, 23 Jul 2022 02:06 AM IST
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Yuvakshi in 12th and Mayank-Vaishnavi in 10th 500500 marks
नोएडा। सीबीएसई के बदले पैटर्न और टर्म परीक्षाओं के बीच सेक्टर-44 एमिटी इंटरनेशनल स्कूल की 12वीं कक्षा की युवाक्षी विग व 10वीं के मयंक यादव और 10वीं में ही डीपीएस ग्रेटर नोएडा की वैष्णवी विनोद कपास ने सफलता का इतिहास रचा है। तीनों ने 500 में से 500 अंक हासिल कर देशभर में जिले का नाम रोशन किया है। तीनों विद्यार्थियों ने सफलता का श्रेय शिक्षकों और परिजनों को दिया है। दो टर्म में हुई परीक्षा ने दोनों ही विद्यार्थियों की चिंता बढ़ाई, लेकिन पहले टर्म में 100 प्रतिशत अंक मिलने पर उन्हें बेहतर रिजल्ट की उम्मीद थी। अब दूसरे टर्म में भी शत प्रतिशत परिणाम लाकर दोनों ने परिजनों व शिक्षकों के चेहरों पर चमक बिखेर दी। मानविकी की छात्रा युवाक्षी आगे चलकर क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट बनना चाहती हैं, जबकि मयंक यादव आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में आगे बढ़ना चाहते हैं। वहीं, वैष्णवी का सपना डॉक्टर बनने का है।
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साइकोलॉजी में बनाना है करियर, डीयू है सपना
सेक्टर-137 निवासी युवाक्षी विग दिल्ली विश्वविद्यालय से साइकोलॉजी पढ़ना चाहती हैं। पिता कार्तिक नेवी में कमांडर रह चुके हैं। मां डॉ. अनुपा विग चिकित्सक हैं। कोविड के बाद से मां की बढ़ी व्यस्तता और पढ़ाई के बदले माहौल ने युवाक्षी की चिंता बढ़ाई, लेकिन उन्हें लक्ष्य से विचलित नहीं होने दिया। उन्होंने अपना हर काम टाइम टेबल के अनुसार कर सफलता प्राप्त की। उन्होंने बताया कि पढ़ाई में एकाग्रता के साथ अनुशासन जरूरी है। पहली बार टर्म आधारित परीक्षाएं हुईं। इससे कहीं न कहीं फर्क पड़ा, लेकिन यदि मेहनत करते हैं तो हर परिस्थिति में बेहतर परिणाम आ जाते हैं। अब मिरांडा हाउस व श्रीराम कॉलेज आदि से पढ़ने का सपना पूरा करना है। वहीं, मां डॉ. अनुपा ने बताया कि बेटी ने बचपन से हर काम व्यवस्थित ढंग से किया है। पढ़ाई के लिए हमेशा टाइम मैनेजमेंट का खास ध्यान रखा। कोविड ने पढ़ाई के तरीके बदले, लेकिन ऑनलाइन व ऑफलाइन पढ़ाई लगातार जारी रही। बच्चों पर पसंद नापसंद थोपने या पढ़ाई का दबाव डालने की जगह उन्हें मानसिक रूप से मजबूत बनाने पर ध्यान दिया जाना चाहिए। बेटी मानसिक रूप से बेहद मजबूत है।
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आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में है रुचि, बदलाव में विश्वास
सेक्टर-27 निवासी मयंक यादव आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में करियर बनाना चाहते हैं। पिता डॉ. प्रवेश व डॉ. रितु यादव दोनों ही चिकित्सक हैं। मयंक ने बताया कि उनकी रुचि पेंटिंग में है। पढ़ाई से खाली वक्त मिलने पर वह पेंटिंग ही करते हैं। उनके सोशल मीडिया पर अकाउंट हैं, लेकिन वह ज्यादा समय वहां देना पसंद नहीं करते। यह उन्हें वक्त की बर्बादी लगता है। उनकी सफलता में पूरे परिवार माता-पिता, दादा-दादी, छोटी बहन का पूरा सहयोग है। सभी ने उन्हें कुछ बेहतर करने और जीवन में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। कभी भी घरवालों ने दबाव नहीं डाला। कोविड का असर परीक्षा के तरीकों पर तो पड़ा है, लेकिन ज्यादा सोचकर मन में नकारात्मकता नहीं लाना चाहते थे, इसलिए सिर्फ मेहनत पर ध्यान केंद्रित रखा। उन्हें साइंस में रुचि है और यह उन्हें पढ़ने के लिए प्रेरित करती है। शिक्षकों ने भी हमेशा प्रयास को सराहा और आगे बढ़ने में योगदान दिया।
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डॉक्टर बनने का है सपना
ग्रेटर नोएडा में रहने वाली वैष्णवी विनोद कपासे का सपना डॉक्टर बनने का है। वैष्णवी ने बताया कि परीक्षा अच्छी गई थी, लेकिन इतने नंबर आने के बारे में नहीं सोचा था। मेरी सफलता का पूरा श्रेय अभिभावकों और शिक्षकों को जाता है। स्कूल के बाद रोजाना लक्ष्य तय कर चार से पांच घंटे पढ़ती थी। सोशल मीडिया से दूर हूं। पिता डॉ. विनोद एनआईईटी कॉलेज में निदेशक हैं, जबकि मां इसी कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर हैं।
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